हरियाणा में किसान आंदोलन के चलते बॉर्डर सील, इंटरनेट सेवा बंद

The CSR Journal Magazine

हरियाणा में सुरक्षा कड़ी, किसान आंदोलन के बीच सील हुए बॉर्डर, प्रशासन की तत्परता

हरियाणा सरकार ने बॉर्डर सील कर दिए हैं ताकि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थकों और किसानों को दिल्ली पहुंचने से रोका जा सके। प्रदर्शन के चलते अंबाला में शंभू बॉर्डर पर धारा 163 लागू कर दी गई है। किसान संगठन अमेरिका-भारत फ्री ट्रेड डील के खिलाफ देशव्यापी महापंचायत आयोजित कर रहे हैं, जिसके चलते प्रशासन ने बॉर्डर पर सख्ती बरतने का निर्णय लिया है।

किसान आंदोलन के मद्देनजर शंभू और खनौरी बॉर्डर पूरी तरह सील

कृषि सुधारों, फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी और विभिन्न लंबित मांगों को लेकर किसानों के दिल्ली कूच के ऐलान के बाद हरियाणा में सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत कड़ी कर दी गई है। राज्य प्रशासन ने पंजाब से लगती सीमाओं को पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया है। हरियाणा सरकार के निर्देशों पर अंबाला के शंभू बॉर्डर और जींद के खनौरी बॉर्डर समेत कई संवेदनशील सीमाओं को कंक्रीट की दीवारों, कटीले तारों और भारी बैरिकेडिंग के जरिए सील कर दिया गया है।

धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू

प्रशासनिक मुस्तैदी और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए अंबाला में शंभू बॉर्डर और उसके आसपास के इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू कर दी गई है। इस आदेश के तहत किसी भी स्थान पर पांच या पांच से अधिक व्यक्तियों के इकट्ठा होने, किसी भी प्रकार के हथियार, लाठी, डंडा या ज्वलनशील पदार्थ लेकर चलने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और शांति व्यवस्था को अक्षुण्ण रखने के लिए उठाया गया है।

सीमाओं पर अभेद्य किलेबंदी और सुरक्षा बलों का कड़ा पहरा

हरियाणा और पंजाब को जोड़ने वाले मुख्य रास्तों पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई है। शंभू बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई लेयर की बैरिकेडिंग की गई है। सड़क के बीचों-बीच कंक्रीट के बड़े-बड़े ब्लॉक रखे गए हैं, जिन्हें आपस में जोड़ने के लिए कटीले तारों का सहारा लिया गया है। इसके अलावा, सड़कों पर लोहे की नुकीली कीलें भी लगाई गई हैं ताकि प्रदर्शनकारियों के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों के पहियों को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

CRPF और RAF तैनात

अंबाला, जींद, कुरुक्षेत्र, सिरसा और कैथल जिलों में पुलिस बल के साथ-साथ केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की कंपनियों को तैनात किया गया है। रैपिड एक्शन फोर्स के जवान दंगा नियंत्रण उपकरणों, आंसू गैस के गोलों और वॉटर कैनन (पानी की बौछार करने वाली गाड़ियों) के साथ मुस्तैद हैं। पंजाब की तरफ से आने वाले हर छोटे-बड़े वाहन की सघन चेकिंग की जा रही है और केवल आपातकालीन वाहनों को ही लंबी जांच के बाद जाने की अनुमति दी जा रही है।

राजनीतिक दलों और समर्थकों की गतिविधियों पर पैनी नजर

इस बार के आंदोलन और दिल्ली कूच को लेकर खुफिया एजेंसियां भी पूरी तरह सक्रिय हैं। प्रशासन को ऐसी रिपोर्ट मिली है कि इस आंदोलन के बहाने विभिन्न राजनीतिक संगठनों, कार्यकर्ताओं और स्थानीय दलों के समर्थक भी दिल्ली पहुंचने की फिराक में हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) जैसी स्थानीय राजनीतिक इकाइयों और उनके समर्थकों की गतिविधियों पर प्रशासन और पुलिस की विशेष नजर है। गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि किसी भी राजनीतिक दल या बाहरी संगठन को इस संवेदनशील माहौल का फायदा उठाकर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पुलिस ने कई जिलों में स्थानीय नेताओं और आंदोलन के सक्रिय कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी कर शांति बनाए रखने की अपील की है। साथ ही, कुछ संदेहास्पद तत्वों को ऐहतियातन हिरासत में लेने या नजरबंद करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध और सोशल मीडिया की निगरानी

