स्विटजरलैंड में अनोखा रिवर कम्यूट, ऑफिस के बाद लोग नदी में कूदकर घर जाते हैं

The CSR Journal Magazine

गर्मियों में आरे नदी का क्रेज

बर्न: स्विटजरलैंड की राजधानी बर्न में गर्मियों का मौसम आते ही आरे नदी के किनारे एक दिलचस्प नज़ारा देखने को मिलता है। ऑफिस से लौटने वाले कर्मचारी, छात्र और स्थानीय निवासी नदी के किनारे खड़े होते हैं। वे अपने कपड़े और सामान लेकर वॉटरप्रूफ ड्राई बैग में डालते हैं और फिर उसे नदी में फेंककर खुद भी कूद पड़ते हैं। यह केवल तैराकी का समय नहीं है, बल्कि उनके लिए घर पहुंचने का एक शानदार और मुफ्त तरीका है। आरे नदी में बहकर घर जाने का यह तरीका बर्न की गर्मियों का एक प्रमुख हिस्सा बन गया है।

नदी से सफर का मजा

बर्न के निवासी इस रिवर कम्यूट को एक मजेदार और ताज़गी भरा अनुभव मानते हैं। गर्मियों में आरे नदी का पवित्र जल उनके लिए राहत का स्रोत बन जाता है। लोग इस प्रवाह में तैरते हुए पारंपरिक स्विमिंग पॉइंट तक पहुंचते हैं और वहां से बाहर निकलते हैं। पानी में तैरते समय वे अपने कीमती सामान को सुरक्षित रखने के लिए वॉटरप्रूफ बैग का इस्तेमाल करते हैं। यही कारण है कि बर्न में आरे बैग काफी प्रसिद्ध हो गए हैं।

स्वच्छता की मिसाल

आरे नदी का पानी बेहद साफ है और इसे शहरी क्षेत्रों में बहने वाली सबसे स्वच्छ नदियों में से एक माना जाता है। गर्मियों में नदी से घर जाना बर्न की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बन गया है। यह न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आ रहे हैं, जिनमें लोग ऑफिस के बाद पुल से कूदते हुए और बहते हुए देखे जा सकते हैं।

इंस्टाग्राम पर वायरल ट्रेंड

सोशल मीडिया पर आरे नदी में तैरते हुए लोगों की वीडियो को देखकर कई लोगों ने इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करने की इच्छा जताई है। लेकिन, प्रशासन ने चेतावनी दी है कि तेज बहाव के समय नदी में जाने से बचना चाहिए। हालांकि, यह प्रयास न केवल ताज़गी प्रदान करता है बल्कि फुल बॉडी वर्कआउट का भी एक बेहतरीन तरीका है। ट्रैवलर प्रेम भारद्वाज ने भी इस विषय पर अपनी राय शेयर की है, जिसमें उन्होंने लिखा कि यदि दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर जैसे शहरों में भी ऐसा सिस्टम बने, तो ट्रैफिक से राहत मिलेगी।

क्या भारत में भी होगा ऐसा?

प्रेम भारद्वाज के विचार ने सोशल मीडिया पर चर्चा को जन्म दिया है। एक यूजर ने यह सवाल उठाया कि क्या लोग ऑफिस के साथ लैपटॉप और टिफिन आदि लेकर जा सकते हैं, जो इस ट्रेंड के सफल होने की सोच को और भी रोचक बनाता है। लोगों की रचनात्मकता और समस्याओं के समाधान के नए तरीके खोजने की सोच इस प्रेरणादायक अनुभव को और भी खास बना रही है।

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