उमर अब्दुल्ला कैबिनेट में चार नए मंत्रियों की एंट्री, LG मनोज सिन्हा ने दिलाई शपथ

The CSR Journal Magazine
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 27 अक्टूबर को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में चार नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह समारोह श्रीनगर के चश्मा शाही इलाके में लोक भवन ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, एनसी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, बरकरार रखे गए मंत्री और कई प्रमुख नागरिक उपस्थित थे।

नए मंत्रियों की पहचान

शपथ लेने वाले चार नए मंत्रियों में जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (जेकेएनसी) के वरिष्ठ नेता अली मोहम्मद सागर शामिल हैं, जो श्रीनगर के खानयार विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। अली मोहम्मद सागर ने अब तक रिकॉर्ड सात बार विधानसभा चुनाव जीते हैं। इसके अलावा, शमीमा फिरदौस, जो श्रीनगर के हब्बा कदल विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुकी हैं, को भी मंत्री पद पर शपथ दिलाई गई। इसके अलावा, कुपवाड़ा जिले के त्रेहगाम क्षेत्र से विधायक मीर सैफुल्लाह और अनंतनाग जिले के पहलगाम क्षेत्र से विधायक अल्ताफ अहमद वानी उर्फ अल्ताफ कालू ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इन चारों विधायकों का संबंध सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस से है।

कैबिनेट का विस्तार, कैबिनेट में बने रहने वाले मंत्री

शपथ ग्रहण के बाद, जम्मू-कश्मीर कैबिनेट की कुल संख्या मुख्यमंत्री सहित नौ हो गई है। यह संख्या पुनर्गठन अधिनियम 2019 के बाद कैबिनेट की अधिकतम संख्या है। जम्मू-कश्मीर कैबिनेट में 90 सदस्यों वाली विधानसभा की संख्या का अधिकतम 10 प्रतिशत यानी 9 मंत्री हो सकते हैं। कैबिनेट में जिन मंत्रियों को बरकरार रखा गया है, उनमें उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी, सकीना इटू, जावेद राणा और जावेद अहमद डार शामिल हैं। यह सभी मंत्री अपने-अपने क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

सरकार का उद्देश्य

पार्टी सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट में फेरबदल और विस्तार का उद्देश्य बेहतर शासन और लोगों तक पहुंच सुनिश्चित करना है। इससे लोगों की शिकायतों का त्वरित निवारण किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के परामर्श से अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह और शमीमा फिरदौस जैसे वरिष्ठ नेताओं को शामिल करने का निर्णय लिया।

कांग्रेस का रुख

इस बीच, सरकार की सहयोगी कांग्रेस ने खुद को मंत्रिपरिषद से अलग कर लिया है। कांग्रेस का कहना है कि जब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं होता, तब तक वह मंत्रिपरिषद में शामिल नहीं होगी। यह स्थिति राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला सकती है।

नए मंत्रियों का स्वागत

नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद, जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नए मंत्रियों का स्वागत करते हुए कहा कि वे जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करेंगे। हालांकि, नए मंत्रियों के सामने कई चुनौतियाँ हैं, जिनमें विकास कार्यों को गति देना और लोगों की समस्याओं का समाधान शामिल है। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में यह बदलाव आने वाले समय में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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