बारिश के लिए मशहूर मेघालय में सूखे जैसे हालात, 59% कम हुई मानसूनी बारिश

The CSR Journal Magazine

अब तक की सबसे कम बारिश का सामना

नई दिल्ली: मेघालय, जो दुनिया की सबसे ज्यादा बारिश वाली जगहों में से एक है, 2026 में मानसून के दौरान 59% तक बारिश में कमी देख रहा है। यहां की 11 में से 10 जिलों में बारिश की कमी या गंभीर कमी के हालात बन चुके हैं। यह स्थिति कृषि, पानी की सुरक्षा, और पेयजल की आपूर्ति के लिए बड़ी चिंता बन गई है। बारिश की कमी के चलते सूखा जैसे हालात पैदा हो रहे हैं, जिसका असर सीधे किसानों की आजीविका पर पड़ सकता है।

खराब मानसून का असर

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, 15 सितंबर तक मेघालय में सामान्य से 59 प्रतिशत कम बारिश हुई। इस दौरान वेस्ट जयंतिया हिल्स जिले में 79% और ईस्ट खासी हिल्स जिले में 53% बारिश की कमी देखी गई। टॉप rainfall spots जैसे मौसिनराम और चेरापूंजी भी इस कमी से अछूते नहीं रह गए हैं। केवल साउथवेस्ट खासी हिल्स जिला एकमात्र क्षेत्र रहा जहां सामान्य से 58% अधिक बारिश हुई।

दीर्घकालिक जलवायु परिवर्तन

मेघालय में बारिश की कमी का यह ट्रेंड पिछले कुछ सालों से देखा जा रहा है। 30 साल के आंकड़ों के अनुसार, मानसून की बारिश में लगातार गिरावट आई है। राज्य की 77% आबादी कृषि पर निर्भर है, और कृषि क्षेत्र का योगदान राज्य की अर्थव्यवस्था में 21% है। जबकि, कुल खेती क्षेत्र केवल 15.28% है। सिंचाई के लिए उपलब्ध क्षेत्र भी गंभीर रूप से सीमित है, जो सूखे जैसी स्थितियों को और बढ़ा रहा है।

जल संसाधनों का संकट

मेघालय की खेती का अधिकांश हिस्सा झरनों और जल धाराओं पर निर्भर है, जो बारिश से भरपूर रहते हैं। यदि बारिश में कमी जारी रही, तो इससे न केवल कृषि बल्कि पीने के पानी की उपलब्धता भी खतरे में पड़ जाएगी। मेघालय बेसिन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MBDA) के अनुसार, 80% गांवें पानी और सिंचाई के लिए झरनों पर निर्भर हैं। ऐसे में, अगर झरने सूख जाते हैं तो यह पूरे ग्रामीण समुदाय के लिए संकट पैदा कर सकता है।

मानव गतिविधियों का प्रभाव

MBDA के एक रिपोर्ट में कहा गया है कि खनन, गैर-टिकाऊ खेती और वन संसाधनों का दोहन जैसे मानव गतिविधियों के कारण मेघालय में बारिश की कमी हो रही है। ऐसे कार्यों के चलते आधे से अधिक झरने सूख गए हैं या उनका पानी का प्रवाह कम हो गया है। ग्रामीण लोग जलवायु परिवर्तन और भूमि के उपयोग के तरीकों में बदलाव को इसके प्रमुख कारण मानते हैं।

कृषि और जलवायु नीति

मेघालय के SAPCC 2023-2030 में खेती समेत जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर विशेष ध्यान दिया गया है। खेती के क्षेत्र को प्राथमिकता वाले सेक्टरों में रखा गया है। यदि ऐसा ही स्थिति बनी रही, तो यह न केवल स्थानीय कृषि को प्रभावित करेगा, बल्कि समग्र पर्यावरण पर भी दुष्प्रभाव डालेगा। जलवायु परिवर्तन की इस चुनौती से निपटने के लिए ठोस नीतियों की आवश्यकता है।

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