समय रैना-शेरोन वर्मा की टिप्पणियों पर कैलाश खेर की दो टूक-कॉमेडी में मर्यादा और संवेदनशीलता जरूरी

The CSR Journal Magazine

कैलाश खेर: ‘तमीज में रहना चाहिए’, कॉमेडी की शालीनता पर दिया बयान, कश्मीर और बिहार के मजाक पर उठे सवाल

TouTube और OTT स्पेस के मशहूर कॉमेडी शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ (सीजन 2) में बिहार और कश्मीर को लेकर बोले गए कुछ संवादों (जोक्स) पर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में देश के दिग्गज सूफी गायक कैलाश खेर ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है और कलाकारों को मर्यादा में रहने की सलाह दी है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब शो के होस्ट और कॉमेडियन समय रैना और शो में बतौर गेस्ट आईं कॉमेडियन शेरोन वर्मा के बीच एक-दूसरे का मजाक उड़ाने (रोस्टिंग) का दौर चल रहा था। इस दौरान शो के पैनल में ओरी, निशांत सूरी और अभिनेत्री अर्चना पूरन सिंह भी मौजूद थीं। हंसी-मजाक के बीच दोनों कलाकारों ने एक-दूसरे के राज्यों (बिहार और कश्मीर) की पहचान और वहां से जुड़े स्टीरियोटाइप्स (रूढ़िवादी बातों) को लेकर टिप्पणियां कीं।

समय रैना और शेरोन वर्मा ने क्या कहा था?

समय रैना ने शेरोन वर्मा के बिहारी होने का मजाक उड़ाया। उन्होंने भाषा के लहजे (Pronunciation) पर चुटकी लेते हुए कहा, “शेरोन इतनी बिहारी हैं कि उन्हें लगता है ‘इबोला’ (Ebola) का मतलब है कि किसी ने कुछ ‘ई बोला’ (यह बोला)।” इसके बाद उन्होंने बिहार के लोगों के रोजगार के लिए मुंबई या अन्य राज्यों में जाने पर भी टिप्पणी की और कहा, “शेरोन वर्मा एक बिहारी हैं जो मुंबई में नौकरी ढूंढने आई हैं। यह तो बस बिहारियों वाली बात है।”

शेरोन वर्मा का पलटवार

शेरोन ने समय रैना की कश्मीरी पहचान पर निशाना साधा। उन्होंने कश्मीर में होने वाली पत्थरबाजी (Stone-pelting) की तुलना नशे में धुत होने (Getting Stoned) से की और कहा, “समय इतना कश्मीरी है कि उसे ‘स्टोन्ड’ होना (पत्थर खाना/नशे में होना) पसंद है।”

सबसे विवादित बयान

जब समय रैना ने बिहारियों के पलायन की बात की, तो शेरोन वर्मा ने जवाब दिया- “कम से कम, मैंने अपना राज्य अपनी मर्जी से तो छोड़ा है।”

विवाद क्यों बढ़ा और लोगों को क्या आपत्ति है?

शेरोन वर्मा की इस आखिरी लाइन पर सोशल मीडिया पर भारी गुस्सा देखा गया। लोगों का कहना है कि 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों को घाटी से अपना घर-बार छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा था, जो कि एक ऐतिहासिक त्रासदी और नरसंहार जैसा दर्द था। शेरोन के इस बयान को कश्मीरी पंडितों के उस गंभीर दर्द और मजबूरी का क्रूर मजाक उड़ाने जैसा माना गया। इंटरनेट पर लोगों ने कहा कि कॉमेडी के नाम पर किसी की ऐतिहासिक त्रासदी, पलायन के दर्द या क्षेत्रीय पहचान का इस तरह से अपमान नहीं किया जा सकता। भाजपा नेता राम कदम और बिहार के राजनेताओं ने भी इस पर नाराजगी जताई और इसे सस्ते प्रचार के लिए धर्म और समुदाय का अपमान बताया।

इस पर कैलाश खेर ने क्या कहा?

 इस विवाद को लेकर प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर ने किसी का नाम लिए बिना कलाकारों को बेहद सरल और गंभीर नसीहत दी। कैलाश खेर ने कहा कि जैसे संगीत सिर्फ एक धुन नहीं है, बल्कि एक अनुशासन (Discipline) है, वैसे ही बातचीत और कला का भी एक नियम होता है। यदि आप मर्यादा या धुन से बाहर जाएंगे, तो आप कला नहीं बल्कि फूहड़ता पर उतर आएंगे। उन्होंने कहा कि हर इंसान को हमेशा ‘चैतन्य’ (जागरूक/Alert) और ‘तमीज’ (शिष्ट/Polite) में रहना चाहिए। हंसी-मजाक करने और दूसरों को हंसाने के लिए किसी का दिल दुखाना या संवेदनशील मुद्दों का सहारा लेना जरूरी नहीं है।

नेम-फेम पर सलाह

उन्होंने नए कलाकारों को आगाह किया कि जब आप लोकप्रियता की सीढ़ियां चढ़ते हैं, तो आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि आपकी बातें समाज पर क्या असर डाल रही हैं। कलाकारों को अपनी नैतिक और सामाजिक सीमाएं कभी नहीं लांघनी चाहिए। संक्षेप में कहें तो यह पूरा विवाद स्टैंड-अप कॉमेडी में ‘अभिव्यक्ति की आजादी बनाम सामाजिक संवेदनशीलता’ का है। जहां एक तरफ शो के दर्शक इसे महज एक ‘रोस्ट’ (मजाक) मान रहे हैं, वहीं कैलाश खेर और समाज का एक बड़ा वर्ग इसे ऐतिहासिक दर्द और क्षेत्रीय पहचान का असंवेदनशील मजाक मान रहा है।

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