दीवाली से पहले किसानों के लिए खुशखबरी, यूरिया के दाम में 10% की कमी

The CSR Journal Magazine
रबी फसलों की बुवाई से पहले किसानों के लिए यह एक अच्छी खबर है कि यूरिया का संकट नहीं होने जा रहा है। पिछले महीने ब्राजील और मध्य पूर्व में यूरिया की कीमतों में तेजी के संकेत मिले थे, लेकिन वैश्विक स्तर पर आपूर्ति बढ़ने से कीमतों में नरमी आई है। अगस्त की तुलना में भारत को यूरिया लगभग 10 प्रतिशत सस्ती दर पर मिल रहा है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, भारत को हर साल करीब चार सौ लाख टन यूरिया की आवश्यकता होती है, जिसमें से लगभग सौ टन का आयात करना पड़ता है।

आयात और उत्पादन के आंकड़े

वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से जनवरी के बीच देश में 251.26 लाख टन यूरिया का उत्पादन हुआ, जबकि इस दौरान 89.30 लाख टन यूरिया का आयात किया गया। यह आंकड़ा यूरिया आयात की जरूरतों को दर्शाता है। रबी फसलों की बुवाई से पहले सरकारी कंपनी इंडियन पोटाश लिमिटेड (आइपीएल) ने 17 लाख टन यूरिया के आयात के लिए टेंडर जारी किया था। इसमें पश्चिमी तट के लिए 10 लाख टन और पूर्वी तट के लिए 7 लाख टन यूरिया की खरीद की जाएगी।

टेंडर में कीमतों की कमी

टेंडर में पूर्वी तट के लिए सबसे कम बोली 352.10 डॉलर प्रति टन और पश्चिमी तट के लिए 356.25 डॉलर प्रति टन रही। अगस्त में जारी टेंडर में शुरुआती कीमतें लगभग 390 से 394 डॉलर प्रति टन थीं। इस लिहाज से ताजा टेंडर में कीमतें लगभग 10 प्रतिशत कम हैं। वैश्विक बाजार में कीमतों में नरमी के साथ भारतीय खरीदारों के लिए प्रतिस्पर्धी दरों पर यूरिया हासिल करने की संभावना बढ़ गई है।

सरकार को मिलेगी राहत

आइपीएल के 17 लाख टन के टेंडर के मुकाबले विभिन्न कंपनियों ने करीब 53.5 लाख टन यूरिया की पेशकश की है, जो अपनी जरूरत से तीन गुना से भी अधिक है। यह संकेत देता है कि वैश्विक निर्यातकों के बीच भारतीय बाजार में यूरिया बेचने के लिए प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। हालांकि, आयात सस्ता होने का सीधा लाभ किसानों को नहीं मिलेगा, क्योंकि यूरिया बैग की कीमत सरकार नियंत्रित करती है। इसका लाभ मुख्य रूप से सरकार को उर्वरक सब्सिडी पर होने वाले खर्च में राहत के रूप में मिल सकता है।

किसानों के लिए सब्सिडी का महत्व

यूरिया की कीमतें 959 डॉलर प्रति टन हैं, और किसानों को 45 किलोग्राम यूरिया का बैग 242 रुपये में मिलता है। इसकी लागत और किसानों से मिलने वाली रकम के बीच का अंतर सरकार सब्सिडी के रूप में वहन करती है। इस वर्ष, खाड़ी संकट और आपूर्ति संबंधी बाधाओं के कारण वैश्विक उर्वरक बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव रहा। अप्रैल में यूरिया की कीमतें 959 डॉलर प्रति टन के पार पहुंच गई थीं।

चीन की निर्यात नीति का असर

चीन की निर्यात नीति में बदलाव से वैश्विक बाजार में आपूर्ति का दबाव कुछ कम हुआ है। चीन अपनी घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यूरिया के निर्यात पर समय-समय पर सख्ती करता है और नियंत्रित तरीके से ढील भी देता है। इस बार निर्यात में दी गई ढील से अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्धता बढ़ी और कीमतों को नीचे आने में मदद मिली है।

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