अमेरिका-ईरान और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्रों पर साफ दिखाई दे रहा है। एलपीजी की भारी कमी के चलते उत्पादन 40-50 प्रतिशत तक घट गया है, हजारों इकाइयां बंद होने की कगार पर हैं और करीब 60 हजार मजदूर बेरोजगार होकर पलायन करने को मजबूर हैं। भिवाड़ी, नीमराणा, जयपुर, कोटा और जोधपुर जैसे औद्योगिक हब सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
उद्योगों की रफ्तार थमी, उत्पादन आधा रह गया
राजस्थान के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों—भिवाड़ी, नीमराणा, बहरोड़, कोटा, सीकर, जयपुर और जोधपुर—में एलपीजी संकट ने उत्पादन पर गंभीर असर डाला है। फॉर्जिंग, सरिया मिल, फूड प्रोसेसिंग, रबर और हीट ट्रीटमेंट जैसे उद्योगों में एलपीजी मुख्य ईंधन है। इसकी कमी के चलते उत्पादन 40 से 50 प्रतिशत तक घट गया है। प्रदेश में संचालित करीब 5 हजार से अधिक औद्योगिक इकाइयां इस संकट से प्रभावित हैं। कई इकाइयां पूरी तरह बंद हो चुकी हैं, जबकि कुछ सीमित क्षमता पर काम कर रही हैं। खासकर सीकर के नीमकाथाना क्षेत्र में 200 में से 150 से अधिक मिनरल्स इकाइयां बंद हो चुकी हैं, जिससे हर महीने लगभग 50 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।
भिवाड़ी बना संकट का केंद्र, हजारों करोड़ का नुकसान
भिवाड़ी में हालात सबसे ज्यादा गंभीर हैं। यहां एलपीजी सप्लाई पहले पूरी तरह बाधित रही और बाद में केवल 20 प्रतिशत तक बहाल हो सकी। इससे करीब 1200 उद्योग प्रभावित हुए। वर्तमान में सप्लाई 70 प्रतिशत तक पहुंचने के बावजूद उत्पादन औसतन 50 प्रतिशत ही हो पा रहा है। उद्योग संगठनों के अनुसार, भिवाड़ी में अब तक करीब 1500 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। लगभग 40 हजार मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। लघु उद्योग भारती के पदाधिकारियों का कहना है कि कागजों में भले ही सप्लाई शुरू दिख रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अब भी बेहद खराब है।
मजदूरों का पलायन तेज, रोजी-रोटी का संकट
एलपीजी की कमी का सबसे बड़ा असर मजदूरों पर पड़ा है। फैक्ट्रियों में काम कम होने के साथ-साथ श्रमिकों को खाना बनाने के लिए भी गैस नहीं मिल रही। इस वजह से बड़ी संख्या में मजदूर अपने घर लौट रहे हैं। जयपुर में 20-30 प्रतिशत श्रमिक पलायन कर चुके हैं, जबकि जोधपुर में 10 से 15 हजार मजदूर वापस जा चुके हैं। कोटा में भी करीब 1100 श्रमिक पलायन कर चुके हैं। मजदूरों के सामने दोहरी समस्या है—एक तरफ रोजगार खत्म हो रहा है, दूसरी तरफ रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है।
कोटा और जोधपुर में उत्पादन पर गहरा असर
कोटा में एलएनजी आधारित उद्योगों को मांग के मुकाबले केवल 50 प्रतिशत गैस मिल रही है। इसके चलते यूरिया उत्पादन में भारी गिरावट आई है। पहले जहां 15 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन उत्पादन होता था, वह घटकर 5 हजार मीट्रिक टन रह गया है।
कुछ यूनिट्स को बंद भी करना पड़ा है और सरकार ने यूरिया वितरण पर रोक लगा दी है। वहीं, जोधपुर का हैंडीक्राफ्ट उद्योग भी इस संकट से अछूता नहीं रहा। यहां 100 से अधिक इकाइयां बंद हो चुकी हैं और बाकी में उत्पादन 50-60 प्रतिशत रह गया है। शहर का मासिक 300 करोड़ रुपए से अधिक का निर्यात घटकर लगभग आधा रह गया है।
सरकार से उम्मीदें, समाधान की तलाश जारी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों से रिपोर्ट मांगी है और जल्द समाधान का आश्वासन दिया है। राज्य का उद्योग विभाग भी सभी क्षेत्रों से उत्पादन और श्रमिकों की स्थिति की जानकारी जुटा रहा है।
उद्योग संगठनों का कहना है कि यदि जल्द ही एलपीजी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। इससे न केवल उद्योगों को भारी नुकसान होगा, बल्कि बेरोजगारी और पलायन का संकट भी गहरा सकता है।

