क्लासरूम में AI की एंट्री, गणित-साइंस की पढ़ाई होगी आसान; 22 स्कूलों के शिक्षकों ने सीखा तकनीक का सही इस्तेमाल

The CSR Journal Magazine
शिक्षा के बदलते दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ कंप्यूटर और तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है। उत्तर प्रदेश के मेरठ में CBSC की ओर से आयोजित जिला स्तरीय कार्यशाला में शिक्षकों ने जाना कि AI का इस्तेमाल कक्षा में किस तरह किया जा सकता है और इससे विद्यार्थियों के लिए मुश्किल विषयों को आसान और रोचक कैसे बनाया जा सकता है। मेरठ पब्लिक स्कूल मेन विंग कैंट और राधागोविंद पब्लिक स्कूल, गढ़ रोड में ‘कंप्यूटेशनल थिंकिंग एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को समझना’ विषय पर कार्यशाला-सह-प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें शहर के अलग-अलग स्कूलों के शिक्षकों ने हिस्सा लिया।

22 स्कूलों के 47 शिक्षकों ने लिया हिस्सा

राधागोविंद पब्लिक स्कूल में हुई कार्यशाला में 22 विद्यालयों के 47 शिक्षकों ने भाग लिया। इनमें से 10 स्कूलों के 11 शिक्षकों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। शिक्षकों ने बताया कि AI आधारित डिजिटल टूल्स की मदद से विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया को अधिक सरल और प्रभावी बनाया जा सकता है। शोधपत्रों में सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और व्यक्तिगत अधिगम जैसे विषयों को AI से जोड़ने के अलग-अलग तरीके सामने रखे गए। शिक्षकों ने अपने अनुभवों के जरिए बताया कि तकनीक का सही इस्तेमाल विद्यार्थियों को विषय समझने के साथ-साथ नए तरीके से सोचने में भी मदद कर सकता है।

गणित और विज्ञान जैसे मुश्किल विषयों पर फोकस

कार्यशाला में खास तौर पर इस बात पर चर्चा हुई कि AI और डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल गणित, विज्ञान और दूसरे कठिन विषयों के कॉन्सेप्ट समझाने में कैसे किया जा सकता है। शिक्षकों ने विभिन्न AI आधारित एप्लीकेशन और डिजिटल टूल्स के इस्तेमाल के उदाहरण साझा किए। इससे विद्यार्थियों को केवल किताबों पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग तरीकों से किसी विषय को समझने और उसके बारे में सवाल पूछने का मौका मिल सकता है। हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी साफ किया कि AI को शिक्षक के विकल्प के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसका उद्देश्य शिक्षक की जगह लेना नहीं, बल्कि पढ़ाने के तरीके को अधिक प्रभावी, रचनात्मक और विद्यार्थी-केंद्रित बनाना है।

शिक्षकों ने प्रस्तुत किए AI पर शोधपत्र

मेरठ पब्लिक स्कूल मेन विंग में हुई जिला स्तरीय प्रतियोगिता में भी कई विद्यालयों के शिक्षकों ने भाग लिया। इनमें सेंट फ्रांसिस वर्ल्ड स्कूल, पीजीएम इंटरनेशनल स्कूल, दीवान पब्लिक स्कूल, मेरठ पब्लिक स्कूल वेदव्यासपुरी, मेरठ पब्लिक स्कूल मेन विंग, आरएन इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, मेरठ पब्लिक स्कूल फॉर गर्ल्स कैंट और डीपीएस मेरठ सहित कई स्कूल शामिल रहे। प्रतिभागियों ने AI के शैक्षिक उपयोग, वास्तविक जीवन में इसके इस्तेमाल, नवाचार और तकनीक के नैतिक एवं जिम्मेदार उपयोग पर प्रस्तुतियां दीं। शोधपत्रों का मूल्यांकन विषय-वस्तु, मौलिकता, तार्किकता, प्रस्तुतीकरण और प्रासंगिकता के आधार पर किया गया।

इन शिक्षकों के शोधपत्र चुने गए

मेरठ पब्लिक स्कूल मेन विंग में शैली गुप्ता, नेहा छाबड़ा और दीवान पब्लिक स्कूल की ज्योति छाबड़ा के शोधपत्र श्रेष्ठ तीन में चुने गए। इन्हें आगे सीबीएसई को भेजा जाएगा। राधागोविंद पब्लिक स्कूल में शोधपत्र प्रस्तुति में मेरठ सिटी पब्लिक स्कूल की चेतना गौतम ने पहला, द आर्यन्स की नीतू चौहान ने दूसरा और एमआइईटी जागृति विहार की करुणा शर्मा ने तीसरा स्थान हासिल किया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र दिए गए।

AI के साथ कंप्यूटेशनल थिंकिंग पर भी जोर

कार्यशाला में सिर्फ AI के इस्तेमाल की जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि कंप्यूटेशनल थिंकिंग को भी महत्वपूर्ण बताया गया। इसके तहत विद्यार्थियों में किसी समस्या को समझने, उसे छोटे हिस्सों में बांटने, तार्किक तरीके से समाधान खोजने और बेहतर निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले समय में विद्यार्थियों के लिए केवल तकनीकी जानकारी पर्याप्त नहीं होगी। उनमें तार्किक चिंतन, समस्या समाधान, रचनात्मकता और तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल की समझ भी विकसित करनी होगी।

शिक्षा में AI का बढ़ता इस्तेमाल

CBSC की इस पहल से यह संकेत मिलता है कि स्कूलों में तकनीक आधारित शिक्षा का दायरा लगातार बढ़ रहा है। AI के जरिए शिक्षकों को विद्यार्थियों की अलग-अलग सीखने की जरूरतों को समझने और उनके अनुरूप पढ़ाने के नए तरीके मिल सकते हैं। सीबीएसई के जिला प्रशिक्षण समन्वयक और केएल इंटरनेशनल स्कूल के प्रधानाचार्य डा. सुधांशु शेखर समेत कई शिक्षाविद और प्रधानाचार्य कार्यक्रम में मौजूद रहे। मेरठ पब्लिक स्कूल मेन विंग की प्रधानाचार्या डा. अलका श्रीवास्तव गौड़ ने कहा कि ऐसे आयोजन शिक्षकों को भविष्य की शिक्षा की जरूरतों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण हैं। राधागोविंद पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या संगीता कश्यप ने भी कहा कि दैनिक जीवन और पढ़ाई-लिखाई में AI की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में शिक्षकों के लिए AI को समझना और उसका सही इस्तेमाल सीखना समय की जरूरत बन गया है।

क्लासरूम में AI का मतलब क्या?

इस कार्यशाला का सबसे अहम संदेश यही रहा कि AI को शिक्षक का विकल्प नहीं, बल्कि शिक्षक का सहयोगी बनाया जाए। सही तरीके से इस्तेमाल होने पर AI कठिन कॉन्सेप्ट को आसान भाषा में समझाने, विद्यार्थियों की जिज्ञासा बढ़ाने और सीखने के नए तरीके विकसित करने में मदद कर सकता है। आने वाले समय में स्कूलों में AI आधारित पढ़ाई और इससे जुड़ी शिक्षक ट्रेनिंग का दायरा और बढ़ने की उम्मीद है।

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