OTT ‘सांस्कृतिक प्रदूषण’है…RSS ने बनाया एक्सपर्ट पैनल, ओटीटी कंटेंट पर होगी सख्ती!

The CSR Journal Magazine
नई दिल्ली: आरएसएस ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित होने वाले कंटेंट की समीक्षा के लिए एक अनौपचारिक एक्सपर्ट पैनल का गठन किया है। संघ का मानना है कि ओवर द टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म पर कई ऐसे कंटेंट हैं, जिन्हें ‘सांस्कृतिक प्रदूषण’ के रूप में देखा जा रहा है। यह कदम संघ प्रमुख मोहन भागवत के पिछले विजयादशमी संबोधन के करीब दो साल बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने ओटीटी कंटेंट को कानूनी तौर पर नियंत्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया था।

पैनल की पहली बैठक

आरएसएस के इस एक्सपर्ट पैनल की पहली बैठक हाल ही में हो चुकी है। पैनल में कुछ पूर्व वाइस चांसलर और शिक्षा एवं संस्कृति के क्षेत्र में कार्यरत आरएसएस के प्रचारक शामिल हैं। उनका उद्देश्य यह सुझाव देना है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म के कंटेंट को किस प्रकार से नियंत्रित और नियमित किया जा सकता है। इस पैनल में शामिल लोग पहले से स्थापित कानून के जानकारों की सलाह भी लेंगे।

कानूनी सलाह की आवश्यकता

संरक्षण और नीतियों के सख्त कार्यान्वयन के लिए आरएसएस का यह पैनल केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय एवं अन्य संबंधित संस्थाओं को अपने सुझाव सौंपेगा। पैनल को कोई निश्चित समय-सीमा नहीं दी गई है, लेकिन वो चाहते हैं कि प्रस्ताव तैयार करने से पहले विशेषज्ञों से विस्तृत चर्चा की जाए। पैनल का उद्देश्य यह है कि परिवारों, खासकर युवाओं पर पड़ रहे प्रभाव को कम किया जाए।

सर्टिफिकेशन प्रक्रिया की कमी

वर्तमान में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कंटेंट रिलीज करने के लिए कोई निर्धारित सर्टिफिकेशन प्रक्रिया नहीं है। जबकि थियेटर में फिल्मों को रिलीज करने से पहले विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। ओटीटी प्लेटफॉर्म फिलहाल इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2021 के तहत नियमित होते हैं।

केंद्र सरकार की कार्रवाई

केंद्र सरकार ने पहले ही कई कदम उठाए हैं ताकि गैर-कानूनी और अश्लील कंटेंट पर रोक लगाई जा सके। जुलाई, 2026 में लोकसभा को जानकारी दी गई थी कि भारत में पिछले दो वर्षों में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म को बंद किया गया है। ये प्लेटफॉर्म अश्लील कंटेंट दिखा रहे थे और विभिन्न कानूनों का उल्लंघन कर रहे थे। एक संसदीय समिति ने भी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कड़ी निगरानी रखने के लिए पोस्ट-रिलीज पैनल पर विचार विमर्श किया है। इसके साथ ही सूचना और प्रसारण मंत्रालय अपने स्तर पर एक वैधानिक फ्रेमवर्क बनाने की प्रक्रिया में है। इस प्रकार, ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कंटेंट के नियमन के लिए संगठित प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि समाज में सांस्कृतिक मानकों को बनाए रखा जा सके।

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