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February 25, 2026

देश की सुरक्षा का नया फॉर्मूला, बन रहा है स्वदेशी बेबी ब्रह्मोस

The CSR Journal Magazine
रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि भविष्य की जंग अब काफी लंबी होने वाली है। इस परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए, भारत अपने सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने में जुट गया है। अब सेना का ध्यान महंगी मिसाइलों की जगह उनके ‘मिनी मॉडल्स’ पर है, जिनकी संख्या बड़ी होगी। हाल में, पिनाका रॉकेट सिस्टम के ‘हवाई संस्करण’ का परीक्षण भी इसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। बेबी ब्रह्मोस का जिक्र किया जा रहा है, जो अपनी अचूक सटीकता और मारक क्षमता के लिए जाना जाता है।

India Defence System Baby Brahmos: कम खर्च में उच्च तकनीक वाले हथियार

सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने इस बदलाव को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यदि हमारे पास किफायती लेकिन उच्च तकनीक वाले हथियार होंगे, तो हम लंबी जंग के दौरान किसी भी बड़े दुश्मन का मुकाबला कर सकेंगे। रक्षा संबंधी स्थायी समिति ने भी अपनी हालिया रिपोर्ट में यह नीति स्वीकार की है कि हमें सस्ते और स्वदेशी हथियारों की आवश्यकता है जो बड़े पैमाने पर देश में बन सकें।

विदेशी सप्लाई चेन से मुक्ति

बजट में आवंटित धन का एक बड़ा हिस्सा स्वदेशी खरीद के लिए सुरक्षित रखा गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध के समय में हमें विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भर न रहना पड़े। हाल के संघर्षों ने दिखाया है कि तकनीकी हथियारों के बिना, उन्नत देश भी मुश्किल में पड़ सकते हैं। उदाहरण के लिए, इजरायल-हमास युद्ध में इजरायल को हजारों रॉकेट गिराने पर लाखों रुपये खर्च करने पड़े।

लॉन्ग ड्यूरेशन वॉर में तैयारी

यूक्रेन और सूडान में सस्ते ड्रोन्स ने भी बड़ा प्रभाव डाला। इन घटनाओं ने यह साबित किया है कि जंग केवल महंगे हथियारों से नहीं लड़ी जा सकती। छोटे और स्वदेशी हथियारों के बड़े भंडार से भी जीत हासिल हो सकती है। म्यांमार में विद्रोहियों ने नए तरीकों का इस्तेमाल करते हुए बड़ा नुकसान नहीं होने दिया, जिससे यह धारणा बनी कि अब संगठित और सस्ते हथियारों से सफलता मिल सकती है।

आयरन बीम जैसी तकनीक की ओर बढ़ते जंग के मैदान

भारत इजरायल से ‘आयरन बीम’ जैसी लेजर आधारित प्रणाली भी प्राप्त कर रहा है। यह तकनीक बेहद कम खर्च में रॉकेटों को हवा में नष्ट कर देती है, जिससे लड़ाई में पैसे की बचत होती है। जबकि, छोटे हथियारों के निर्माण में भारत तेजी से प्रगति कर रहा है। आर्मेनिया के बाद, अब फ्रांस ने भी पिनाका रॉकेट सिस्टम में व्यापक रुचि दिखाई है। ये सब संकेत करते हैं कि भारत अपने रक्षा तंत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।

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