डॉक्टरों पर हमला करने वालों की खैर नहीं: Supreme Court ने नेताओं को दिया सख्त संदेश

The CSR Journal Magazine
महाराष्ट्र में हाल ही में शिवसेना के एक नेता पर डॉक्टरों के ऊपर हमले का आरोप लगा है। इस घटना को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि स्थिति बहुत ही खराब हो गई है। शीर्ष अदालत ने नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई का समर्थन किया है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि मेडिकल प्रैक्टिशनर्स के साथ ऐसी हरकतें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा करने वालों को बिना किसी देरी के गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

पालघर की घटना ने बढ़ाई चिंता

सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता शामिल थे, ने पालघर में शिवसेना कार्यकर्ताओं द्वारा अस्पताल के कर्मचारियों और डॉक्टरों पर हुए हमले का जिक्र किया। उन्होंने इस वारदात से संबंधित कहा कि ऐसे लोगों को खुलेआम घूमने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। यह एक गंभीर मामला है और इसका कड़ा जवाब देना चाहिए।

डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा की बातें

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी शिवसेना के कॉर्पोरेटर रमेश सुक्रिया म्हात्रे की याचिका पर सुनवाई के समय की। उन पर आरोप है कि उन्होंने जुलाई में डोंबिवली में डॉक्टरों के साथ मारपीट की थी। हाल ही में उन्हें हाई कोर्ट से जमानत मिली थी, लेकिन जमानत के समय उन पर कुछ सख्त शर्तें लगाई गई थीं। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

मुकुल रोहतगी का आश्वासन

सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट के रुख को समझते हुए याचिका वापस लेने की अपील की। कोर्ट ने उनकी अपील को मान लिया, लेकिन इस मामले में नेताओं द्वारा डॉक्टरों पर हमले की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। बेंच ने कहा कि ऐसे व्यवहार को सही ठहराना गलत है और इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

कानून और व्यवस्था से छेड़छाड़

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जिस तरह से शिकायत की गई है, उस पर गौर करते हुए ऐसी घटनाओं को सही ठहराना असंभव है। बेंच ने कहा कि यह कानून और व्यवस्था का मुद्दा है। इसे किसी भी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह बेहद ज़रूरी है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि समाज में एक सकारात्मक संदेश जा सके।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी होगा प्रभाव

जब देश के चिकित्सा पेशेवरों के साथ ऐसा व्यवहार होगा, तो यह न केवल भारत में, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी एक नकारात्मक छवि बनाएगा। डॉक्टरों का सम्मान करना हर समाज की जिम्मेदारी है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह कड़ा संदेश महत्वपूर्ण है और इसे लागू करने की आवश्यकता है।

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