नई दिल्ली: दिवाली के मौके पर अमूल ने अपने ग्राहकों को एक बड़ा झटका दिया है। कंपनी ने घी और मक्खन की कीमतों में वृद्धि की है। अब 1 किलो अमूल घी का कार्टन 50 रुपये महंगा होकर 680 रुपये का हो गया है। इसके साथ ही 500 ग्राम मक्खन के पैक की कीमत भी 15 रुपये बढ़कर 325 रुपये हो गई है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब बाजार में इन उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
बढ़ती मांग और कीमतें
अमूल की इस कीमत वृद्धि का मुख्य कारण घी और मक्खन की बढ़ती मांग है। दिवाली जैसे त्योहारों के नजदीक आते ही इन उत्पादों की खपत में इजाफा होता है। कई बाजारों में अमूल गाय के घी की कमी भी देखी जा रही है। इस कमी के चलते ग्राहकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
मिलावटी घी पर कार्रवाई
गुजरात और पड़ोसी राज्य राजस्थान में मिलावटी घी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। इस स्थिति में ग्राहकों की नजर अब ब्रांडेड घी पर ज्यादा है। अमूल जैसे बड़े ब्रांड को इसका फायदा मिल रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि गुणवत्ता वाले उत्पादों की मांग बढ़ रही है, जिससे अमूल को अपने उत्पादों की कीमत बढ़ाने का मौका मिला है।
जीएसटी कटौती का असर
हाल ही में, सितंबर 2025 में जीएसटी कटौती के बाद ग्राहकों को मिली राहत का बड़ा हिस्सा अब खत्म होता नजर आ रहा है। कीमतों में बढ़ोतरी से ग्राहकों की जेब पर असर पड़ेगा। इस बढ़ोतरी से न केवल अमूल के उत्पाद महंगे हुए हैं, बल्कि अन्य कंपनियों के उत्पाद भी महंगे हो रहे हैं। हाल में कर्नाटक में नंदिनी दूध की कीमत 8 रुपये प्रति लीटर बढ़ गई है।
ग्राहकों की प्रतिक्रिया
इस बढ़ती महंगाई पर ग्राहकों की प्रतिक्रिया भी मिश्रित रही है। कुछ ग्राहकों का कहना है कि त्योहारों के समय में ऐसे उत्पादों की कीमतों में वृद्धि होना सामान्य है। वहीं, अन्य ग्राहक इस बढ़ोतरी को अनुचित मानते हैं। वे यह भी कहते हैं कि महंगाई के इस दौर में आम आदमी के लिए आवश्यक चीजों की खरीदना मुश्किल हो रहा है।
अमूल का भविष्य
अमूल की यह रणनीति उसके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, लेकिन ग्राहकों के लिए यह चिंता का विषय बन गया है। महंगाई के इस दौर में, क्या अमूल अपने ग्राहकों को और अधिक महंगाई का सामना करने के लिए तैयार कर पाएगा? यह देखना दिलचस्प होगा।
बाजार की स्थिति
इस समय बाजार में कई अन्य ब्रांड भी हैं जो घी और मक्खन बेचते हैं। लेकिन अमूल की लोकप्रियता और गुणवत्ता के चलते ग्राहकों का झुकाव इस ब्रांड की ओर अधिक है। ऐसे में, कीमतों में बढ़ोतरी से अन्य ब्रांडों को भी अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने का दबाव महसूस हो सकता है।
अंत में
दिवाली के इस मौके पर, जब लोग मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की खरीदारी करते हैं, अमूल का यह कदम निश्चित रूप से ग्राहकों को प्रभावित करेगा। महंगाई के इस दौर में, ग्राहकों को अपनी खरीदारी की योजना को फिर से देखना पड़ सकता है।
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