गाजियाबाद में खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई: 180 से ज्यादा फास्ट फूड आउटलेट्स पर रेड

The CSR Journal Magazine
गाजियाबाद समेत उत्तर प्रदेश के पांच शहरों में खाद्य सुरक्षा विभाग ने 180 से ज्यादा फास्ट फूड आउटलेट्स पर कार्रवाई की है। यह कार्रवाई ‘शुद्ध ही शुभ है’ नामक अभियान के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य खाने में गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। विभाग ने कानपुर नगर, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और गाजियाबाद में जांच की। इस दौरान कई गंभीर खामियां पाई गईं, जिसके बाद 110 से ज्यादा सुधार नोटिस जारी किए गए।

गंभीर कमियों के लिए लाइसेंस निलंबित

खाद्य विभाग ने विशेष रूप से उन आउटलेट्स पर ध्यान दिया जहां स्थिति बहुत खराब थी। कानपुर में रेव मोती मॉल के फूड कोर्ट में गंदगी और टूटी दीवारें मिलीं। इसके अलावा कई स्थानों पर खराब गुणवत्ता का खाना और साफ-सफाई की अनुपलब्धता पाई गई। ऐसे स्थानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं और तब तक वहां कारोबार नहीं चलने दिया जाएगा जब तक सुधार नहीं किया जाता।

आगरा और वाराणसी की जांच रिपोर्ट

आगरा के द पार्क रेस्टोरेंट में नाला जाम और गंदगी का माहौल था, जिसके चलते वहां व्यवसाय को बंद करने की सिफारिश की गई। वाराणसी में कैफे कॉफी डे में छत की स्थिति खराब थी और अन्य जगहों पर भी साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा गया। इसके अलावा, प्रयागराज में आर्यन फैमिली डेलाइट में कच्चा और पका खाना सही तरीके से स्टोर नहीं किया गया।

खाद्य गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता

खाद्य विभाग की टीमें अब सिर्फ खाद्य गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दे रही हैं, बल्कि किचन की सफाई, कीड़े-मकोड़ों का नियंत्रण, नाले की व्यवस्था और खाद्य समाग्री के लेबल की जांच भी कर रही हैं। विभाग का लक्ष्य केवल सजा देना नहीं है, बल्कि इस मुद्दे पर दुकानदारों को जागरूक करना है ताकि वे खाद्य सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार बन सकें।

यूपी में अभियान का व्यापक असर

यूपी में ‘शुद्ध ही शुभ है’ अभियान के अंतर्गत अनेक आउटलेट्स की जांच हो रही है। गंभीर खामियों पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस अभियान को लेकर सभी जनपदों में आवश्यक कार्रवाई शुरू की है ताकि लोगों को सुरक्षित और गुणवत्ता वाला खाना प्राप्त हो सके। इसके चलते ग्राहकों में जागरूकता बढ़ रही है और वह अपनी सेहत के प्रति सचेत हो रहे हैं।

साफ-सफाई पर ध्यान, लेकिन ठोस कार्रवाई भी जरूरी

कई आउटलेट्स में समस्याएं छोटी होने पर उन्हें सुधार का मौका दिया गया है, लेकिन गंभीर मामलों में दुकानें बंद करने का विकल्प भी अपनाया गया है। खाद्य विभाग का उद्देश्य केवल आरोप लगाना नहीं है, बल्कि स्थानों की स्थिति को सुधारना भी है ताकि लोगों को सुरक्षित खाना मिल सके। इस मामले में प्रबंधकों से भी सक्रियता की मांग की जा रही है।

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