रूस का किसानों को बड़ा तोहफा: फर्टिलाइजर से बदलेगी किस्मत!

The CSR Journal Magazine
भारत और रूस की दोस्ती हमेशा से काबिले तारीफ रही है। दुनियाभर के देश इस दोस्ती की मिसाल देते हैं। खासकर तब, जब पश्चिम एशिया में संकट गहरा गया था। इस दौरान रूस ने भारत को हर मोड़ पर सपोर्ट किया। अब रूस ने भारत के किसानों के लिए बड़ा फैसला लिया है।

फर्टिलाइजर की बढ़ती सप्लाई

रूसी फर्टिलाइजर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट आंद्रे गुरयेव ने यह जानकारी दी कि रूस अब भारत को फर्टिलाइजर की सप्लाई और बढ़ाएगा। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भरोसा दिया था कि वे सप्लाई जारी रखेंगे। इसके तहत इस साल के पहले छह महीनों में 2.8 मिलियन टन फर्टिलाइजर भारत भेजी गई है। ये सप्लाई विशेष रूप से किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए की जा रही है।

उच्च मानक की फर्टिलाइजर

गुरयेव के मुताबिक, पुतिन ने निर्देश दिया था कि भारतीय किसानों की मांग को पूरा किया जाए। पिछले साल, रूस ने 6.5 मिलियन टन फर्टिलाइजर भारत को सप्लाई की, जो कि पिछले साल की तुलना में 40 फीसदी ज्यादा है। जब से भारत ने रूस से फर्टिलाइजर आयात शुरू किया है, तब से यह आंकड़ा छह गुना बढ़ गया है। आज, भारत के आयातित फर्टिलाइजर में से हर तीन टन में से एक रूस से आता है।

कृषि के लिए जरूरी सहायता

गुरयेव ने इसे लेकर कहा कि रूस से आने वाले फर्टिलाइजर कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण हैं। ये सुनिश्चित करते हैं कि भारत, जो दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है, को सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाला भोजन मिले। इसलिए, यह सप्लाई न केवल भारत बल्कि ब्रिक्स देशों के लिए भी फायदेमंद सिद्ध होगी।

ब्रिक्स देशों की मदद

गुरयेव ने आगे कहा कि भारत और रूस के बीच बढ़ती सहयोग की मिसाल ब्रिक्स देशों में देखी जा रही है। इन देशों को रूसी एग्रोकेमिकल उत्पादों की सप्लाई बढ़ाई जा रही है। ब्रिक्स देशों को रूस के मिनरल फर्टिलाइजर का आधा हिस्सा मिलता है। 2025 तक, ये सप्लाई 23.4 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है।

बड़े समिट में रूसी प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी

इस साल की ब्रिक्स समिट के लिए रूस से 300 से ज्यादा प्रतिनिधि भारत आए हैं, जिनमें बड़ी कंपनियों के सीनियर एग्जीक्यूटिव शामिल हैं। ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के रूसी चैप्टर ने कई क्षेत्रों में प्रस्ताव रखे हैं, जिनमें व्यवसाय, वित्तीय संस्थान, और विकास संस्थान शामिल हैं। यह सभी पहलें बिजनेस में सुधार लाने और सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

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