पति के चले जाने के बाद ‘रानी’ का हिम्मत भरा अंदाज, गांव में खड़ी की 1.5 लाख की फौज

The CSR Journal Magazine
जनक पाल्टा मैकगिलिगन ने एक सामान्य घर की अवधारणा को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने एक ऐसा घर बनाया है जो खुद के लिए और समाज के लिए भी मिसाल बन चुका है। इंदौर के पास स्थित सनावादिया गांव में रहने वाली जनक ने अपने जीवन को पूरी तरह से सस्टेनेबल (sustainable) बनाने का संकल्प लिया। 17 साल की उम्र में गंभीर बीमारी के बाद उनकी सोच में बदलाव आया। उन्होंने अपने अनुभवों को समुदाय के लिए बेहतर भविष्य की दिशा में लगाना तय किया।

पर्यावरण के प्रति जिद और संकल्प

जनक का पर्यावरण के प्रति रुझान 1992 में ब्राजील के रियो डी जनेरियो में हुए पहले अर्थ समिट से और मजबूत हुआ। वहां उन्होंने पर्यावरण के प्रति लोगों की जागरूकता को जाना और खुद से एक वादा किया कि वह एक बेहतर और रिस्पॉन्सिबल जीवन जीएंगी। उनके पति की मौत के बाद जब वह अपने गांव लौटीं, तब उन्होंने दृढ़ता से अपने इस वादे को पूरा करने का निर्णय लिया।

बिजली बिल से मुक्ति

जनक के घर की सबसे खास बात यह है कि यहाँ बिजली का बिल नहीं आता। उनकी लगाई हुई विंडमिल (windmill) न केवल उनके घर की ऊर्जा जरूरत पूरी करती है, बल्कि आसपास के लगभग 50 घरों को भी ऊर्जा प्रदान करती है। इस तरह, उनके घर में उत्पादित रिन्यूएबल एनर्जी ने पूरे समुदाय को लाभ पहुंचाया है।

ऑर्गेनिक खेती की मिसाल

जनक ने अपने घर के आस-पास एक बड़ा ऑर्गेनिक गार्डन विकसित किया है जहां वह खुद सब्जियां, दालें, और अनाज उगाती हैं। उनके पास लगभग 160 पेड़ और 13 प्रकार की फसलें हैं। इस तरह, उन्होंने बाजार पर निर्भरता कम कर दी है और प्राकृतिक खेती को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है।

सोलर कुकिंग की अनोखी तकनीक

जनक के घर में खाना पकाने की प्रक्रिया भी काफी अलग है। वह सोलर कुकर का इस्तेमाल करते हुए खाना बनाती हैं, जिससे पारंपरिक ईंधन की आवश्यकता कम होती है। जब धूप नहीं होती, तो वह पुराने अखबारों से ईंधन की ईंटें बनाती हैं, जिसका इस्तेमाल किचन में किया जाता है। इस प्रकार, उन्होंने बेकार कागज का पुनर्नवीनीकरण कर एक सस्टेनेबल विकल्प बनाया है।

कचरा प्रबंधन का अनूठा तरीका

जनक की जीवनशैली का एक और महत्वपूर्ण पहलू कचरा प्रबंधन है। किचन के कचरे को खाद में बदलकर, उन्होंने न केवल कचरे की मात्रा कम की है, बल्कि एक सस्टेनेबल जीवनशैली को अपनाया है। अपने घर से प्राकृतिक वस्तुओं जैसे साबुन, जैम और डिटर्जेंट का निर्माण करके, उन्होंने पैकेज्ड प्रोडक्ट्स पर निर्भरता कम कर ली है।

समुदाय में जागरूकता फैलाने का मिशन

जनक पाल्टा सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में अपने प्रयासों के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने ‘जिमी मैकगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ की स्थापना की है, जिसमें उन्होंने ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को सस्टेनेबल लाइफस्टाइल से संबंधित ट्रेनिंग दी है। उनके कार्यक्रम ने लाखों लोगों को लाभ पहुंचाया है।

समाज सेवा के लिए पद्म श्री सम्मान

जनक पाल्टा को समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 2015 में पद्म श्री सम्मान मिला। यह सम्म्मान उनके कई वर्षों के मेहनत और समर्पण का एक बड़ा प्रमाण है, जिसने उन्हें एक आदर्श स्थिति में लाकर खड़ा किया है। उनके काम के जलवे अब केवल उनके घर तक सीमित नहीं रहे, बल्कि गांवों में भी फैल चुके हैं।

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