फोन और स्मार्ट टीवी पर लाइव टीवी देखने के नियम बदलने की तैयारी, TRAI का बड़ा प्रस्ताव; जानिए क्या होगा असर
अगर आप मोबाइल फोन या स्मार्ट टीवी पर इंटरनेट के जरिए समाचार, मनोरंजन और दूसरे टीवी चैनल देखते हैं, तो आने वाले समय में आपके देखने का तरीका बदल सकता है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने इंटरनेट के माध्यम से सीधे टीवी चैनल दिखाने वाले अनुप्रयोगों के लिए नए नियामकीय ढांचे की सिफारिश की है। इसके तहत ऐसे मंचों को सरकारी प्राधिकरण लेना पड़ सकता है और स्मार्ट टीवी बनाने वाली कंपनियों को अपने उपकरणों में केवल अधिकृत अनुप्रयोग उपलब्ध कराने होंगे। इस प्रस्ताव का असर उन सेवाओं पर पड़ सकता है, जिनमें दर्शक बिना पारंपरिक केबल कनेक्शन या डिश एंटीना के इंटरनेट के जरिए निर्धारित समय-सारणी के अनुसार टीवी चैनल देखते हैं। हालांकि, अभी इन सिफारिशों को अंतिम रूप से लागू नहीं किया गया है। इनके आधार पर आगे नियम बनाने और उन्हें अधिसूचित करने का निर्णय केंद्र सरकार को लेना होगा।
क्या है TRAI का नया प्रस्ताव?
TRAI ने 26 अक्टूबर 2026 को इंटरनेट आधारित रैखिक टेलीविजन वितरण सेवाओं के लिए प्राधिकरण व्यवस्था बनाने की सिफारिशें जारी कीं। इस व्यवस्था को Application-based Linear Television Distribution (ALTD) नाम दिया गया है। इसमें ऐसी सेवाएं शामिल हैं, जो इंटरनेट के माध्यम से पारंपरिक टीवी की तरह निर्धारित कार्यक्रमों और चैनलों का प्रसारण करती हैं। इसमें मुफ्त, विज्ञापनों के सहारे चलने वाली इंटरनेट टीवी सेवाएं भी शामिल हैं, जिन्हें Free Ad-Supported Streaming Television (FAST) कहा जाता है। इन सेवाओं में दर्शक बिना अलग से चैनल का शुल्क चुकाए कार्यक्रम देख सकते हैं, जबकि प्रसारण के बीच विज्ञापन दिखाए जाते हैं। TRAI का कहना है कि इंटरनेट पर टीवी चैनल वितरित करने वाली सेवाओं के लिए एक स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है। अभी पारंपरिक केबल और डिश टीवी संचालकों को तय नियमों के तहत काम करना पड़ता है, जबकि इंटरनेट आधारित सेवाओं का संचालन अलग तरीके से होता है। नए प्रस्ताव का उद्देश्य इन सेवाओं के लिए जवाबदेही, उपभोक्ता संरक्षण और नियामकीय स्पष्टता सुनिश्चित करना है।
ऐप चलाने वाली कंपनियों को लेना होगा सरकारी प्राधिकरण
TRAI की सिफारिशों के मुताबिक, इंटरनेट के जरिए टीवी चैनलों का वितरण करने वाली पात्र कंपनियों को केंद्र सरकार से निर्धारित प्राधिकरण लेना होगा। यह व्यवस्था देशभर में सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रस्तावित है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुल्क 10,000 रुपये और एकमुश्त प्रवेश शुल्क एक लाख रुपये रखने की सिफारिश की गई है। प्राधिकरण की शुरुआती अवधि 20 वर्ष होगी। इसके बाद इसे प्रत्येक बार 10 वर्ष के लिए नवीनीकृत करने का प्रावधान प्रस्तावित है। राहत की बात यह है कि TRAI ने इस व्यवस्था में अलग से प्राधिकरण शुल्क, बैंक गारंटी या सुरक्षा जमा राशि रखने की सिफारिश नहीं की है। इसका मतलब है कि नए नियम लागू होने पर कंपनियों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा, लेकिन इसके आधार पर दर्शकों पर सीधे कोई नया शुल्क लगाने की घोषणा नहीं हुई है।
स्मार्ट टीवी में पहले से मौजूद ऐप पर भी पड़ेगा असर
आज कई स्मार्ट टीवी में कुछ इंटरनेट टीवी ऐप पहले से मौजूद होते हैं। इनके जरिए दर्शक बिना अलग सेट-टॉप बॉक्स लगाए समाचार, मनोरंजन और दूसरे कार्यक्रम देख सकते हैं। Samsung TV Plus और LG Channels जैसी सेवाएं इस तरह के मॉडल के उदाहरण हैं। TRAI ने सिफारिश की है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय अधिकृत ऐप की एक केंद्रीय सूची तैयार करे। स्मार्ट टीवी बनाने वाली कंपनियों और उनके संचालन तंत्र उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके उपकरणों और ऐप स्टोर में केवल अधिकृत सेवाएं ही उपलब्ध हों। उन्हें मंत्रालय के सामने सालाना अनुपालन रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी। यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो किसी ऐसी सेवा को लेकर बदलाव हो सकता है जो आवश्यक प्राधिकरण प्राप्त नहीं करती। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि मौजूदा सभी इंटरनेट टीवी ऐप बंद हो जाएंगे। किसी सेवा पर असर इस बात पर निर्भर करेगा कि वह प्रस्तावित नियमों के दायरे में आती है या नहीं और आवश्यक अनुमति प्राप्त करती है या नहीं।
क्या इंटरनेट पर मुफ्त टीवी देखना बंद हो जाएगा?
