राजस्थान के परबतसर नगर पालिका चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कैलाश चंद्र और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के भंवरलाल को केवल एक-एक वोट मिला है। खास

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BJP प्रत्याशी को मिला मात्र 1 वोट, निकाय चुनाव में मचा हंगामा! राजस्थान के चुनाव ने बढ़ाई रोचकता

राजस्थान में चल रहे नगर निकाय चुनावों के परिणामों ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सोमवार को जब मतों की गिनती शुरू हुई, तो कई सीटों पर नजदीकी मुकाबले देखने को मिले, लेकिन नागौर क्षेत्र के नवनिर्मित डीडवाना-कुचामन जिले के परबतसर नगर पालिका से एक ऐसा चुनावी नतीजा सामने आया जिसने हर किसी को हैरत में डाल दिया। यहां के वार्ड नंबर 13 से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अधिकृत प्रत्याशी कैलाशचंद को पूरी मतगणना में केवल और केवल 1 वोट प्राप्त हुआ है। लोकतंत्र के उत्सव में अमूमन बड़ी पार्टियों के उम्मीदवारों को सैकड़ों या हजारों वोट मिलते हैं, लेकिन सत्ताधारी दल के उम्मीदवार का महज एक वोट पर सिमट जाना राज्य की राजनीति में कौतूहल और हंगामे का विषय बन गया है। इस चौंकाने वाले परिणाम के बाद सोशल मीडिया से लेकर चाय की थड़ियों तक पर यह चर्चा आम हो गई है कि आखिर देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के उम्मीदवार के साथ ऐसा कैसे हो गया।

वार्ड नंबर 13 का चुनावी गणित और नतीजों का सदमा

परबतसर नगर पालिका के वार्ड नंबर 13 में इस बार त्रिकोणीय और दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा था। राज्य निर्वाचन आयोग से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वार्ड से कांग्रेस की प्रत्याशी हिना खानम ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए कुल 376 वोट हासिल किए और शानदार जीत दर्ज की। वहीं, दूसरे स्थान पर निर्दलीय उम्मीदवार रसीद खां रहे, जिन्हें कुल 195 मतदाताओं का समर्थन मिला। इन दोनों प्रमुख उम्मीदवारों के मुकाबले जब भाजपा के उम्मीदवार कैलाशचंद के वोटों की गिनती हुई, तो EVM का पिटारा खुलते ही वहां मौजूद चुनाव कर्मी और राजनीतिक एजेंट दंग रह गए। कैलाशचंद के खाते में केवल 1 वोट आया। दिलचस्प बात यह भी रही कि इस वार्ड में ‘नोटा’ (None of the Above) को भी ठीक 1 ही वोट मिला। यानी भाजपा प्रत्याशी और नोटा के बीच मुकाबला बराबरी पर छूटा। इस परिणाम के सामने आते ही मतगणना केंद्र पर कुछ समय के लिए हंगामा खड़ा हो गया और विपक्षी दलों ने तंज कसना शुरू कर दिया।’अपनों ने भी नहीं दिया साथ?’

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

जैसे ही परबतसर के वार्ड नंबर 13 का यह नतीजा सार्वजनिक हुआ, यह पूरे राजस्थान में जंगल की आग की तरह फैल गया। सोशल मीडिया पर तरह-तरह के मीम्स और कयासों का दौर शुरू हो गया। सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर शुरू हो गई कि क्या प्रत्याशी कैलाशचंद को उनके खुद के परिवार ने भी वोट नहीं दिया? स्थानीय गलियारों और राजनीतिक हलकों में यह अफवाह तेजी से फैल गई कि कैलाशचंद की पत्नी, माता-पिता और उनके बेहद करीबी रिश्तेदारों तक ने उनके पक्ष में मतदान नहीं किया। एक राष्ट्रीय स्तर की पार्टी का सिंबल होने के बावजूद इस तरह का नतीजा आना किसी भी राजनीतिक विश्लेषक के गले नहीं उतर रहा था। लोग यह सवाल उठाने लगे कि जो प्रत्याशी अपने परिवार और चंद मोहल्ले वालों का वोट हासिल नहीं कर सका, उसे पार्टी ने टिकट किस आधार पर दिया था।

प्रत्याशी कैलाशचंद का बड़ा खुलासा: क्यों मिला सिर्फ एक वोट?

