G7 शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी ने कनाडा और यूएई के नेताओं से की उच्च स्तरीय वार्ता, व्यापार और सुरक्षा पर बना बड़ा रोडमैप
फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस (Évian-les-Bains) में आयोजित 52वें G7 शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक धाक जमाते हुए कनाडा और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शीर्ष नेताओं के साथ बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें की हैं। इन बैठकों में जहां एक तरफ कनाडा के साथ व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देने पर सहमति बनी, वहीं दूसरी तरफ यूएई के साथ पश्चिम एशिया की सुरक्षा और समुद्री व्यापारिक मार्गों की स्थिरता पर गहन चर्चा हुई।
भारत-कनाडा वार्ता: आर्थिक और रणनीतिक संबंधों का नया अध्याय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा के नवनियुक्त प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) के साथ द्विपक्षीय बैठक की। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद कनाडाई नेतृत्व में बदलाव के बीच दोनों नेताओं की यह मुलाकात बेहद गर्मजोशी भरी रही। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर इस मुलाकात को “अत्यंत सुखद” बताया और रेखांकित किया कि पिछले एक साल से भी कम समय में दोनों नेताओं के बीच यह चौथी मुलाकात है, जो मजबूत भारत-कनाडा संबंधों के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
मुक्त व्यापार समझौता (FTA) और निवेश पर जोर
दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच लंबित व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA/FTA) की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में यह साझा लक्ष्य निर्धारित किया गया कि दोनों देश साल 2026 के अंत तक इस मुक्त व्यापार समझौते की वार्ताओं को अंतिम रूप देकर इसे लागू करेंगे। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।
ऊर्जा सुरक्षा और लचीली आपूर्ति श्रृंखला
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत और कनाडा ने एलएनजी (LNG), एलपीजी (LPG) और मेटलर्जिकल कोल (Metallurgical Coal) के व्यापार को बढ़ावा देने पर सहमति जताई। दोनों पक्षों ने वैश्विक खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए एक मजबूत और लचीली आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
रक्षा, विज्ञान और प्रवासन सहयोग, संस्थानों के बीच जुड़ाव
दोनों प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त विज्ञान और प्रौद्योगिकी समिति तथा कांसुलर संवाद की हालिया बैठकों के परिणामों पर संतोष व्यक्त किया। सुरक्षा संबंधों को आगे बढ़ाते हुए दोनों देश ‘सूचना की सामान्य सुरक्षा समझौते’ (General Security of Information Agreement) पर बातचीत शुरू करने के लिए सहमत हुए। रक्षा, वित्त और प्रवासन (Migration) के क्षेत्रों में आगामी समय में उच्च स्तरीय बातचीत होगी। साथ ही, प्रधानमंत्री मोदी ने संकेत दिए कि वह इस साल के अंत से पहले कनाडा का आधिकारिक दौरा कर सकते हैं।
भारत-UAE वार्ता: व्यापक रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता
शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ एक व्यापक रणनीतिक बैठक की। वर्ष 2026 में दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी मुलाकात है, जो भारत और यूएई के बीच गहराते विशेष संबंधों को रेखांकित करती है।
व्यापार, प्रौद्योगिकी और निवेश की समीक्षा
दोनों नेताओं ने जनवरी 2026 में यूएई के राष्ट्रपति की भारत यात्रा और मई 2026 में पीएम मोदी के यूएई दौरे के बाद से द्विपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी (विशेषकर एआई और फिनटेक) के क्षेत्र में कई नई पहलों पर तेजी से काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में सुरक्षा और शांति
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बात करते हुए दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के मौजूदा हालातों पर चिंता व्यक्त की। प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता की बहाली के लिए संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाना अनिवार्य है। अंतरराष्ट्रीय कानूनों, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का हर हाल में सम्मान होना चाहिए।
होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध व्यापार
वैश्विक वाणिज्य के लिहाज से दोनों देशों ने एक बेहद महत्वपूर्ण संयुक्त आह्वान किया। भारत और यूएई ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के माध्यम से बिना किसी रुकावट के मुक्त, सुरक्षित और निर्बाध नौवहन (Free, Safe, and Unimpeded Navigation) और व्यापार जारी रखने पर विशेष बल दिया, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए जीवन रेखा माना जाता है।
ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का आमंत्रण
प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई में रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और देखभाल के लिए राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद का विशेष आभार जताया। इसके साथ ही, पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति को इस वर्ष के अंत में भारत की मेजबानी में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया।
वैश्विक मंच पर ‘ग्लोबल साउथ’ की गूंज
यद्यपि भारत G7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के विशेष निमंत्रण पर प्रधानमंत्री मोदी लगातार सातवीं बार इस आउटरीच सत्र में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। इस सम्मेलन के माध्यम से भारत ने न केवल विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ रणनीतिक संबंध मजबूत किए हैं, बल्कि विकासशील देशों और ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) की आकांक्षाओं व वैश्विक चुनौतियों को भी प्रमुखता से दुनिया के सामने रखा है।
50 अरब डॉलर का लक्ष्य
भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA), जिसे आम तौर पर मुक्त व्यापार समझौता (FTA) कहा जाता है, का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को साल 2030 तक 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। 2 मार्च 2026 को नई दिल्ली में दोनों देशों के वाणिज्य मंत्रियों द्वारा हस्ताक्षरित ‘संदर्भ की शर्तों’ और मई 2026 में संपन्न हुए दूसरे दौर की वार्ता के आधार पर इस समझौते के प्रमुख नियमों, शर्तों और स्तंभों का विवरण निम्नलिखित है-
वस्तुओं का व्यापार (Trade in Goods) और सीमा शुल्क में कटौती
टैरिफ में कमी: समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे से आयात होने वाली वस्तुओं पर सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) को या तो पूरी तरह समाप्त करेंगे या बेहद कम करेंगे।
भारतीय निर्यात को लाभ: भारत के श्रम-गहन क्षेत्रों जैसे कपड़ा (Garments), रेडीमेड कपड़े, रत्न व आभूषण, समुद्री उत्पाद (Seafood), लोहा एवं इस्पात, और फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयों) को कनाडा के बाजार में बिना किसी शुल्क के आसान पहुंच मिलेगी।
कनाडाई निर्यात को लाभ: कनाडा से भारत आने वाले आवश्यक खनिजों (Critical Minerals), यूरेनियम, दालें (Pulses), उर्वरक (Fertilizers), कोयला और पेपर उत्पादों पर आयात शुल्क में ढील दी जाएगी।
सेवाओं का व्यापार (Trade in Services) और प्रवासन
पेशेवरों की आवाजाही: भारत कनाडाई बाजार में अपने आईटी (IT) पेशेवरों, इंजीनियरों, और वित्तीय विशेषज्ञों के लिए आसान वीजा नियमों और ‘अस्थायी प्रवासन’ (Mobility) की शर्तों को शामिल करने पर जोर दे रहा है।
शिक्षा और नवाचार: दोनों देशों ने ‘कनाडा-भारत प्रतिभा और नवाचार रणनीति’ (Talent and Innovation Strategy) के तहत शिक्षा से जुड़ी सेवाओं और शोधकर्ताओं के लिए नियमों को सरल बनाने पर सहमति जताई है।
उत्पत्ति के नियम (Rules of Origin)थर्ड-पार्टी डंपिंग पर रोक
कड़े ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ तय किए जा रहे हैं ताकि कोई तीसरा देश (जैसे चीन) अपने सामान को कनाडा के रास्ते मामूली हेरफेर करके बिना शुल्क भारत में डंप न कर सके। उत्पाद में एक निश्चित प्रतिशत स्थानीय मूल्य संवर्धन (Local Value Addition) होना अनिवार्य होगा।
स्वच्छता और पादप स्वच्छता उपाय (SPS) और तकनीकी बाधाएं (TBT)
कृषि और खाद्य उत्पादों (Agri-food) के व्यापार के लिए गुणवत्ता मानकों को सुव्यवस्थित किया जाएगा। कनाडाई दालों और भारत के कृषि उत्पादों की बिना किसी तकनीकी और गैर-जरूरी बाधाओं के जांच और स्वीकृति के नियम तय किए जा रहे हैं।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)