दर्शकों के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि क्या अब मुफ्त में लाइव टीवी देखना मुश्किल हो जाएगा। फिलहाल इसका जवाब है—नहीं, मुफ्त टीवी देखने पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव नहीं है। TRAI की सिफारिशों का मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर टीवी चैनल वितरित करने वाले मंचों को नियामकीय दायरे में लाना है। विज्ञापनों के माध्यम से कमाई करने वाली सेवाओं का मुफ्त मॉडल अपने आप समाप्त नहीं होता। लेकिन भविष्य में दर्शकों को ऐप की उपलब्धता और उसके अधिकृत होने से जुड़े बदलाव देखने पड़ सकते हैं। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी ऐप पर लाइव टीवी उपलब्ध होने भर से वह इस प्रस्ताव के दायरे में नहीं आ जाता। सोशल मीडिया मंचों पर होने वाले लाइव प्रसारण को प्रस्तावित ALTD व्यवस्था से बाहर रखा गया है। इसी तरह, प्रसारक के अपने मंच पर केवल उसके स्वयं के चैनलों या उसकी सहायक अथवा मूल कंपनी के चैनलों के वितरण को भी इस दायरे से बाहर रखने की सिफारिश है।
इंटरनेट के लिए बनाए गए नए टीवी चैनलों का क्या होगा?
TRAI ने ऐसे रैखिक टीवी चैनलों के लिए भी सरल पंजीकरण व्यवस्था बनाने की सिफारिश की है, जिन्हें खास तौर पर इंटरनेट के माध्यम से प्रसारित करने के लिए तैयार किया जाता है। इन्हें इंटरनेट आधारित नए टीवी चैनल कहा जा सकता है। प्रस्ताव के मुताबिक, ऐसे चैनलों को निर्धारित नाम और प्रतीक चिह्न के साथ पंजीकरण कराना होगा। इंटरनेट टीवी सेवा देने वाले मंच केवल उन्हीं चैनलों का वितरण कर सकेंगे, जिन्हें केंद्र सरकार से आवश्यक अनुमति, प्राधिकरण या पंजीकरण प्राप्त होगा। हालांकि, समाचार और समसामयिक विषयों से जुड़े इंटरनेट-आधारित नए चैनलों के लिए यही सरल पंजीकरण मार्ग उपलब्ध कराने की सिफारिश नहीं की गई है। TRAI ने समाचार सामग्री से जुड़े सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलुओं को इसका कारण बताया है। इस कदम से इंटरनेट पर नए चैनल शुरू करने वाली कंपनियों के लिए नियम अधिक स्पष्ट हो सकते हैं। वहीं, उन्हें अपना मंच शुरू करने से पहले लागू होने वाली शर्तों और अनुमति प्रक्रिया पर ध्यान देना होगा।
शिकायतों के समाधान की भी होगी व्यवस्था
प्रस्ताव में उपभोक्ता संरक्षण को भी जगह दी गई है। TRAI ने सिफारिश की है कि इंटरनेट टीवी ऐप चलाने वाली कंपनी ही अपनी सेवा से संबंधित उपभोक्ता शिकायतों के समाधान के लिए प्राथमिक संपर्क बिंदु बने। इससे दर्शकों को सेवा में परेशानी, अनुचित कार्यक्रम या अन्य शिकायतों के मामले में संबंधित कंपनी तक पहुंचने का स्पष्ट माध्यम मिल सकता है। हालांकि, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया, उसके निपटारे की समय-सीमा और अन्य विस्तृत शर्तें अंतिम नियमों पर निर्भर करेंगी।
टीवी की दर्शक संख्या मापने के तरीके में भी बदलाव
