दिल्ली की हवा में सुधार के लिए 14 साल का समय, नहीं माने गए नियम तो और खराब होगी सेहत; रिपोर्ट में दावा

The CSR Journal Magazine
दिल्ली की हवा का प्रदूषण एक बड़ी समस्या है, जिसका प्रभाव सीधे लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट से पता चलता है कि अगर दिल्ली 2026 तक राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों को हासिल कर लेती है, तो 2040 तक PM2.5 का स्वास्थ्य बोझ 20 प्रतिशत तक कम हो सकता है। लेकिन अगर इसमें 8 साल की देरी हो गई, तो कमी केवल 10 प्रतिशत होगी। इससे स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने की संभावना है।

अनुरूप मानकों का पालन जरूरी

रिपोर्ट के अनुसार, अगर दिल्ली को निर्धारित समय पर वायु गुणवत्ता मानकों तक पहुंचना है, तो उसे तत्काल कदम उठाने होंगे। इसमें सुधार के लिए अनेक कदम सुझाए गए हैं। जानकारों का मानना है कि अगर तत्काल उपाय लागू नहीं किए गए, तो लोगों की सेहत और भी खराब हो सकती है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट की सच्चाई

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कोएलिशन (CCAC) द्वारा जारी रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण के एक साथ मुकाबले के लिए 25 उपाय सुझाए गए हैं। इनमें ऊर्जा को बढ़ावा देना, ऊर्जा दक्षता में सुधार और वाहनों के उत्सर्जन को सख्त करना शामिल हैं। अगर इन उपायों को समय पर लागू किया गया, तो उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।

आर्थिक लाभ की संभावना

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अगर ये उपाय समय पर लागू होते हैं, तो वैश्विक आर्थिक लाभ 2035 तक GDP के 2.8 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इसके बाद वर्ष 2050 तक यह लाभ 4.5 प्रतिशत और 2100 तक 11.4 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। ऐसी स्थिति में न केवल स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि आर्थिक विकास भी तेज होगा।

हर साल की देरी का असर

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर उपायों में देरी की जाती है, तो हर साल के लिए वैश्विक GDP के 0.5 प्रतिशत के संभावित लाभ का नुकसान हो सकता है। इस तरह का नुकसान 1.5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो सकता है, जिसमें आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी दोनों स्तरों पर नुकसान शामिल रहेगा।

संस्थागत बाधाएं चुनौती

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वैश्विक स्तर पर औसतन 7.5 से 8 वर्षों की कार्यान्वयन देरी की उम्मीद है। इसमें सबसे बड़ा योगदान संस्थागत बाधाओं का है, जो कि 15 वर्षों की मानक प्रक्रिया में लगभग 2.4 साल के लिए जिम्मेदार हैं। अगर ये बाधाएं दूर नहीं हुईं, तो 2035 तक संभावित उत्सर्जन कटौती के लाभ आधे में कम हो जाएंगे।

समय से उपायों का कार्यान्वयन आवश्यक

रिपोर्ट में यह बताया गया है कि अगर सही समय पर आवश्यक उपाय लागू किए गए, तो PM2.5 और ओजोन के संपर्क में आने की समस्या में काफी कमी आ सकती है। इससे न केवल दिल्ली बल्कि पूरे देश के स्वास्थ्य और आर्थिक विकास में सुधार होगा। सुनिश्चित करना होगा कि सभी उपाय समय पर और सही तरीके से लागू हो सकें।

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