मोदी ने 20 मंत्रियों की बैठक बुलाई, फेरबदल की बातों के बीच रूटीन कामकाज पर नजर

The CSR Journal Magazine

अधिकारी नहीं, सीधे मंत्रियों के साथ बैठक

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर एक्शन मोड में आ गए हैं। उन्होंने 20 केंद्रीय राज्य मंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के साथ कामकाज की समीक्षा बैठक की। इस बैठक के दौरान किसी भी सीनियर IAS अधिकारी की मदद नहीं ली गई। पीएम मोदी ने यह बैठक इसलिए आयोजित की ताकि वह सीधे योजना और कार्यान्वयन की स्थिति का जायजा ले सकें। इस बैठक को राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर जब मंत्रिपरिषद में फेरबदल की कई अटकलें चल रही हैं।

किस विभाग के मंत्री हुए शामिल

बैठक में कृषि, ग्रामीण विकास, शिक्षा और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण विभागों के लगभग 20 राज्य और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री शामिल हुए। माना जा रहा है कि इन मंत्रियों ने अपने-अपने मंत्रालयों में किए गए सुधारों, पहलों और कामकाज के बारे में जानकारी साझा की। इसके अलावा उन्होंने योजनाओं के लागू होने की चुनौतियों और भविष्य के लक्ष्यों पर भी चर्चा की।

बैठक का नया फॉर्मेट

इस बैठक की विशेष बात यह थी कि इसमें न तो कैबिनेट मंत्री और न ही कोई नौकरशाह शामिल हुए। यह पीएम की नियमित साप्ताहिक मंत्रिमंडलीय बैठकों से अलग थी, जिनमें सभी सचिव भी शामिल होते हैं। इस नए फॉर्मेट ने प्रधानमंत्री को सीधे उन मंत्रियों से बात करने का अवसर दिया जो विशेष विषयों और कार्यक्रमों का प्रबंधन कर रहे हैं। यह विशेष रूप से उन मुद्दों पर चर्चा करने के लिए महत्वपूर्ण है जो सीधे केंद्र सरकार की योजनाओं से जुड़े हैं।

भविष्य की बैठकें आशाजनक

सूत्रों के अनुसार, आने वाले हफ्तों में मंत्रियों की परिषद के बाकी सदस्यों के साथ भी इसी तरह की अलग-अलग बैच में बैठकें आयोजित करने की संभावना है। यह संकेत देता है कि यह प्रयास सरकार के कामकाज की व्यापक समीक्षा का हिस्सा है। इन बैठकों ने राजनीतिक हलकों में ध्यान खींचा है, खासकर जब संभावित कैबिनेट फेरबदल की चर्चाएँ जारी हैं।

सीधे प्रदर्शन का आकलन

हालांकि, इस बैठक को मंत्रियों की परिषद में किसी भी संभावित बदलाव से जोड़ने का कोई आधिकारिक संकेत नहीं है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस कवायद पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी को इसमें विभिन्न मंत्रियों के प्रदर्शन और उनकी तैयारी का सीधा आकलन करने का अवसर मिलता है। ऐसे में यह बैठक राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

मोदी का मंत्रियों पर विश्वास

प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार इस बात पर जोर दिया है कि कुछ विभाग या विषय विशेष रूप से राज्य मंत्रियों को सौंपे जाने चाहिए। यह फॉर्मेट इस दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा सकता है, जिसमें बिना कैबिनेट सहयोगियों के सीधे मंत्रियों के साथ चर्चा की जा रही है। इससे न केवल मंत्रियों को अपनी योजनाओं को साझा करने का मौका मिलता है, बल्कि पीएम को भी बेहतर समझने में मदद मिलती है कि कौन से मंत्री अपने कार्यों में कितने प्रभावी हैं।

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