Investment in Madhya Pradesh: निवेश से एमपी को मिल रहा है बल, ₹30 लाख करोड़ के प्रस्तावों में ₹10 लाख करोड़ से ज्यादा जमीन पर उतरे

The CSR Journal Magazine
मध्य प्रदेश में Global Investors Summit के दौरान मिले बड़े निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने की दिशा में सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Madhya Pradesh CM Mohan Yadav) के मुताबिक, समिट में करीब ₹30 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले थे, जिनमें से ₹10 लाख करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट अब धरातल पर आ चुके हैं। यानी करीब 30 प्रतिशत निवेश प्रस्ताव Implementation Stage तक पहुंच चुके हैं। MP Industrial Development

सिर्फ MoU नहीं, जमीन पर दिखने लगा निवेश

GIS 2025 में कुल ₹30.77 लाख करोड़ के MoU और निवेश प्रस्ताव सामने आए थे। उस समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा था कि इन प्रस्तावों को जमीन पर उतारने के लिए मध्य प्रदेश सरकार काम करेगी। अब सरकार का दावा है कि इन प्रस्तावों का बड़ा हिस्सा वास्तविक परियोजनाओं में बदलने लगा है। जुलाई 2026 में मुख्यमंत्री ने पीथमपुर में LiuGong India के ₹272 करोड़ के नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का उद्घाटन भी किया। इस प्लांट से करीब 600 रोजगार पैदा होने की बात सामने आई है।

निवेश के साथ रोजगार पर भी फोकस

मोहन यादव सरकार का फोकस केवल बड़े उद्योगों को प्रदेश में लाने पर नहीं, बल्कि रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर भी है। मुख्यमंत्री के अनुसार, 2026 के पहले छह महीनों में ही ₹76,862 करोड़ के नए निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे 82 हजार से अधिक रोजगार के अवसर बनने की संभावना है। सरकार का दावा है कि उद्योगों के लिए जमीन, बिजली, कुशल श्रमिक और बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के साथ-साथ अलग-अलग सेक्टर के लिए विशेष औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं।

टेलीकॉम से टेक्सटाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स तक नई तस्वीर

मध्य प्रदेश में सेक्टर आधारित इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट पर भी जोर दिया जा रहा है। ग्वालियर में Telecom Manufacturing Zone, धार में PM MITRA Park और नर्मदापुरम के बाबई-मोहासा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्माण से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। इसके अलावा हाल में टोरेंट ग्रुप ने मध्य प्रदेश में करीब ₹43 हजार करोड़ के ऊर्जा निवेश की योजनाएं सामने रखी हैं। वहीं PM MITRA Park से जुड़े निवेश को भी गति मिल रही है।

रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का दिख रहा असर

मोहन यादव सरकार ने निवेश को केवल भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों में Regional Industry Conclaves आयोजित कीं। सरकार का कहना है कि इसी रणनीति ने स्थानीय उद्योग और निवेशकों को आकर्षित करने में मदद की और इसका असर GIS 2025 में दिखाई दिया। यानी सरकार की रणनीति साफ दिखाई देती है निवेश लाना, उसे जमीन पर उतारना और फिर उससे रोजगार पैदा करना।

₹30 लाख करोड़ से ₹10 लाख करोड़ तक का सफर क्यों अहम?

निवेश सम्मेलन में बड़े-बड़े MoU होना एक बात है, लेकिन उनका वास्तविक प्रोजेक्ट में बदलना उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में करीब ₹30 लाख करोड़ के प्रस्तावों में से ₹10 लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश का Implementation Stage तक पहुंचना मध्य प्रदेश सरकार के लिए एक अहम उपलब्धि के तौर पर पेश किया जा रहा है। हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि निवेश प्रस्ताव, MoU और वास्तविक निवेश तीन अलग-अलग चरण हैं। इसलिए आगे सरकार की असली परीक्षा इन परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने और उनसे वास्तविक रोजगार व उत्पादन बढ़ाने की होगी।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!
App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 
Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos