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February 25, 2026

रमजान में मुस्लिम कर्मचारियों को मिलें राहत, AIMIM ने दिल्ली सीएम को लिखा पत्र

The CSR Journal Magazine

दिल्ली से फिर उठी छूट की मांग

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की दिल्ली इकाई ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र भेजकर रमजान के दौरान मुस्लिम कर्मचारियों के लिए काम के घंटों में छूट देने की मांग की है। AIMIM दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष डॉ शोएब जामई ने चिट्ठी में कहा कि इफ्तार के समय शाम को ट्रैफिक परेशानी पैदा करता है, जिससे कई कर्मचारी समय पर घर नहीं पहुंच पाते।

समस्या का समाधान

शोएब जामई ने चिट्ठी में यह भी कहा कि रमजान के पाक महीने में मुस्लिम कर्मचारियों को इफ्तार के समय घर पहुंचने में कठिनाई होती है। इस मुद्दे को समझते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री से निवेदन किया है कि इस महीने में कर्मचारियों को ऑफिस के घंटों में राहत दी जाए। उन्होंने कहा कि यह जनहित में उठाई गई मांग है और आशा है कि सरकार इसके लिए सकारात्मक कदम उठाएगी।

अन्य राज्यों का उदाहरण

शोएब जामई का पत्र कोई पहला उदाहरण नहीं है। कई राज्यों में, ऐसे मामलों में मुस्लिम कर्मचारियों को राहत दी जाती है। जैसे कि तेलंगाना सरकार ने हाल ही में अपने मुस्लिम कर्मचारियों को रमजान के दौरान रोजा खोलने और विशेष नमाज अदा करने के लिए शाम 4 बजे काम खत्म करने की अनुमति दी है।

आंध्र प्रदेश की पहल

केवल तेलंगाना ही नहीं, बल्कि आंध्र प्रदेश में भी इस पर विशेष ध्यान दिया गया है। चंद्रबाबू नायडू की सरकार ने राज्य के सभी विभागों, जिसमें गांव और वार्ड सचिवालय भी शामिल हैं, में मुस्लिम कर्मचारियों को राहत दी है। ऐसे कदमों से मुस्लिम समुदाय को एक बड़ा सहारा मिलता है।

रमजान का महत्व

इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, रमजान का पवित्र महीना 18 फरवरी से शुरू हुआ है। इस दौरान मुस्लिम लोग सूरज निकलने से पहले से लेकर सूरज छिपने तक वृत (रोजा) रखते हैं। इस समय उन्हें खाने-पीने से दूर रहना पड़ता है और वे शाम को इफ्तार से रोजा खोलते हैं। ऐसे में उनकी मांग है कि काम के घंटे में आदमी को एक से दो घंटों की छूट मिले, ताकि वे समय पर अपने घरों में इफ्तार कर सकें।

लोगों की प्रतिक्रियाएं

इस मुद्दे पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कई लोग AIMIM की मांग को सही मानते हैं, जबकि कुछ का कहना है कि सभी कर्मचारियों के लिए समान नियम होना चाहिए। यह चर्चा आगे बढ़ रही है और सभी की नजरें अब मुख्यमंत्री के फैसले पर टिकी हैं।

आगे की राह

देखना यह है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता इस मामले में क्या निर्णय लेती हैं। इससे न केवल कर्मचारियों की समस्या का समाधान होगा, बल्कि समाज में एकता और सद्भावना को भी बढ़ावा मिलेगा। समय के साथ, इस मुद्दे पर चर्चा और भी बढ़ सकती है।

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