स्कूल या तबेला? जहां मवेशी बंधते थे, वहां 5 साल से पढ़ और रह रहे हैं 172 बच्चे, Karnataka सरकार ने रिपोर्ट मांगी

The CSR Journal Magazine
कर्नाटक के डॉ. बीआर अंबेडकर आवासीय विद्यालय के 172 छात्र पिछले पांच साल से एक मवेशी बाड़े में रह रहे हैं। यहाँ उनके लिए कोई उचित शिक्षण या रहने की सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। ये बच्चे रोज़ाना यहाँ खा रहे हैं, सो रहे हैं और पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी स्थिति बेहद चिंताजनक है, जो गहरी सोच को मजबूर करती है।

सलामती का सवाल: सरकारी पहल की जरूरत

इस विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों की उम्र 11 से 16 वर्ष के बीच है। इनमें कक्षा 6 से 10 तक के 92 लड़के और 80 लड़कियाँ शामिल हैं। मवेशियों के शेड में रहना उनके लिए न सिर्फ असुविधाजनक है, बल्कि सेहत पर भी बुरा असर डाल सकता है। इस हालात में बच्चों का भविष्य खतरे में है।

निर्माण कार्य की देरी: क्या है सरकार की योजना?

इस समस्या के पीछे का कारण यह है कि विद्यालय की नई बिल्डिंग का निर्माण कई महीनों से चल रहा है, लेकिन अभी तक पूरा नहीं हुआ। समाज कल्याण विभाग ने बताया कि मवेशियों के शेड में बच्चों को शिफ्ट करने के लिए कोई दूसरी जगह उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में सवाल है कि कब तक इन बच्चों को ऐसी स्थितियों में रहना पड़ेगा।

सरकार का ध्यान: क्या कदम उठाए जाएंगे?

जब से इस मामले की जानकारी राज्य सरकार को हुई है, तब से इसकी जांच शुरू कर दी गई है। प्राइमरी और सेकेंडरी एजुकेशन मिनिस्टर ने शिक्षा अधिकारियों से इस समस्या पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही बच्चों की स्थिति में सुधार होगा।

शैक्षणिक माहौल की कमी: बच्चों की रोज़मर्रा की चुनौतियाँ

इन बच्चों को क्लासरूम की सुविधा भी नहीं मिल रही है। मवेशियों के शेड में रहकर ही उन्हें अपनी पढ़ाई करनी पड़ रही है, जो चिंता का विषय है। ऐसे में यह जरूरी है कि सरकार शीघ्र ही इस दिशा में उचित कदम उठाए।

समाज कल्याण विभाग: आरोपों का जवाब

समाज कल्याण विभाग ने बच्चों की खराब स्थिति पर चिंता जताकर कहा कि उनकी प्राथमिकता बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा है। अधिकारियों का कहना है कि नई बिल्डिंग के निर्माण में देरी के कारण ही उन्हें मवेशी शेड में रखा गया है। लेकिन इस पर सवाल उठते हैं कि क्या यह सही विकल्प है।

भविष्य की चिंता: बच्चों को मिलेगी शिक्षा का अधिकार?

172 बच्चों की स्थिति गंभीर है और अब देखना यह है कि क्या राज्य सरकार इनकी समस्याओं का समाधान कर पाएगी। बच्चे देश का भविष्य हैं, लेकिन जब उनके रहने और पढ़ाई की ऐसी हालत होगी, तो आगे क्या होगा? सरकार को तत्काल कदम उठाने की जरूरत है ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।

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