सुरक्षा उपायों के तहत हरियाणा सरकार ने कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद, हिसार, फतेहाबाद और सिरसा सहित पंजाब से सटे कई जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं, बल्क एसएमएस (Bulk SMS) और डोंगल सेवाओं पर अस्थाई रोक लगा दी है। सरकार का मानना है कि भड़काऊ भाषणों, अफवाहों और फर्जी खबरों के प्रसार को रोकने के लिए इंटरनेट पर पाबंदी लगाना बेहद जरूरी था। इसके साथ ही, हरियाणा पुलिस का साइबर सेल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, एक्स (ट्विटर), व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पर लगातार नजर रख रहा है। पुलिस महानिदेशक कार्यालय की ओर से जारी एक चेतावनी में साफ कहा गया है कि यदि कोई भी व्यक्ति या संगठन भड़काऊ पोस्ट, वीडियो या भ्रामक जानकारी साझा करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आम जनता और यात्रियों की बढ़ीं मुश्किलें

बॉर्डर सील होने और सड़कों पर भारी बैरिकेडिंग के कारण दिल्ली-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) सहित कई प्रमुख मार्गों पर यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है। इसके चलते दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और गंभीर मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अंबाला और जींद के रास्ते पंजाब जाने वाली या पंजाब से दिल्ली की ओर आने वाली बसों और अन्य यात्री वाहनों के पहिए थम गए हैं। यातायात पुलिस ने यात्रियों की सुविधा के लिए कई वैकल्पिक मार्गों (Diverted Routes) की घोषणा की है, लेकिन इन लिंक रोड्स और ग्रामीण रास्तों पर भारी वाहनों का दबाव बढ़ने के कारण किलोमीटर लंबा जाम लग रहा है। चंडीगढ़ से दिल्ली जाने वाले यात्रियों को वाया पंचकुला, बरवाला, शाहजादपुर और यमुनानगर होकर जाने की सलाह दी गई है। हालांकि, लंबे रूट के कारण यात्रा के समय और किराए में भारी बढ़ोतरी हो गई है, जिससे आम जनता में असमंजस और परेशानी का माहौल है।

किसान नेताओं का रुख और सरकार से वार्ता की मांग

दूसरी ओर, किसान यूनियनों के नेताओं का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर दिल्ली जाना चाहते हैं। उनका आरोप है कि सरकार उनकी जायज मांगों को सुनने के बजाय लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन कर रही है और उन्हें अपराधियों की तरह सीमाओं पर रोकने का प्रयास किया जा रहा है। किसान संगठनों का साफ कहना है कि जब तक स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर सभी फसलों की MSP पर खरीद की कानूनी गारंटी नहीं मिलती और पिछले आंदोलनों के दौरान दर्ज किए गए मुकदमे वापस नहीं लिए जाते, तब तक उनका यह संघर्ष जारी रहेगा। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी तरह के टकराव के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन अगर उन्हें रोका गया तो वे सीमाओं पर ही अनिश्चितकालीन पड़ाव डालने को मजबूर होंगे। उनके ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में महीनों का राशन, टेंट का सामान और रोजमर्रा की जरूरत की चीजें मौजूद हैं, जो यह संकेत देती हैं कि किसान लंबी लड़ाई की तैयारी के साथ आए हैं।

किसान संगठन और सरकार के बीच लड़ाई

किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच अब तक हुई विभिन्न दौर की वार्ताओं में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई है, लेकिन दोनों पक्षों के अपने-अपने रुख पर अड़े होने के कारण यह गतिरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी का मुद्दा

किसानों का रुख: किसान संगठनों की सबसे प्रमुख मांग है कि देश की सभी 23 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की खरीद सुनिश्चित करने के लिए एक सख्त कानून बनाया जाए। उनका तर्क है कि कानूनी गारंटी के बिना निजी व्यापारी किसानों का शोषण करते हैं।