कनाडाई पेंशन फंड और अन्य बड़ी कंपनियों के लिए भारत के बुनियादी ढांचे (Infrastructure), नवीकरणीय ऊर्जा, और डिजिटल प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में निवेश के नियमों को सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाएगा। दोनों देशों के बीच व्यापारिक पेटेंट और नवाचारों की सुरक्षा के लिए वैश्विक मानकों के अनुरूप नियम शामिल किए जा रहे हैं। दोनों पक्ष जुलाई 2026 में ओटावा (कनाडा) में तीसरे दौर की वार्ता करने जा रहे हैं, जिसका लक्ष्य दिसंबर 2026 तक इस समझौते को पूरी तरह लागू करना है।
होर्मुज की सुरक्षा
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद संवेदनशील मार्ग है, क्योंकि भारत का लगभग 40% कच्चा तेल, 60% एलएनजी (LNG) और 90% एलपीजी (LPG) आयात इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है, पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव, वाणिज्यिक जहाजों पर हालिया ड्रोन/मिसाइल हमलों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को देखते हुए भारत सरकार और भारतीय नौसेना ने इस क्षेत्र में एक बहुआयामी “स्वतंत्र” रणनीतिक तैयारी और कूटनीति लागू की है। भारत की इस रणनीतिक तैयारी के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं-
ऑपरेशन संकल्प (Operation Sankalp) और सैन्य तैनाती
युद्धपोतों की निरंतर उपस्थिति: भारतीय नौसेना ने साल 2019 से खाड़ी क्षेत्र में ऑपरेशन संकल्प चला रखा है, जिसके तहत ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी में अग्रिम पंक्ति के डिस्ट्रॉयर (विध्वंसक) और फ्रिगेट युद्धपोत हमेशा तैनात रहते हैं। भारतीय नौसेना पी-8आई (P-8I) लंबी दूरी के समुद्री गश्ती विमानों और ड्रोन्स के जरिए आसमान से चौबीसों घंटे निगरानी रखती है। इसके अलावा, भारतीय ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाजों और एलपीजी/तेल टैंकरों को सुरक्षा कवच (Armed Escort) देकर सुरक्षित निकाला जाता है।
स्वतंत्र कूटनीति (Strategic Autonomy) किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं
लाल सागर या खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका या अन्य पश्चिमी देशों के नेतृत्व वाले बहुराष्ट्रीय नौसैनिक गठबंधनों में शामिल होने के बजाय, भारत स्वतंत्र रूप से केवल अपने राष्ट्रीय हितों और जहाजों की रक्षा के लिए कार्रवाई कर रहा है। भारत के ईरान के साथ मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का बड़ा फायदा मिला है। हालिया तनाव के बावजूद ईरानी प्राधिकारियों ने भारतीय जहाजों को “सुरक्षित मार्ग” (Safe Passage) देने का आश्वासन दिया, जिससे हाल ही में ‘दिशा’ (Disha) नामक भारतीय एलएनजी कैरियर और लगभग 22 अन्य जहाज इस संवेदनशील क्षेत्र को सुरक्षित पार कर सके।
अंतरराष्ट्रीय मंचों और साझेदारों के साथ सहयोग
जून 2026 में फ्रांस में हुए G7 शिखर सम्मेलन के दौरान फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम (UK) ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए भारत को एक सहयोगात्मक सुरक्षा ढांचे में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया है। पीएम मोदी ने खुद G7 बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति और अन्य वैश्विक नेताओं की उपस्थिति में भारतीय नाविकों पर होने वाले हमलों और समुद्री व्यापारिक मार्गों में व्यवधान पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे सभी देशों की साझा जिम्मेदारी बताया।
रियल-टाइम ट्रैकिंग और संस्थागत मुस्तैदी
सूचना संलयन केंद्र (IFC-IOR): गुरुग्राम में स्थित भारतीय नौसेना का इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर – इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) इस क्षेत्र से गुजरने वाले हर एक वाणिज्यिक जहाज की लाइव मूवमेंट पर कड़ी नजर रखता है और मित्र देशों के साथ रीयल-टाइम डेटा साझा करता है। जहाजरानी मंत्रालय (DG Shipping) ने संकट के समय नाविकों और उनके परिवारों के लिए विशेष कंट्रोल रूम सक्रिय किया है, जो अब तक 11,000 से अधिक कॉल संभाल चुका है और 3,400 से अधिक भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाने (Repatriation) में मदद कर चुका है।
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