भारत में बेरोजगारी की दर में वृद्धि, सरकारी नौकरी की कमी

The CSR Journal Magazine
पुलिस की नौकरी की तैयारी कर रहे 23 साल के विवेक की कहानी देश के लाखों पढ़े-लिखे युवाओं की तरह है। निजी क्षेत्र में स्थायी नौकरी मिलना कठिन है, जबकि सरकारी नौकरियों की कमी और लंबी प्रक्रिया ने स्थिति और भी गंभीर बना दी है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि बेरोजगारी बढ़ रही है और नौकरी चाहने वालों की संख्या खाली पदों के मुकाबले कहीं अधिक है।

पढ़ाई और हुनर में अंतर

विवेक ने दो साल पहले बीए की डिग्री पूरी की थी और पुलिस बल में नौकरी पाने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं। पहले हुई परीक्षा के रद्द होने से उनका इंतज़ार और कठिन हो गया है। फिलहाल, वह अलीगढ़ की एक पैकेजिंग फैक्ट्री में काम कर रहे हैं, ताकि परिवार की आर्थिक मदद कर सकें। विवेक का कहना है, “मुझे उम्मीद है कि अगले छह महीनों में परीक्षा होगी और मैं भर्ती हो जाऊंगा।”

परिवार की चिंता

विवेक के माता-पिता उनकी नौकरी की चिंता में हैं। उनकी मां रूपा कहती हैं, “हमने उसकी पढ़ाई के लिए बहुत मेहनत की है।” विवेक की स्थिति देश के लाखों युवाओं की कहानी बयां करती है, जो स्नातक, स्नातकोत्तर और तकनीकी प्रशिक्षण के बाद भी नौकरी की तलाश में हैं।

बेरोजगारी की दर में वृद्धि

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, भारत में कामकाजी आबादी अगले 10 साल में 616 मिलियन से बढ़कर 980 मिलियन होने की उम्मीद है। इससे युवाओं पर नौकरी पाने का दबाव और बढ़ेगा। अगस्त 2026 की श्रम बल सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, 15 साल और उससे अधिक उम्र के युवाओं में बेरोजगारी दर 15.1% थी, जो कुल बेरोजगारी दर से तीन गुना अधिक है।

शिक्षा और रोजगार की खाई

केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट बताती है कि शिक्षा के स्तर और उपयुक्त रोजगार के अवसरों के बीच लगातार अंतर बेरोजगारी की एक बड़ी वजह है। कई युवा, जैसे 20 साल के इंद्रजीत, कम वेतन वाली नौकरियों में काम कर रहे हैं और बेहतर अवसरों की तलाश में हैं।

युवाओं के विरोध प्रदर्शन

2026 में युवाओं की नाराजगी कई विरोध प्रदर्शनों में सामने आई। दिल्ली और एनसीआर में औद्योगिक कर्मचारियों ने कम वेतन और खराब कामकाजी हालात के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्रों ने नीट परीक्षा रद्द होने के खिलाफ भी आवाज उठाई।

सरकारी नौकरी की चुनौती

सरकारी नौकरियों में कमी और खाली पदों की संख्या बढ़ती जा रही है। मार्च 2023 तक केंद्र सरकार में 4.04 मिलियन मंजूर पद थे, जिनमें से केवल 3.06 मिलियन भरे गए थे। इस स्थिति ने युवाओं के लिए सरकारी नौकरी पाने की चुनौती को और बढ़ा दिया है।

निजी क्षेत्र की भूमिका

सरकारी नौकरी की चाह अब भी युवाओं में है, लेकिन सरकारी नौकरियां पूरे नौकरी बाजार का केवल 10% हैं। रोजगार पैदा करने की मुख्य जिम्मेदारी निजी क्षेत्र पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि निजी क्षेत्र को अधिक नौकरियां पैदा करने और उचित वेतन देने पर ध्यान देना चाहिए।

भविष्य की चुनौतियाँ

2023-24 के आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि बढ़ते श्रम बल की जरूरत पूरी करने के लिए हर साल 7.85 मिलियन नौकरियां बनाने की आवश्यकता है। हालांकि, शिक्षा और कार्यस्थल की जरूरतों के बीच का अंतर इसे और कठिन बना रहा है।

नौकरी की तलाश में युवा

विवेक और इंद्रजीत जैसे युवाओं के अनुभव बेरोजगारी, कम वेतन और पढ़ाई तथा नौकरी की जरूरतों के बीच के अंतर को उजागर करते हैं। आंकड़े बताते हैं कि नौकरी चाहने वालों की संख्या खाली पदों से कहीं अधिक है।

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