टीईटी पास करो या नौकरी छोड़ो! सुप्रीम कोर्ट के आदेश से 1500 शिक्षकों की बढ़ी चिंता, जानिए पूरा मामला

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में परिषदीय स्कूलों के 1500 से अधिक शिक्षकों के सामने अब TET पास करने की चुनौती खड़ी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ऐसे सेवारत शिक्षकों को दो साल के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी पास करनी होगी, जो तय शर्तों के दायरे में आते हैं।

1500 से ज्यादा शिक्षक बिना टीईटी के

हाथरस में कुल 1,236 परिषदीय स्कूल हैं। इनमें करीब 5,500 शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं। विभाग के अनुमान के मुताबिक इनमें 1,500 से अधिक ऐसे शिक्षक हैं, जिन्होंने अभी तक टीईटी पास नहीं किया है। शिक्षा विभाग अब ऐसे शिक्षकों की जानकारी जुटाकर सूची तैयार कर रहा है। इसके बाद पात्र शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार टीईटी पास करना होगा।

किन शिक्षकों को देना होगा टीईटी?

यह नियम मुख्य रूप से उन शिक्षकों पर लागू होगा, जिन्हें 1 अप्रैल 2010 से पहले नियुक्ति मिली थी और जिनकी सेवानिवृत्ति में पांच साल से अधिक समय बाकी है। ऐसे शिक्षकों को दो साल के भीतर टीईटी पास करना होगा। अगर वे निर्धारित अवधि में परीक्षा पास नहीं करते हैं तो उनकी नौकरी जारी रखने पर संकट आ सकता है। वहीं जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच साल से कम समय बचा है, उनके लिए इस मामले में अलग प्रावधान है।

बच्चों को पढ़ाएं या टीईटी की तैयारी करें?

टीईटी की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों में नाराजगी बढ़ रही है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि स्कूल में पढ़ाने के अलावा शिक्षकों से कई दूसरे सरकारी काम भी कराए जाते हैं। शिक्षक आलोक कुमार के मुताबिक चुनाव से जुड़े काम, मतदाता सूची और अलग-अलग सरकारी ऐप पर सूचनाएं अपलोड करने जैसे कामों में काफी समय चला जाता है। ऐसे में शिक्षकों के सामने सवाल है कि वे बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दें या टीईटी की तैयारी करें।

शिक्षक संगठनों ने उठाई विरोध की आवाज

शिक्षक संगठनों ने सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने की मांग की है। अटेवा के जिला महामंत्री रविकांत वर्मा का कहना है कि इससे पहले से सेवा कर रहे शिक्षकों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है। SC-ST शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सोहन सिंह ने कहा कि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति कुछ ही साल दूर है, उनके लिए दोबारा परीक्षा की तैयारी करना बड़ी परेशानी है। उन्होंने आदेश वापस लेने की मांग की। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुरेश कुमार शर्मा ने भी सरकार से इस व्यवस्था पर दोबारा विचार करने की मांग की है।

शिक्षा विभाग ने शुरू की सूची बनाने की तैयारी

प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गिरिराज सिंह ने बताया कि शिक्षक सेवा के लिए टीईटी जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार इसका पालन कराया जा रहा है। विभाग की ओर से ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार कराई जा रही है, जिन्होंने अभी तक टीईटी पास नहीं किया है। इसके बाद पात्र शिक्षकों को निर्धारित समय में परीक्षा पास करनी होगी।

1.30 लाख बच्चों पर भी असर

हाथरस के परिषदीय स्कूलों में करीब 1.30 लाख बच्चे पढ़ रहे हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू होने से स्कूलों की व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। शिक्षक संगठन जहां इसे सेवारत शिक्षकों के लिए परेशानी बता रहे हैं, वहीं शिक्षा विभाग इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत जरूरी प्रक्रिया मान रहा है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच इस मुद्दे पर आगे क्या रास्ता निकलता है।

शिक्षकों के सामने अब क्या चुनौती?

फिलहाल शिक्षा विभाग TET नहीं पास करने वाले शिक्षकों की सूची तैयार कर रहा है। पात्र शिक्षकों को दो साल का समय दिया गया है। इस अवधि में टीईटी पास करना उनके लिए जरूरी होगा। दूसरी ओर शिक्षक संगठन अनिवार्यता हटाने की मांग को लेकर अपना विरोध जारी रखने की तैयारी में हैं।

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