Adani Ganpati: गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर अडानी परिवार मुंबई के प्रसिद्ध चिंचपोकली चा चिंतामणि गणपति के दरबार पहुंचा। अडानी एंटरप्राइजेज के निदेशक और एग्रो, ऑयल एंड गैस कारोबार के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रणव अडानी और अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) के मैनेजिंग डायरेक्टर करण अडानी ने परिवार के साथ भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की। मुंबई के चिंचपोकली इलाके में स्थित यह गणपति मंडल शहर की पुरानी और लोकप्रिय सार्वजनिक गणेश उत्सव परंपराओं में शामिल है। इस साल चिंचपोकली चा चिंतामणि गणपति उत्सव अपने 107वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। गणेश चतुर्थी के मौके पर यहां श्रद्धालुओं की आस्था और उत्सव का माहौल देखने को मिल रहा है।
Adani Ganpati: 107 साल पुराना है चिंचपोकली चा चिंतामणि
प्रणव अडानी ने चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल के साथ साझेदारी पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि मंडल के 107वें वर्ष में इसके साथ जुड़ना सम्मान की बात है। उनके मुताबिक, चिंचपोकली चा चिंतामणि की समृद्ध परंपरा भक्ति, एकता और मुंबई की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी रही है। चिंचपोकली चा चिंतामणि को मुंबई के दूसरे सबसे पुराने सार्वजनिक गणपति उत्सवों में गिना जाता है। इसकी जड़ें मुंबई के पुराने कपड़ा मिल इलाकों परेल, गिरगांव और लालबाग से जुड़ी हैं। शुरुआती दौर में मिल मजदूर इस उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा हुआ करते थे।
दक्षिण भारतीय मंदिर की भव्य थीम पर सजा पंडाल
इस साल चिंचपोकली चा चिंतामणि गणपति उत्सव में दक्षिण भारतीय मंदिर वास्तुकला को खास थीम बनाया गया है। भगवान वेंकटेश्वर बालाजी की तिरुमला तिरुपति परंपरा से प्रेरित गणपति प्रतिमा को पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों से सजाया गया है। पंडाल में गरुड़, कीर्तिमुख, शंख, चक्र और कपूर तिलक जैसे धार्मिक प्रतीकों को जगह दी गई है। पूरा पंडाल हैदराबाद और भुवनगिरि स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर की वास्तुकला से प्रेरित है। इसमें ऊंचे गोपुरम, दीपस्तंभ और याली यानी मंदिरों में दिखने वाली रक्षक आकृतियां आकर्षण का केंद्र हैं। इस भव्य सजावट के जरिए श्रद्धालुओं को दक्षिण भारतीय मंदिरों जैसा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव देने की कोशिश की गई है।
गणेश उत्सव के साथ समाजसेवा में भी सक्रिय है मंडल
चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल की पहचान केवल गणेश उत्सव तक सीमित नहीं है। करीब 5,000 योगदानकर्ताओं के साथ यह मंडल कई सामाजिक और जनकल्याण से जुड़े काम भी करता है। स्वास्थ्य सेवाओं, रक्तदान शिविरों और बच्चों के लिए कार्यक्रमों के जरिए मंडल आसपास के समुदायों से जुड़ा हुआ है। 1982 की मिल हड़ताल और उसके बाद मुंबई में हुए बड़े शहरी बदलावों के बावजूद चिंचपोकली चा चिंतामणि ने अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखी है। यह उत्सव आज भी इलाके के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक केंद्र बना हुआ है।
1939 से रेलवे स्टेशन के पास हो रहा है उत्सव
चिंचपोकली चा चिंतामणि गणेश उत्सव वर्ष 1939 से चिंचपोकली रेलवे स्टेशन के पूर्वी हिस्से के पास आयोजित किया जा रहा है। इतने लंबे समय से चल रही यह परंपरा मुंबई के गणेशोत्सव इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने 1890 के दशक में गणेश चतुर्थी को घरों तक सीमित उत्सव से निकालकर सार्वजनिक आयोजन का रूप देने में बड़ी भूमिका निभाई थी। चिंचपोकली का यह मंडल भी इसी सार्वजनिक गणेश उत्सव की विरासत को आगे बढ़ाता रहा है।
कोरोना काल में भी जारी रखी समाजसेवा
कोरोना महामारी के दौरान मंडल ने सार्वजनिक उत्सव को सीमित किया था। इस दौरान स्वास्थ्य से जुड़े कामों पर ध्यान दिया गया। इनमें जांच शिविर, चिकित्सा सहायता और रक्तदान अभियान शामिल रहे। गणेश उत्सव की भक्ति, मुंबई की सांस्कृतिक पहचान और समाजसेवा की परंपरा को साथ लेकर चिंचपोकली चा चिंतामणि आज भी अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। अडानी परिवार के दर्शन के साथ इस साल के गणेश उत्सव की शुरुआत से जुड़ी तस्वीरें भी चर्चा में हैं।
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