सरकार का प्रस्ताव

सरकार ने प्रस्ताव दिया था कि सहकारी समितियां (जैसे NCCF और NAFED) किसानों के साथ 5 साल का अनुबंध करेंगी। इसके तहत मक्का, कपास और विभिन्न दालों (अरहर, उड़द, मसूर) की पूरी फसल एमएसपी पर खरीदी जाएगी, जिसकी कोई सीमा नहीं होगी। किसान नेताओं ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि सरकार केवल कुछ फसलों पर सीमित फॉर्मूला दे रही है, जबकि मांग सभी 23 फसलों के लिए देशव्यापी कानूनी गारंटी की है।

स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करना

किसान मांग कर रहे हैं कि फसलों के दाम डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के C2+50% फॉर्मूले के आधार पर तय किए जाएं। इसके तहत फसल की कुल उत्पादन लागत (जमीन के किराए और पूंजी पर ब्याज सहित) में 50 प्रतिशत जोड़कर मूल्य तय होना चाहिए। सरकार का कहना है कि वह पहले से ही लागत (A2+FL) पर 50% से अधिक मुनाफा जोड़कर एमएसपी घोषित कर रही है। पूरे देश में अचानक C2+50% फॉर्मूला लागू करने से सरकारी खजाने और अर्थव्यवस्था पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा।

नए ‘भारत-अमेरिका व्यापार समझौते‘ का विरोध (नवीनतम विवाद)

किसान संगठनों (जैसे देश बचाओ मोर्चा) ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) का कड़ा विरोध किया है। उनका आरोप है कि इस समझौते से विदेशी कृषि और डेयरी उत्पाद भारतीय बाजारों में आ जाएंगे, जिससे स्थानीय किसानों की आजीविका और खाद्य संप्रभुता खतरे में पड़ जाएगी। किसान वार्ता से जुड़े सभी दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय का तर्क है कि यह व्यापारिक समझौता देश के आर्थिक विकास और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है। सरकार का दावा है कि वह देश के संवेदनशील कृषि क्षेत्रों और किसानों के हितों (Red Lines) से कोई समझौता नहीं करेगी।

कर्ज माफी और पेंशन योजना

देश के सभी किसानों और कृषि मजदूरों के लिए पूर्ण कर्ज माफी की घोषणा की जाए। साथ ही, 60 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक किसान के लिए प्रति माह ₹10,000 पेंशन सुनिश्चित की जाए। सरकार का कहना है कि वह ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि‘ (PM-KISAN) और ‘किसान मानधन योजना’ के जरिए पहले से ही वित्तीय सहायता और पेंशन दे रही है। पूर्ण कर्ज माफी का फैसला राज्यों की वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है, इसलिए इस पर एकमुश्त देशव्यापी घोषणा संभव नहीं है।

मुकदमों की वापसी और मुआवजा

पिछले आंदोलनों के दौरान किसानों पर दर्ज किए गए सभी पुलिस केस वापस लिए जाएं, आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा व सरकारी नौकरी मिले और लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों को न्याय मिले। सरकार सैद्धांतिक रूप से मुकदमों की वापसी पर सहमत हुई है, लेकिन प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण राज्यों के स्तर पर इस पर कार्रवाई अभी लंबित है।

प्रशासनिक अधिकारियों की मुस्तैदी और समन्वय

अंबाला के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक लगातार शंभू बॉर्डर का दौरा कर स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने सीमावर्ती इलाकों के अस्पतालों को अलर्ट पर रखा है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एम्बुलेंस तथा फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को बॉर्डर के नजदीक तैनात किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि पुलिस का पहला प्रयास बातचीत के जरिए स्थिति को संभालने का होगा, लेकिन यदि किसी ने सुरक्षा घेरा तोड़ने या कानून हाथ में लेने की कोशिश की, तो बल प्रयोग करने से भी गुरेज नहीं किया जाएगा। आसपास के गांवों के सरपंचों और मौजिज लोगों के साथ भी पुलिस प्रशासन बैठकें कर रहा है ताकि ग्रामीण युवाओं को इस आंदोलन में शामिल होने और किसी भी तरह की हिंसक गतिविधि का हिस्सा बनने से रोका जा सके। पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।

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