4410 करोड़ की बिहार के अररिया-गलगलिया रेल लाइन पर गड्ढे: रेलवे ने खानापूर्ति की, स्थानीयों में असंतोष

The CSR Journal Magazine
अररिया-गलगलिया राष्ट्रीय रेल परियोजना ने सामान्य बारिश में ही प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। अररिया कोर्ट के हृदयपुर वार्ड संख्या 7 के पास बीआर-5 पुल के निकट मिट्टी कटाव के कारण पटरी से मात्र दो हाथ दूर गहरे गड्ढे बन गए हैं। इससे पहले यह परियोजना 4410 करोड़ रुपए की लागत से शुरू हुई थी। जब स्थानीय निवासियों ने पटरी की इस स्थिति को देखा, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा।

जल्दबाजी में की गई मरम्मत, बढ़ा गुस्सा

करीब एक साल पहले शुरू हुई इस परियोजना का काम अब स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है। रेलवे विभाग ने मरम्मत का कार्य शुरू किया, लेकिन यह कार्य तेजी में किया गया। आरोप है कि रेलवे कर्मियों ने सिर्फ झाड़ियों और मिट्टी से काम समाप्त कर दिया। स्थानीय पार्षद श्याम कुमार मंडल ने इसे ‘मरहम पट्टी’ करार दिया और इस पर सख्त ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि यात्री सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है।

क्षेत्र के निवासियों की सुरक्षा के सवाल

स्थानीय निवासियों ने निर्माण के एक साल के भीतर कैपलिंग में दरारें आने और मिट्टी के कटाव को घटिया निर्माण सामग्री का परिणाम बताया है। तकनीकी जानकारों का कहना है कि मिट्टी बहने से पटरियों के ढांचे की भार सहने की क्षमता में कमी आती है। इस वजह से भविष्य में ट्रैक धसने का खतरा बढ़ गया है।

‘सेफ्टी ऑडिट’ की मांग

इस समस्या के प्रति स्थानीय निवासियों ने ‘सेफ्टी ऑडिट’ कराने की मांग उठाई है। वे चाहते हैं कि अररिया-गलगलिया रूट पर सभी पुलों और एंबैंकमेंट का तत्काल स्वतंत्र ऑडिट किया जाए। इससे संबंधित दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। उनके अनुसार, झाड़ी और मिट्टी के स्थान पर स्थायी निर्माण के लिए कंक्रीट और रोड़ी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

रेल विभाग की सफाई

हालांकि रेल विभाग के अधिकारी स्थिति को सामान्य बताने में जुटे हैं। बारिश के शुरुआती दौर में ही उभरी दरारों को देखते हुए यात्रियों और स्थानीय लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। अररिया-कटिहार रेलखंड के डीसीएम अनूप सिंह ने बताया कि एक्सपर्ट इंजीनियरों की टीम ने मौके पर जाकर जांच की। जांच में कोई गंभीर चिंता नहीं पाई गई और पटरियों के असुरक्षित होने की बात को खारिज किया गया।

गड्ढों का रिफिलिंग से होगा समाधान

अनूप सिंह ने यह भी कहा कि जो छोटे गड्ढे दिखाई दे रहे थे, उन्हें रिफिलिंग प्रक्रिया के तहत ठीक कर दिया जाएगा। हालांकि, इस स्थिति में कई अन्य पहलूं पर गौर करने की आवश्यकता है। क्योंकि यह मामला सिर्फ गड्ढों का नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और इस रेल परियोजना की गुणवत्ता से जुड़ा है।

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