नारी शक्ति से अर्थशक्ति: Uttar Pradesh में महिलाओं का बदलता सफर

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश में नारी की स्थिति पर एक प्रश्न उठता है कि क्या उसे केवल सम्मान की दृष्टि से देखा जाए? दरअसल, नारी को निर्माण की शक्ति के रूप में देखने से प्रदेश की विकास प्रक्रिया में सार्थक बदलाव आ सकता है। किसी भी समाज का असली विकास इस बात से होता है कि उसकी आधी आबादी किस हद तक सक्रिय भागीदार है। जब महिलाएं खेती, उद्योग, कार्यालय और स्टार्टअप में अपनी पहचान बनाती हैं, तब न केवल उनके जीवन में बदलाव आता है, बल्कि पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी बदलती है। योगी सरकार के पिछले साढ़े नौ वर्षों में महिलाओं की श्रम भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि इस दिशा में एक बड़ा उदाहरण है।

सभ्य समाज की जरूरत

उत्तर प्रदेश में नारी शक्ति के आंकड़े केवल रोजगार तक ही सीमित नहीं हैं। यह उस सामाजिक चेतना का भी विस्तार करते हैं, जिसमें महिलाएं परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भागीदार बन रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। स्वयं सहायता समूहों से लेकर डिजिटलीकरण तक, महिलाओं की उपस्थिति हर क्षेत्र में बढ़ी है। यह परिवर्तन दर्शाता है कि यदि उन्हें उचित अवसर, सुरक्षा, और कौशल मिलें, तो वे केवल घर तक सीमित नहीं रहकर अर्थव्यवस्था को भी आगे बढ़ा सकती हैं।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम

राज्य में नारी PoV को सशक्त किया जा रहा है। हाल ही में वाराणसी में आयोजित कामकाजी महिला सम्मान समारोह में 10,000 से अधिक महिलाएं शामिल हुई थीं। इनमें आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, रसोइया और आशा वर्कर जैसी महिलाएं शामिल थीं, जो समाज की बुनियाद को सींचती रही हैं। आज उनकी पहचान सामाजिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से मजबूत हो चुकी है। प्रदेश में महिला श्रमबल की भागीदारी 12 प्रतिशत से 36 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो किसी एक योजना का परिणाम नहीं है। यह शिक्षा, सुरक्षा और अवसर की एक समन्वित प्रक्रिया का फल है।

बेटियों का सपना, राज्य की जिम्मेदारी

किसी भी बेटी का सपना केवल इसलिए अधूरा नहीं रहना चाहिए कि वह गरीब परिवार में जन्मी है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, अटल आवासीय विद्यालय और अन्य योजनाओं को इसी सोच के तहत लागू किया गया है। इन योजनाओं का उद्देश्य बेटियों को हर मोड़ पर सहारा देना है और उन्हें मुख्यधारा का हिस्सा बनाना है। सुरक्षा के मुद्दे को भी ध्यान में रखा गया है; महिला पुलिसकर्मियों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता का सफर

महिलाओं के लिए लखपति दीदी और ड्रोन दीदी जैसी पहलों ने उन्हें पारंपरिक दायरों से बाहर निकालकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है। अब महिलाएं उत्पादन और सेवाओं में भी अपनी जगह बना रही हैं। प्रोजेक्ट गंगा के तहत, 8 हजार न्याय पंचायतों में महिला उद्यमियों को तैयार करने के लिए योजनाएँ बनाई गई हैं। यह नई भूमिका उन्हें उपभोक्ता से उत्पादक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

संभावनाओं के नए आयाम

सरकार की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 5 लाख से अधिक बेटियों का विवाह संपन्न किया गया है। इसके साथ, कई महिलाओं को अपने घरों में मालिकाना हक मिला है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। खेल के मैदान से लेकर अंतरिक्ष तकनीक तक, महिलाओं की प्रतिभा अब हर क्षेत्र में दिखाई दे रही है। यह केवल एक बदलाव नहीं है, बल्कि वह सोच भी है जो समाज के हर पहलू को सकारात्मक रूप से बदल सकती है।

भविष्य की ओर एक नया संकेत

उत्तर प्रदेश की महिलाओं का यह सफर अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्हें और भी अधिक अवसर और सुरक्षा की जरूरत है। जब तक हर महिला खुद को सुरक्षित नहीं महसूस करती, तब तक उन्हें शिक्षा और रोजगार का लाभ अधूरा ही रहेगा। यह परिवर्तन उस विश्वास की कहानी है, जो धीरे-धीरे और नीति दर नीति बुनी गई है। महिलाओं की क्षमता को अब परंपागत सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता।

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