महाराष्ट्र में मौखिक नियुक्तियां रद्द, 10 सितंबर तक मूल विभाग लौटेंगे अधिकारी-कर्मचारी

The CSR Journal Magazine
महाराष्ट्र सरकार ने मंत्रियों के कार्यालयों और मंत्रालय के विभिन्न विभागों में नियमों को दरकिनार कर की गई नियुक्तियों पर बड़ा फैसला लिया है। मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से रद्द करने का आदेश दिया है। इनमें प्रतिनियुक्ति, उधार के आधार पर और केवल मौखिक आदेश से की गई नियुक्तियां शामिल हैं। सरकार ने निर्देश दिया है कि ऐसे सभी अधिकारी-कर्मचारियों को 10 सितंबर 2026 तक उनके मूल कार्यालय या विभाग में वापस भेजा जाए। यानी अब उन्हें मंत्रियों के दफ्तर या मंत्रालय में काम करने की अनुमति नहीं होगी।

जरूरी मंजूरी के बिना हुईं नियुक्तियां

सरकार के मुताबिक, कई मामलों में नियुक्ति से पहले संबंधित मूल विभाग, अपर मुख्य सचिव, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री की जरूरी मंजूरी नहीं ली गई। इसके बावजूद दूसरे विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को मंत्रियों के कार्यालयों में तैनात कर दिया गया। परिपत्र में बताया गया है कि ऐसी नियुक्तियों में डॉक्टर, स्टेनोग्राफर, शिक्षक और इंजीनियर जैसे तकनीकी कर्मचारी भी शामिल थे। इनमें से कई के पास मंत्रालय के कामकाज के लिए जरूरी प्रशिक्षण या अनुभव नहीं था। सरकार का कहना है कि इससे मंत्रालय की सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही थी।

मूल विभागों में भी बढ़ रही थी परेशानी

सरकार ने कहा कि जब कर्मचारी अपने मूल विभाग से हटकर मंत्री कार्यालय में काम करने लगते हैं, तो उनके विभाग में पद खाली रह जाते हैं। इससे वहां काम प्रभावित होता है और खाली पदों को भरने में भी परेशानी आती है। इसके अलावा मूल विभागों में कर्मचारियों को दिया गया प्रशिक्षण और उनकी विशेषज्ञता भी सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हो पा रही थी। सरकार ने इसी वजह से ऐसी अनियमित नियुक्तियों को खत्म करने का फैसला लिया है।

सेवा रिकॉर्ड की जांच पर भी सवाल

सरकार ने नियुक्ति प्रक्रिया में जरूरी जांच नहीं होने को लेकर भी चिंता जताई है। ऐसे मामलों में ईमानदारी प्रमाणपत्र, चरित्र प्रमाणपत्र, गोपनीय रिपोर्ट और विभागीय जांच जैसे सेवा रिकॉर्ड का पर्याप्त सत्यापन नहीं हो रहा था। सरकार का कहना है कि मंत्रियों के कार्यालयों का काम संवेदनशील होता है, इसलिए वहां काम करने वाले कर्मचारियों की सेवा पृष्ठभूमि और रिकॉर्ड की पूरी जांच जरूरी है।

वापस नहीं लौटे तो रुक सकता है वेतन

सरकार ने अधिकारियों को मूल विभाग में वापस भेजने के साथ इसकी निगरानी की जिम्मेदारी भी तय की है। संबंधित कार्यालय प्रमुखों और आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को 15 सितंबर तक रिपोर्ट देनी होगी कि सभी कर्मचारी अपने मूल कार्यालय में वापस पहुंच गए हैं। अगर कोई कर्मचारी तय समय में मूल कार्यालय में कार्यभार ग्रहण नहीं करता है तो उसका वेतन रोकने का निर्देश दिया गया है। वहीं संबंधित विभागों को आगे की रिपोर्ट मुख्य सचिव कार्यालय में जमा करनी होगी।

अब नियुक्ति के लिए तय प्रक्रिया जरूरी

सरकार ने भविष्य की नियुक्तियों को लेकर भी साफ निर्देश जारी किए हैं। मंत्रियों के कार्यालयों में अधिकारी या कर्मचारी नियुक्त करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग की तय प्रक्रिया का पालन करना होगा। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त पद बनाने या पदों के ढांचे में बदलाव के प्रस्ताव भी निर्धारित प्रक्रिया से मंजूरी के लिए भेजने होंगे। साथ ही, अधीनस्थ कार्यालयों के कर्मचारियों को अब उधार के आधार पर या सिर्फ मौखिक आदेश से मंत्रियों के कार्यालयों में नियुक्त नहीं किया जा सकेगा। भविष्य में ऐसी अनियमित नियुक्ति दोबारा होने पर महाराष्ट्र सिविल सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

अब क्या बदलेगा?

इस फैसले के बाद मंत्रालय और मंत्रियों के कार्यालयों में बिना तय प्रक्रिया के काम कर रहे अधिकारी-कर्मचारियों की वापसी होगी। सरकार का कहना है कि इससे प्रशासन में नियम, पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत होगी और कर्मचारियों की नियुक्ति निर्धारित व्यवस्था के तहत ही की जाएगी।

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