हार्वर्ड में 9 दिन तक गूंज रही रामचरितमानस की चौपाइयां, तुलसी जयंती पर खास आयोजन

The CSR Journal Magazine
अमेरिका की प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में इन दिनों भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की खास झलक देखने को मिल रही है। भारतीय आध्यात्मिक गुरु मोरारी बापू यहां नौ दिवसीय रामचरितमानस पाठ और रामकथा कर रहे हैं। ‘मानस गुरु प्रसाद’ नाम से शुरू हुआ यह आयोजन 15 अगस्त से 23 अगस्त तक चलेगा। यह आयोजन हार्वर्ड के सैंडर्स थिएटर में हो रहा है। रामचरितमानस की चौपाइयों और भगवान राम के जीवन प्रसंगों के जरिए भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, साहित्य और जीवन मूल्यों को समझने की कोशिश की जा रही है। कार्यक्रम में रामायण पर अध्ययन करने वाले विद्वान और अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े वक्ता भी हिस्सा ले रहे हैं।

तुलसी जयंती पर खास आयोजन

इस नौ दिवसीय कार्यक्रम में 19 अगस्त को तुलसी जयंती भी मनाई गई। यह दिन रामचरितमानस के रचयिता और महान कवि-संत गोस्वामी तुलसीदास की जयंती के रूप में मनाया जाता है। आयोजन के जरिए रामकथा और रामचरितमानस की परंपरा को आगे बढ़ाने, समझने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने वालों को सम्मान देने का संदेश भी दिया गया। मोरारी बापू लंबे समय से रामचरितमानस पर रामकथा करते आ रहे हैं। उनके आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार हार्वर्ड में होने वाली यह कथा उनकी 982वीं रामकथा है। आयोजन में आध्यात्मिक पाठ के साथ विद्वानों के लिए चर्चा और संवाद का भी हिस्सा रखा गया है।

राम की वनवास यात्रा से जुड़े तीर्थों की चर्चा

कार्यक्रम के दौरान हार्वर्ड के लक्ष्मी मित्तल एंड फैमिली साउथ एशिया इंस्टीट्यूट की फैकल्टी डायरेक्टर प्रोफेसर डायना एक ने भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण की वनवास यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अयोध्या से प्रयाग, चित्रकूट, पंचवटी और किष्किंधा होते हुए रामेश्वरम तक की 14 वर्ष की यात्रा ने भारत के कई स्थानों को धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान दी। समय के साथ ये जगहें तीर्थस्थलों में बदल गईं और आज भी श्रद्धालु भगवान राम की यात्रा से जुड़े इन स्थानों की यात्रा करते हैं।

भारत से बाहर भी पहुंची रामलीला की परंपरा

प्रोफेसर डायना एक ने राम की यात्रा को रामलीला की परंपरा से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि रामलीला की परंपरा भारत की सीमाओं से बाहर भी पहुंची है। थाईलैंड, इंडोनेशिया और कंबोडिया जैसे देशों में भी रामकथा और रामायण से जुड़ी सांस्कृतिक परंपराएं देखने को मिलती हैं। यानी हार्वर्ड में हो रहा यह आयोजन केवल धार्मिक पाठ तक सीमित नहीं है। यह भारतीय साहित्य, संस्कृति और सदियों पुरानी रामकथा परंपरा को वैश्विक अकादमिक मंच पर सामने रखने का अवसर भी बन रहा है।

‘सत्य, प्रेम और करुणा’ से जुड़ा संदेश

यूके हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य डोलर पोपट ने भी आयोजन के महत्व पर बात की। उन्होंने हार्वर्ड के आदर्श वाक्य ‘वेरिटास’ यानी सत्य का उल्लेख करते हुए इसे सत्य, प्रेम और करुणा जैसे मूल्यों से जोड़कर देखा। रामकथा के जरिए इन मानवीय मूल्यों को सामने रखना इस आयोजन की खास बातों में शामिल है। आध्यात्मिक परंपरा और अकादमिक चर्चा का यह मेल भारतीय संस्कृति को एक अलग वैश्विक मंच देता है।

विदेश में गूंजा रामचरितमानस का संदेश

हार्वर्ड में चल रही नौ दिवसीय रामकथा इस मायने में खास है कि यहां रामचरितमानस का पाठ केवल धार्मिक नजरिए से नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य, संस्कृति, इतिहास और परंपरा के व्यापक संदर्भ में भी चर्चा का हिस्सा बन रहा है। 23 अगस्त तक चलने वाले इस आयोजन में रामकथा के साथ विभिन्न विद्वानों के संवाद और चर्चाएं भी जारी रहेंगी। इससे भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के प्रतिष्ठित शैक्षणिक मंचों में नए तरीके से समझने का अवसर मिल रहा है।

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