जमुई के स्कूल में मवेशियों के बीच पढ़ाई: हालात गंभीर

The CSR Journal Magazine
बिहार: जमुई के प्राथमिक विद्यालय जमुनियाटांड़ में 79 बच्चों की पढ़ाई बुनियादी सुविधाओं की कमी से प्रभावित हो रही है। स्कूल परिसर में न तो चारदीवारी है और न ही पीने के पानी की समुचित व्यवस्था। शौचालय भी दयनीय हालत में हैं। चारों ओर घास उगी हुई है, और बिना चारदीवारी के मवेशी खुलेआम परिसर में घूमते रहते हैं। इस कठिन परिस्थिति में एक प्रधान शिक्षिका और दो सहायक शिक्षक बच्चों को पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन आवश्यक संसाधनों की कमी उनकी मुश्किलें बढ़ा रही है।

निर्माण कार्य का ठप होना

स्कूल परिसर में चारदीवारी के निर्माण के लिए सामग्री आ चुकी है, लेकिन कार्य आधा अधूरा पड़ा हुआ है। सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्रियों के साथ-साथ जमीन की खुदाई भी की गई है, पर निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ा। स्कूल से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सामग्री आने के बाद सभी काम ठप हो गए हैं। यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है।

रसोईघर का हाल बुरा

मध्याह्न भोजन के लिए बनाए जाने वाला रसोईघर भी वर्षों से अधूरा है। भवन के अंदर और आसपास पेड़-पौधे उग आए हैं, जिससे भोजन व्यवस्था को लेकर स्कूल को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे बच्चों को सही समय पर खाना नहीं मिल पा रहा है, जो उनकी सेहत पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।

मरम्मत के नाम पर सिर्फ चर्चा

खबरों के मुताबिक, स्कूल भवन की मरम्मत के लिए राशि आई है, लेकिन यह पैसे जमीन पर कोई खास असर नहीं डाल पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मिट्टी भराई का काम भी कहीं नजर नहीं आ रहा है। इस प्रकार की समस्याएं लंबे समय से चल रही हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है।

नक्सली हमले का असर

जमुनियाटांड़ स्कूल पहले नक्सली हिंसा का शिकार रह चुका है। वर्षों पहले नक्सलियों ने स्कूल भवन को बम से उड़ा दिया था, जिसके बाद नया भवन बनाया गया। हालाँकि, नया भवन भी जगह और जरूरी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। एक कमरे में राशन और थालियाँ रखी जाती हैं, जबकि दूसरे कमरे में प्रधान शिक्षिका का ऑफिस है।

आंगनबाड़ी केंद्र का संकट

आंगनबाड़ी केंद्र का अपना भवन नहीं होने के कारण छोटे बच्चों को स्कूल के बरामदे में बैठाया जाता है। रसोइया के अनुसार, स्कूल में बनने वाला भोजन ही आंगनबाड़ी के बच्चों को दिया जाता है, जबकि उनके लिए अलग से भोजन नहीं बनता। एक सेविका को दो केंद्रों का प्रभार मिला हुआ है, जिससे कार्यभार बढ़ गया है।

शिक्षिका की चिंताएं

प्रधान शिक्षिका उषा कुमारी सिंह ने कहा है कि उनके पदभार ग्रहण करने से पहले से निर्माण और मिट्टी भराई का काम चल रहा था। काम क्यों रुका, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल की कमियों के बारे में विभाग को लिखित शिकायत देने की योजना है।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

सीडीपीओ प्रियंवदा कुमारी ने मामले में निरीक्षण कराने की बात कही है। साथ ही, बीडीओ सह प्रभारी बीईओ अनिल कुमार मिस्त्री ने कहा कि विद्यालय का निरीक्षण किया जाएगा, और जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। स्कूल में चारदीवारी और रसोईघर के लिए जो सामग्री आई है, वह कार्य क्यों नहीं हो रहा, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। विभागीय जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

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