इटावा नगर पालिका के वार्ड नंबर 6 का मामला, दो युवकों पर घर-घर बंद लिफाफे बांटने का आरोप; लिफाफे में रकम मिलने के बाद चुनावी माहौल गरमाया
राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के प्रचार अभियान के बीच कोटा जिले की इटावा नगर पालिका के वार्ड नंबर 6 में मतदाताओं को कथित तौर पर नकदी वाले बंद लिफाफे बांटे जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि दो अज्ञात युवक अलग-अलग घरों में पहुंचे और मतदाताओं को बंद लिफाफे देकर चले गए। जब लोगों ने बाद में लिफाफे खोले तो उनमें 500-500 रुपये के दो नोट यानी कुल 1,000 रुपये मिले। कुछ लिफाफों पर परिवार के सदस्यों के नाम लिखे होने की भी बात सामने आई है। मामला सामने आने के बाद वार्ड के कई मतदाता इटावा के उपखंड अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय पहुंचे और प्रशासन से शिकायत की। मतदाताओं ने पूरे घटनाक्रम की जांच कराने, लिफाफे बांटने वालों की पहचान करने और यह पता लगाने की मांग की कि आखिर यह रकम किसने और किस उद्देश्य से बांटी।
दो युवक घर-घर पहुंचे, बंद लिफाफे देकर हुए रवाना
स्थानीय मतदाताओं के अनुसार, घटना के दौरान दो युवक वार्ड के अलग-अलग मकानों तक पहुंचे। दोनों ने लोगों से ज्यादा बातचीत नहीं की और बंद लिफाफे देकर वहां से निकल गए। शुरुआत में लिफाफे बंद होने के कारण लोगों को यह जानकारी नहीं थी कि उनके भीतर क्या रखा गया है। बाद में जब कुछ लोगों ने लिफाफे खोले तो उनके अंदर 500 रुपये के दो-दो नोट मिले। इस घटना के बाद लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई और देखते ही देखते मामला प्रशासन तक पहुंच गया।
लिफाफे पर परिवार के सदस्य का नाम लिखा था
वार्ड की निवासी कमलेश बाई के अनुसार, दो युवक उनके घर पहुंचे थे। उनमें से एक युवक घर के भीतर आया और उन्हें एक बंद लिफाफा देकर चला गया। महिला का कहना है कि उन्होंने युवकों को पहले कभी नहीं देखा था। बाद में जब लिफाफा खोला गया तो उसमें 500 रुपये के दो नोट मिले। उनके अनुसार, लिफाफे पर उनके परिवार के एक सदस्य का नाम भी लिखा हुआ था। इसी तरह एक अन्य स्थानीय महिला सुगना बाई ने भी लिफाफा मिलने की बात कही। उनके मुताबिक, दो युवक उनके घर के बाहर आए थे। उनमें से एक बाहर खड़ा रहा जबकि दूसरा अंदर आकर लिफाफा देकर चला गया। महिला का दावा है कि युवक ने लिफाफे को संभालकर रखने और मतदान के दिन साथ लेकर आने की बात कही थी। युवकों के जाने के बाद जब लिफाफा खोला गया तो उसमें भी 500 रुपये के दो नोट मिले।
‘मतदान के दिन साथ लेकर आना’ कहने से बढ़ा संदेह
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उस कथित निर्देश को लेकर हो रही है, जिसमें एक मतदाता के अनुसार युवक ने लिफाफे को मतदान के दिन साथ लेकर आने को कहा। इसी वजह से स्थानीय लोगों के बीच यह संदेह गहरा गया कि कहीं नकदी का संबंध मतदाताओं को प्रभावित करने के प्रयास से तो नहीं है। हालांकि, लिफाफे किसने बांटे, रकम किसने उपलब्ध कराई और इसका वास्तविक उद्देश्य क्या था, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे आरोप और शिकायत के रूप में ही देखा जा रहा है।
मतदाता SDM कार्यालय पहुंचे
लिफाफों में नकदी मिलने की जानकारी सामने आने के बाद वार्ड के कई लोग एकजुट होकर SDM कार्यालय पहुंचे। उन्होंने प्रशासन को पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए शिकायत की और मामले की जांच की मांग की। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि नकदी बांटने के आरोपों की गंभीरता से जांच हो। मामले को लेकर प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं।