TRAI ने इंटरनेट आधारित टीवी ऐप के माध्यम से देखे जाने वाले चैनलों की दर्शक संख्या को मौजूदा टीवी दर्शक मापन व्यवस्था में शामिल करने की सिफारिश की है। अधिकृत ऐप संचालकों को निर्धारित नीति के अनुसार दर्शक संख्या से जुड़े गुमनाम आंकड़े समय-समय पर प्रकाशित करने की अनुमति देने का भी प्रस्ताव है। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि दर्शक पारंपरिक टीवी के बजाय इंटरनेट पर किन चैनलों और कार्यक्रमों को देख रहे हैं। विज्ञापन देने वाली कंपनियों और प्रसारकों के लिए भी ऐसे आंकड़े उपयोगी हो सकते हैं, क्योंकि विज्ञापन की योजना बनाने में दर्शक संख्या महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
TRAI ने ये सिफारिशें क्यों कीं?
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 15 दिसंबर 2025 को इस विषय पर TRAI से नियामकीय व्यवस्था तैयार करने की सिफारिशें मांगी थीं। इसके बाद TRAI ने 6 अप्रैल 2026 को परामर्श पत्र जारी किया। इस प्रक्रिया में उसे 207 टिप्पणियां और 11 प्रति-टिप्पणियां मिलीं। 10 जून 2026 को इस मुद्दे पर खुली चर्चा भी आयोजित की गई। इन सुझावों और विचार-विमर्श के आधार पर 26 अक्टूबर 2026 को अंतिम सिफारिशें जारी की गईं। इस पूरी प्रक्रिया के पीछे एक प्रमुख सवाल यह है कि जब इंटरनेट ऐप भी दर्शकों को पारंपरिक टीवी की तरह निर्धारित कार्यक्रम और चैनल दिखाते हैं, तो उनके संचालन के लिए भी स्पष्ट नियम क्यों नहीं होने चाहिए। केबल और डिश टीवी क्षेत्र से जुड़े पक्ष लंबे समय से नियामकीय समानता की मांग करते रहे हैं। दूसरी ओर, इंटरनेट आधारित सेवाओं के लिए ऐसा ढांचा बनाना जरूरी है, जो नए प्रयोगों और डिजिटल कारोबार की संभावनाओं को अनावश्यक रूप से बाधित न करे। TRAI ने अपेक्षाकृत सरल प्राधिकरण व्यवस्था की सिफारिश करके इन्हीं पहलुओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है।
दर्शकों को अभी क्या करना चाहिए?
फिलहाल स्मार्ट टीवी या मोबाइल से लाइव टीवी देखने वाले लोगों को कोई तत्काल बदलाव करने की जरूरत नहीं है। TRAI की सिफारिशें अपने आप लागू होने वाले अंतिम नियम नहीं हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को इनके आधार पर आगे निर्णय लेना होगा और आवश्यक नियम अधिसूचित करने होंगे। दर्शकों के लिए आगे तीन बातें महत्वपूर्ण रहेंगी। पहली, उनके पसंदीदा ऐप की उपलब्धता बनी रहती है या नहीं। दूसरी, क्या संबंधित सेवा को नए नियमों के तहत प्राधिकरण लेना होगा। तीसरी, शिकायतों और दर्शक संख्या से जुड़े नए प्रावधान किस रूप में लागू होते हैं।
इंटरनेट के जरिए लाइव टीवी देखने का विकल्प खत्म करने के बजाय TRAI ऐसी सेवाओं को एक औपचारिक नियामकीय व्यवस्था में लाने की तैयारी कर रहा है। यदि सरकार इन सिफारिशों को स्वीकार करके लागू करती है, तो ऐप संचालकों और स्मार्ट टीवी कंपनियों की जिम्मेदारियां बढ़ेंगी। दर्शकों पर इसका वास्तविक असर अंतिम नियमों और उनके क्रियान्वयन के बाद ही स्पष्ट होगा।
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