उज्जैन में सोमवार को बाबा महाकाल की भादौ माह की पहली और कुल पांचवीं सवारी धूमधाम से निकाली गई। हर बार की तरह इस बार भी सवारी में आस्था और भक्ति का माहौल देखने को मिला, लेकिन एक अनोखी चीज ने लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा खींचा। सवारी में शामिल ‘सनातनी रोबोट’ लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। कुर्ता-पायजामा पहने और गले में भगवा गमछा डाले रोबोट ने बाबा महाकाल की सवारी में डांस किया। भजन, ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच रोबोट को नाचते देखकर श्रद्धालु उत्साहित हो गए। कई लोग इस अनोखे नजारे का वीडियो अपने मोबाइल में रिकॉर्ड करते नजर आए।
चांदी की पालकी में निकले बाबा महाकाल
बाबा महाकाल की सवारी सोमवार शाम करीब चार बजे महाकाल मंदिर से विधि-विधान के साथ शुरू हुई। सवारी रवाना होने से पहले मंदिर के सभामंडप में भगवान महाकाल का पूजन किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल को चांदी की पालकी में विराजमान कर नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने बाबा महाकाल को सलामी दी। सवारी के रास्ते में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद रही और चारों तरफ हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे।
पहली बार सवारी में शामिल हुए दो रोबोट
इस बार बाबा महाकाल की सवारी में दो रोबोट भी शामिल किए गए थे। इनमें से एक रोबोट को खास तौर पर पारंपरिक भारतीय पोशाक पहनाई गई थी। उसने कुर्ता-पायजामा पहना था और गले में ‘जय श्री महाकाल’ लिखा भगवा दुपट्टा डाला गया था। श्रद्धालुओं ने इस रोबोट को प्यार से ‘सनातनी रोबोट’ नाम दे दिया। जनजातीय कलाकारों के नृत्य और पुलिस बैंड की धुनों के बीच रोबोट ने भी डांस किया। लोगों के लिए यह धार्मिक आयोजन में तकनीक का एक अलग ही रूप देखने जैसा था।
डांस करते समय गिरा रोबोट
रोबोट के डांस के दौरान एक ऐसा पल भी आया, जिसने वहां मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। डांस करते समय एक रोबोट अचानक अपना संतुलन खो बैठा और नीचे गिर गया। हालांकि कुछ ही देर में उसे दोबारा खड़ा कर लिया गया। इसके बाद रोबोट का प्रदर्शन फिर से जारी रहा। श्रद्धालु इस पूरे घटनाक्रम को अपने मोबाइल कैमरे में कैद करते नजर आए।
रामघाट पर सीएम मोहन यादव ने की पूजा
सवारी जब रामघाट पहुंची तो वहां श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ मौजूद थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी बाबा महाकाल की पालकी के पूजन में शामिल हुए। उन्होंने विधि-विधान से भगवान महाकाल की पूजा की और आरती की। इसके साथ ही मां शिप्रा के जल से अभिषेक किया गया। मुख्यमंत्री ने बाबा महाकाल की पालकी को कंधा भी दिया और सवारी में शामिल होकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
हेलीकॉप्टर से हुई पुष्पवर्षा
रामघाट पर बाबा महाकाल की सवारी पहुंचने के दौरान आसमान से भी फूलों की बारिश हुई। हेलीकॉप्टर के जरिए सवारी पर करीब चार से पांच बार पुष्पवर्षा की गई। फूलों की बारिश, शंख-घंटियों की आवाज, ढोल-नगाड़ों और बाबा महाकाल के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं के लिए यह दृश्य बेहद खास रहा।
84 महादेव की झांकी रही आकर्षण का केंद्र
सवारी में इस बार 84 महादेव की झांकी भी शामिल की गई। इसके अलावा करीब 1100 बटुक सवारी का हिस्सा बने। जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति दी। सवारी में शहर के विकास और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी कई झांकियां भी शामिल रहीं। इससे धार्मिक परंपरा के साथ सामाजिक संदेश भी लोगों तक पहुंचा।
300 से ज्यादा पुलिस जवानों ने दी प्रस्तुति
बाबा महाकाल की सवारी में सुरक्षा के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी खास इंतजाम रहा। मध्य प्रदेश पुलिस के 300 से ज्यादा जवानों ने बैंड की प्रस्तुति दी। इसके साथ भजन मंडलियां, झांझ-मंजीरा दल, घुड़सवार पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और होमगार्ड भी सवारी का हिस्सा रहे। प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल भी श्रद्धालुओं के बीच झांझ-मंजीरा बजाते नजर आए।
आस्था के साथ दिखा तकनीक का नया रंग
उज्जैन की बाबा महाकाल की सवारी सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा से जुड़ी है। इस बार इसमें रोबोट की मौजूदगी ने इस परंपरा के बीच आधुनिक तकनीक का नया रंग जोड़ दिया। कुर्ता-पायजामा और भगवा गमछे में ‘सनातनी रोबोट’ का डांस श्रद्धालुओं के लिए सवारी का अलग आकर्षण रहा। वहीं बाबा महाकाल की पालकी, रामघाट पर पूजा, पुष्पवर्षा और 84 महादेव की झांकी ने इस धार्मिक आयोजन को और भव्य बना दिया।
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