भाजपा प्रत्याशी पर आरोप, प्रत्याशी ने बताया निराधार
मामले में स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार भाजपा प्रत्याशी मोहम्मद अनीस अहमद पर नकदी वाले लिफाफे बांटने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, अनीस अहमद ने इन आरोपों को निराधार बताया है। इसलिए जब तक प्रशासनिक जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं होती, किसी उम्मीदवार को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। वार्ड नंबर 6 में इस चुनाव में कुल 703 मतदाता हैं और एक मतदान केंद्र है। उपलब्ध चुनावी विवरण के अनुसार यहां पांच उम्मीदवार मैदान में हैं—भाजपा से मोहम्मद हनीस, बहुजन समाज पार्टी से जावेद अख्तर, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से मुकुटबिहारी, कांग्रेस से शहजाद मोहम्मद और निर्दलीय इरफान मोहम्मद।
चुनाव से पहले नकदी वितरण का आरोप गंभीर
चुनावी प्रक्रिया में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए धन या अन्य प्रलोभन दिए जाने का आरोप बेहद गंभीर माना जाता है। नगर निकाय चुनाव भले ही स्थानीय स्तर का चुनाव हो, लेकिन पार्षद का चुनाव सीधे मोहल्लों, सड़कों, सफाई, जलापूर्ति, स्थानीय विकास और नागरिक सुविधाओं से जुड़ा होता है। ऐसे में मतदाता के निर्णय को किसी आर्थिक लाभ के जरिए प्रभावित करने का आरोप चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। इस मामले में खास बात यह है कि कथित तौर पर रकम सीधे घरों तक पहुंचाई गई और वह भी बंद लिफाफों के माध्यम से। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो प्रशासन को यह पता लगाना होगा कि कितने घरों में ऐसे लिफाफे पहुंचाए गए, कुल कितनी रकम वितरित हुई, रकम कहां से आई और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे।
चुनावी माहौल में बढ़ी राजनीतिक हलचल
इटावा नगर पालिका के वार्ड नंबर 6 में सामने आए इस प्रकरण ने चुनावी माहौल को गर्म कर दिया है। एक ओर शिकायतकर्ता मतदाता मामले की जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं आरोपों का सामना कर रहे प्रत्याशी ने इन्हें खारिज किया है। ऐसे में अब निगाहें प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। यह भी महत्वपूर्ण है कि आरोपों की पुष्टि या खंडन केवल राजनीतिक बयानबाजी के आधार पर नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष साक्ष्य, शिकायतकर्ताओं के बयान, बरामद लिफाफे, सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध प्रमाणोंके आधार पर किया जाए।
मतदाताओं की शिकायत के बाद अब प्रशासन की परीक्षा
स्थानीय चुनाव में मतदाता संख्या कम होने के कारण कुछ सौ मत भी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में यदि किसी वार्ड में मतदाताओं को नकदी देने का आरोप सामने आता है तो प्रशासन के लिए उसकी जांच और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह मामला शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। प्रशासनिक जांच में यदि यह साबित होता है कि चुनाव को प्रभावित करने के उद्देश्य से नकदी वितरित की गई थी, तो संबंधित लोगों के खिलाफ चुनावी और कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। वहीं यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि स्थानीय चुनावों में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए धन के इस्तेमाल पर निगरानी कितनी प्रभावी है। अब देखना होगा कि इटावा प्रशासन इस शिकायत की जांच कितनी तेजी और पारदर्शिता से करता है और नकदी वाले लिफाफों के पीछे की वास्तविक कहानी सामने आती है या नहीं।
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