AI के दौर में सेलिब्रिटीज की पहचान खतरे में! नाम, चेहरा और आवाज पर कोर्ट पहुंच रहे सितारे

The CSR Journal Magazine

AI और सेलिब्रिटीज: पहचान के खतरे

समाज में तकनीकी बदलाव के साथ, पर्सनैलिटी राइट्स का महत्व बढ़ गया है। सितारों की पहचान का गलत इस्तेमाल बढ़ा है। AI और डीपफेक की मदद से किसी का चेहरा, नाम और आवाज का इस्तेमाल बिना अनुमति के किया जा रहा है। इससे आगे चलकर कई सेलिब्रिटीज ने अदालतों का दरवाजा खटखटाया है। पिछले चार साल में 50 से अधिक अदालत में मामले दर्ज किए गए हैं।

कानूनी लड़ाई का नया अध्याय

सितारों की पहचान के गलत इस्तेमाल के मामलों ने भारत में एक नया कानूनी अध्याय शुरू किया है। 2022 से 2026 तक कई बड़े अभिनेताओं ने अपने पर्सनैलिटी राइट्स को सुरक्षित करने के लिए अदालत का सहारा लिया है। हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने तीन महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई का निर्णय लिया है जिसमें विवेक ओबेरॉय, जाह्नवी कपूर और आराध्या बच्चन शामिल हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का असर

AI और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने पर्सनैलिटी राइट्स के मामलों में तेजी लाई है। 2022 में अमिताभ बच्चन ने अपने नाम और तस्वीर के अनऑथराइज्ड इस्तेमाल पर सुरक्षा की मांग की थी। बाद में अनिल कपूर और अरिजीत सिंह के मामलों ने स्थिति को स्पष्ट करने में मदद की। इन मामलों में AI तकनीकों का दुरुपयोग होता दिखा है।

दिल्ली हाई कोर्ट में अधिकतर मामले

दिल्ली हाई कोर्ट में कई ऐसी सुनवाई हुई हैं, जिनमें नाम, तस्वीर, आवाज और अन्य पहचान वाले तत्वों का अनधिकृत इस्तेमाल किया गया है। विवेक ओबेरॉय, प्रीति जिंटा और अन्य कई आइकॉन्स को अपने पर्सनैलिटी राइट्स को लेकर सख्त कदम उठाने पड़े। यह केवल फोटो या विज्ञापनों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि AI-जनित वीडियो, क्लोन आवाज और अन्य मुद्दे भी सामने आए हैं।

जाह्नवी कपूर का महत्त्वपूर्ण मामला

जाह्नवी कपूर के मामले में हजारों URLs को लेकर अदालत में सुनवाई हुई। कोर्ट ने 6,884 URLs पर रोक लगाने की मांग को अस्वीकार कर सिर्फ 552 URLs हटाने का निर्देश दिया। यह साबित करता है कि अदालत हर ऑनलाइन कंटेंट को एक ही नजर से नहीं देखना चाहती। इसका मतलब है कि फ्री स्पीच और व्यावसायिक पहचान के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।

सेलिब्रिटीज और उनके कानूनी अधिकार

पर्सनैलिटी राइट्स का मतलब है कि किसी व्यक्ति की पहचान का गलत इस्तेमाल उसकी अनुमति के बिना नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, भारत में इसके लिए कोई स्पष्ट कानून अभी तक नहीं बना है। अदालतें निजता, कॉपीराइट और पहले दिए गए फैसलों पर आधारित निर्णय ले रही हैं।

AI और पहचान की नई चुनौतियाँ

आधुनिक तकनीक ने पहचान के गलत इस्तेमाल को और भी आसान बना दिया है। अब किसी की आवाज की नकल करना, तस्वीरों को मोड़ना और AI की मदद से ऐसा कंटेंट तैयार करना संभव हो गया है जिसमें कोई व्यक्ति बातें करता दिखाई दे रहा हो जो उसने कभी नहीं कही। इसकी वजह से कई सेलिब्रिटीज ने अपने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए अदालत का रुख किया है।

भविष्य की चुनौतियाँ

आने वाले समय में पर्सनैलिटी राइट्स और AI के बीच संतुलन बनाने के लिए बहुत सारे मुद्दे सामने आएंगे। अदालतों को निर्धारित करना होगा कि पर्सनैलिटी राइट्स की सीमा कहां तक होगी और फ्री स्पीच का क्या स्थान होगा। यह चर्चा केवल भारत नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो गई है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos