इंजीनियरों ने ढलान वाली सड़क गिरने से बचाने के लिए लगाए 580,000 टायर, अनोखे प्रयोग से हुआ कमाल

The CSR Journal Magazine
दुनियाभर में पिछले कुछ दशकों में वाहनों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। इसके साथ ही, पुराने टायरों का ढेर भी शहरों में जमा होता जा रहा है। ये बेकार टायर कचरे की समस्या बना रहे हैं। ऐसे में वैज्ञानिक और इंजीनियर इन टायरों के उपयोग के नए तरीके खोजने में लगे हैं।

ओरेगन में टायरों की जरूरत, टायरों का हल्का वजन

1990 में अमेरिका के ओरेगन में एक हाईवे मरम्मत परियोजना के दौरान इंजीनियरों ने लाखों टायरों का उपयोग करने का एक अनोखा तरीका निकाला। ओरेगन में सड़क बनाना चुनौतीपूर्ण हो रहा था क्योंकि किनारे ढलान थे। मिट्टी डालने पर पहले से खिसक रही जमीन पर बोझ बढ़ जाता था। इस समस्या का हल निकालने के लिए ओरेगन डिपार्टमेंट ऑफ ट्रांसपोर्टेशन (ODOT) ने पुराने टायरों का उपयोग किया। टायर हल्के होते हैं, जिससे ढलान पर पड़ने वाला बोझ कम हो गया। इस प्रयोग को ODOT की इंजीनियरिंग रिपोर्ट में ‘ओरेगन स्टेट रोड 35’ कहा गया। फेडरल हाईवे एडमिनिस्ट्रेशन ने इसे भूस्खलन को ठीक करने की परियोजना में अब तक के सबसे बड़े कटे हुए टायरों के उपयोग के रूप में दर्ज किया।

580,000 टायरों की आवश्यकता

इस काम के लिए 5,800 टन कटे हुए टायरों की आवश्यकता थी, जो लगभग 580,000 टायरों के बराबर है। ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च रिकॉर्ड में रिचर्ड अप्टन और जॉर्ज माचन की 1993 की रिसर्च के अनुसार, चार आपूर्तिकर्ताओं ने इन्हें 150 से 275 मील दूर से ट्रकों के जरिए साइट तक पहुंचाया। ये टायर 100 ट्रकों में लाए गए, हर ट्रक पर 28 टन सामग्री थी।

टायरों का बिछाने का तरीका, सड़क की सतह का निर्माण

इन टायरों को तीन-तीन फुट की परतों में बिछाया गया और हर परत को दबाया गया। ओरेगन के रीसाइक्लिंग प्रोग्राम ने सामग्री की लागत को घटाकर 10 डॉलर प्रति टन कर दिया। टुकड़ों में कटे टायरों की लागत 30 डॉलर प्रति टन थी। बिछाने और दबाने में 8.33 डॉलर प्रति टन का खर्च आया। इस तरह, पुराने टायरों का इस्तेमाल एक व्यावहारिक विकल्प बन गया। टायरों की परत के ऊपर और किनारों की ढलानों पर तीन फुट मोटी मिट्टी की एक परत बिछाई गई। इसके ऊपर सड़क की सतह बनाई गई और 8 इंच डामर की परत के नीचे 23 इंच मोटे एग्रीगेट का आधार रखा गया। टायरों से बने इस तटबंध का सबसे मोटा हिस्सा लगभग 12.5 फुट का था।

स्ट्रक्चर की निगरानी

ODOT ने स्लोप इनक्लिनोमीटर, पीजोमीटर, सेटलमेंट प्लेट और सर्वे हब की मदद से ढांचे की निगरानी की। 1993 में पाया गया कि सड़क की सतह का शुरुआती झुकाव मिट्टी के तटबंध पर बनने वाली सड़क की तुलना में दोगुना था। FHWA ने इसे भूस्खलन को ठीक करने वाला अब तक का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट माना। इस प्रयोग ने न केवल ओरेगन में सड़क निर्माण की चुनौतियों को हल किया, बल्कि यह अन्य देशों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत करता है। पुराने टायरों का पुनर्चक्रण और उनका उपयोग एक स्थायी समाधान हो सकता है। ऐसे प्रयोगों से न केवल पर्यावरण की रक्षा होती है, बल्कि सड़क निर्माण की लागत भी कम होती है।

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