गंगा जल संधि पर Bangladesh की नई शर्त, क्या भारत बन पाएगा सहमत?

The CSR Journal Magazine
ढाका: बांग्लादेश ने भारत के साथ गंगा जल के बंटवारे को लेकर एक नई मांग पेश की है। बांग्लादेश के नेता तारिक रहमान के दिल्ली दौरे से पहले, ढाका ने पहले से रखी शेख हसीना को वापस सौंपने की शर्त के साथ अब गंगा जल संधि को नये सिरे से समझौता करने की बात कही है। दोनों देशों के बीच गंगा जल के बंटवारे के लिए 1996 में जो समझौता हुआ था, वह इस साल दिसंबर में समाप्त होने वाला है। ढाका का कहना है कि गंगा जल के बंटवारे पर उनकी आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समाहित किया जाना चाहिए।

गंगा जल संधि की नई जरूरत क्यों?

बांग्लादेश ने 17 सितंबर को एक महत्वपूर्ण हाई-लेवल मीटिंग बुलाई थी जिसमें तारिक रहमान के दौरे समेत कई मुद्दों पर चर्चा की गई। ढाका के नए प्रस्ताव के पीछे उनका तर्क है कि गंगा का पानी सूखे के मौसम में भी उपलब्ध हो, इसके लिए एक नई संधि की आवश्यकता है। बांग्लादेश इस बार गंगा जल के बंटवारे में अधिक हिस्सेदारी चाहता है, जिससे निचले तटवर्ती देश के तौर पर उनकी आवश्यकताएं पूरी हो सकें।

भारत की चिंताएं और संभावित तनाव

भारत के लिए यह मामला केवल समझौते का नवीनीकरण नहीं है। बांग्लादेश की दूसरी शर्त यह है कि तारिक रहमान तभी दिल्ली आएंगे जब भारत आश्वासन दे कि शेख हसीना भारत की जमीन से कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं करेंगी। इस मुद्दे पर भारत के कई राज्यों, विशेषकर पश्चिम बंगाल, के साथ बातचीत चल रही है। बांग्लादेश का यह चिंता का विषय रहा है कि शेख हसीना की गतिविधियों से दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ सकता है।

गंगा जल विवाद का इतिहास

भारत और बांग्लादेश के बीच 54 नदियों का ज Netzwerk बना हुआ है, लेकिन गंगा नदी के पानी के बंटवारे पर ही एक ठोस संधि है। अन्य नदियों के लिए कोई स्थायी समझौता नहीं है। बांग्लादेश अब विभिन्न नदियों के टुकड़ों के बजाय एक व्यापक और दीर्घकालिक ढांचे की मांग कर रहा है। गंगा जल बंटवारे की नई संधि में राजनीतिक सहमति जरूरी होगी, जो कि समस्यात्मक हो सकती है।

क्या एक नई जल संधि संभव है?

बांग्लादेश ने कहा है कि जल की मांग को लेकर एक साझा ट्रीटी की जरूरत है। लेकिन भारत को डर है कि यदि वे एक सख्त संधि को स्वीकार करते हैं, तो यह उनके हाइड्रो-पॉवर और सिंचाई प्रोजेक्ट्स पर कानूनी रोक लग सकता है। इसके अलावा, भारत के संविधान के अनुसार, पानी राज्य का विषय है, इसलिए इसे लागू करने के लिए राज्य सरकारों से भी सहमति जरूरी है। बांग्लादेश के इस नए प्रस्ताव का नतीजा आने वाले समय में विभिन्न राज्यों की सहमति पर निर्भर करेगा।

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