महिलाओं के लिए ऐतिहासिक आरक्षण की तैयारी, 2029 चुनाव में 33% Women Reservation

The CSR Journal Magazine

लोकसभा सीटें बढ़कर 816, महिला सांसदों की संख्या होगी 273

केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 33% महिला आरक्षण लागू करने की योजना बना रही है। इस आरक्षण के कारण संसद में महिला सांसदों की संख्या बढ़कर 273 हो जाएगी। सरकार ने इसके लिए संसद के मौजूदा सत्र में दो बिल लाने का प्रस्ताव रखा है। यह बिल महिला आरक्षण को लागू करने की मौजूदा शर्तों में बदलाव लाएंगे, जिसके तहत लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 की जाएगी।

बिलों का उद्देश्य और प्रक्रिया

गृह मंत्री अमित शाह ने एनडीए और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक की है ताकि इस पर सहमति बनाई जा सके। अगर सहमति बन जाती है, तो यह बिल इसी हफ्ते संसद में पेश किए जा सकते हैं। महिला आरक्षण का यह कानून 2023 में संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पास हुआ था, लेकिन यह अभी लागू नहीं हुआ है।

जनगणना पर नया प्रस्ताव

सरकार का प्रस्ताव है कि नई जनगणना का इंतजार किए बिना 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर सीटों का परिसीमन किया जाए। इससे प्रक्रिया समय पर पूरी हो सकेगी और आरक्षण को जल्द लागू किया जा सकेगा।

संविधान संशोधन की आवश्यकता

इस बदलाव के लिए सरकार दो बिल लाएगी। पहले में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन होगा और दूसरे में परिसीमन कानून में बदलाव किया जाएगा। इन बिलों को पास करने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। इस कारण से सरकार विपक्ष का समर्थन जुटाने में लगी हुई है। विभिन्न पार्टियों के नेताओं के साथ चर्चा की गई है।

महिलाओं के आरक्षण का ढांचा

आगामी आरक्षण के ढांचे के अनुसार, महिला सांसदों के लिए 273 सीटें आरक्षित की जाएंगी, जिसमें एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं के लिए भी कोटा होगा। ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान फिलहाल नहीं रखा गया है। इस फॉर्मूले पर राज्य विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाने की योजना है।

महिला आरक्षण का इतिहास

महिला आरक्षण की मांग का इतिहास लंबा है। 1931 के भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी, और 1947 में आजादी के बाद भी महिलाओं के अधिकारों पर जोर दिया गया। 1993 में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण दिया गया था। हालांकि, संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण की बार-बार कोशिशें विफल हुई थीं।

भविष्य की दिशा

2029 के चुनाव तक यह आरक्षण लागू होने से महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, जो लोकतंत्र में एक सकारात्मक बदलाव साबित हो सकता है। यह कदम महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर होगा, जिसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल किया जा सकेगा।

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