ब्रह्मोस, आकाश, अस्त्र का दम: भारत ने बदले मिसाइल नियम तो घबराए पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स

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मिसाइल निर्माण के बदले नियम: ब्रह्मोस-अस्त्र की ताकत देख पाकिस्तानी दिग्गजों के उड़े होश, क्षेत्रीय संघर्ष का खतरा बढ़ा

इस्लामाबाद/नई दिल्ली: भारत ने अपनी मिसाइल निर्माण प्रक्रिया को तेज करने के साथ-साथ निजी क्षेत्र को भी शामिल कर लिया है। इस नई नीति का सीधा असर पाकिस्तान पर देखने को मिल रहा है। पाकिस्तान की शीर्ष थिंक टैंक, सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्ट्रैटजिक स्टडीज (CISS) के फेलो, यासिर हुसैन ने चेतावनी दी है कि भारत की यह नई नीति दक्षिण एशिया में संघर्ष को बढ़ा सकती है। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक हथियारों का निर्माण नए संघर्ष के तरीकों की खोज को प्रोत्साहित कर सकता है।

भारत की मिसाइल निर्माण में बदलाव

यासिर हुसैन ने भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस निर्णय का संदर्भ दिया, जिसमें DRDO को प्राइवेट सेक्टर को मिसाइल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने की अनुमति दी गई थी। नई नीति में जमीन पर हमला करने वाली क्रूज मिसाइलें, जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और एंटी-टैंक हथियारों जैसी विविध प्रणालियाँ शामिल हैं। यह परिवर्तन भारत की सैन्य क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

संवेदनशील टेक्नोलॉजी का निजीकरण

ISRO ने भी इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (IN-SPACe) के माध्यम से निजी क्षेत्र के साथ संवेदनशील टेक्नोलॉजी साझा करना शुरू कर दिया है। यह सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के बीच का एक इंटरफेस बनाता है। यासिर हुसैन का कहना है कि इस तरह का बदलाव भारत के मिसाइल निर्माण में नई दिशा का संकेत देता है।

नए सिरे से बदल रहा उत्पादन ढांचा

पाकिस्तानी विशेषज्ञों का मानना है कि अब भारत की मिसाइल टेक्नोलॉजी पर सरकारी नियंत्रण कम होता जा रहा है। यह अमेरिका के हथियार निर्माण मॉडल की ओर बढ़ने का संकेत है, जो निरंतर हथियारों की मांग बढ़ाता है। इसका मतलब है कि भारत को अपने उत्पादन को बनाए रखने के लिए स्थायी रूप से संघर्ष की आवश्यकता होगी।

प्राइवेट कंपनियों का बढ़ता महत्व

यासिर हुसैन ने यह भी बताया कि प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों जैसे अडानी डिफेंस और एयरोस्पेस इंडिया अब हथियार निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। जब ये कंपनियाँ निर्माण में भारी निवेश करती हैं, तो उन्हें निरंतर मुनाफा के लिए हथियारों के अधिक ऑर्डर की आवश्यकता होती है। इसका परिणाम दक्षिण एशिया में मिसाइलों की मांग में भारी वृद्धि के रूप में सामने आ सकता है।

क्षेत्रीय तनाव का कारण

पाकिस्तानी थिंक टैंक के विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का यह निर्णय खतरनाक नतीजों को जन्म दे सकता है। संवेदनशील मिसाइल टेक्नोलॉजी का निजी क्षेत्र में जाना, एक स्थायी घरेलू प्रणाली का निर्माण नहीं करेगा। इससे पहले से ही अस्तित्व में आने वाले संघर्षों और अनसुलझे विवादों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

भविष्य की अनिश्चितताएँ

विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण एशिया में ऐसी हथियारों की दौड़, जिसमें प्रगतिशील मिसाइल सिस्टम की निर्माण क्षमता हो, क्षेत्र में भयंकर परिणाम ला सकती है। साउथ एशिया का यह इलाका हथियारों की दौड़ से उत्पन्न खतरों का सामना नहीं कर सकता है।

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