इस पूरे हंगामे और सोशल मीडिया पर उड़ रही अफवाहों के बीच जब खुद भाजपा प्रत्याशी कैलाशचंद मीडिया के सामने आए, तो उन्होंने इस रहस्य पर से पर्दा उठाया। कैलाशचंद ने अपनी सफाई में जो तर्क दिया, वह चुनावी रणनीतियों की एक बड़ी चूक को उजागर करता है। कैलाशचंद ने बताया, “मैं असल में वार्ड नंबर 13 का निवासी या वहां का मतदाता नहीं हूं। मेरा नाम और मेरा खुद का वोट पड़ोसी वार्ड नंबर 12 की मतदाता सूची में दर्ज है। भारतीय जनता पार्टी ने रणनीतिक तौर पर मुझे वार्ड नंबर 12 के बजाय वार्ड नंबर 13 से चुनावी मैदान में उतारा था। चूंकि मेरा वोट खुद उस वार्ड में नहीं था, इसलिए मैं खुद को भी वोट नहीं दे सका। रही बात मेरे परिवार की, तो मेरे माता-पिता, पत्नी और अन्य करीबी रिश्तेदार भी वार्ड नंबर 12 के ही पंजीकृत मतदाता हैं, इसलिए वे चाहकर भी वार्ड नंबर 13 में मेरे सिंबल के आगे का बटन नहीं दबा सकते थे।”जब उनसे पूछा गया कि फिर वह 1 वोट किसका था जो उनके खाते में आया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “वार्ड नंबर 13 के ही किसी सहृदय मतदाता ने पार्टी की विचारधारा या मुझे देखकर अपना बहुमूल्य वोट मुझे दिया है। मैं उस एक अज्ञात मतदाता का भी आभार व्यक्त करता हूं।”

परबतसर नगर पालिका की पूरी तस्वीर: कांटे की टक्कर

भले ही वार्ड नंबर 13 में भाजपा प्रत्याशी की इस ऐतिहासिक और अजीबोगरीब हार ने सुर्खियां बटोरी हों, लेकिन अगर पूरी परबतसर नगर पालिका की बात करें तो यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच बेहद रोमांचक और कांटे की टक्कर देखने को मिली। परबतसर नगर पालिका के कुल 25 वार्डों के परिणाम घोषित हो चुके हैं। इनमें से कांग्रेस ने कुल 13 वार्डों में जीत हासिल कर स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा छू लिया है। वहीं, भाजपा ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 12 वार्डों में अपनी जीत का परचम लहराया है। कांग्रेस बहुमत के जादुई आंकड़े से महज एक सीट आगे है, जिससे साफ है कि नगर पालिका अध्यक्ष (चेयरमैन) बनाने की राह में दोनों पार्टियों के बीच आने वाले दिनों में शह और मात का खेल देखने को मिल सकता है। भाजपा नेताओं का कहना है कि वार्ड 13 का परिणाम तकनीकी और स्थानीय समीकरणों की वजह से ऐसा रहा, लेकिन बाकी के 12 वार्डों में जनता ने भाजपा की नीतियों पर भरोसा जताया है।

राजस्थान निकाय चुनाव 2026: एक वोट की कीमत और सियासी सबक

राजस्थान के 309 नगरीय निकायों में हो रहे ये चुनाव राज्य की भजनलाल शर्मा सरकार और विपक्षी कांग्रेस दोनों के लिए साख का सवाल बने हुए हैं। शहरी क्षेत्रों को पारंपरिक रूप से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, इसलिए इन चुनावों के नतीजों को मौजूदा सरकार के कामकाज के रिपोर्ट कार्ड के रूप में भी देखा जा रहा है। परबतसर का यह वाकया राजनीतिक दलों के लिए एक बड़ा सबक है कि बाहरी प्रत्याशियों को बिना मजबूत स्थानीय आधार के किसी दूसरे वार्ड में थोपने के परिणाम कितने गंभीर हो सकते हैं। राजस्थान के चुनावी इतिहास में यह पहली बार नहीं है जब एक वोट की चर्चा इतनी व्यापक हुई हो। इससे पहले भी कई विधानसभा और स्थानीय चुनावों में मात्र 1 वोट के अंतर से हार-जीत तय होने के किस्से सामने आते रहे हैं, जो यह साबित करते हैं कि लोकतंत्र में हर एक सिंगल वोट की कीमत कितनी ज्यादा होती है। फिलहाल, परबतसर के वार्ड 13 का यह नतीजा इस पूरे निकाय चुनाव का सबसे रोचक और कभी न भूलने वाला किस्सा बन चुका है।

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