शिवानी मेहरोत्रा: ‘उम्र के साथ सपने धुंधले नहीं पड़ते’, 43 साल की उम्र में चढ़ी माउंट एल्ब्रुस

The CSR Journal Magazine
43 साल की शिवानी मेहरोत्रा ने साबित किया है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। ये चित्रण तब और रोचक हो जाता है जब वह अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश करती हैं। सीतापुर की निवासी शिवानी ने हाल ही में रूस स्थित यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराया। यह उपलब्धि उनके मजबूत इरादों और हौसले की कहानी बयां करती है।

पर्वतारोहण का सफर

शिवानी का पर्वतारोहण का सफर सरल नहीं रहा। पारिवारिक दायित्वों और रोजमर्रा की चुनौतियों के बीच उन्हें अपने जुनून को जीवित रखना पड़ा। वह बताती हैं कि यह सपना हमेशा उनके दिल में था, लेकिन इसे पूरा करने की हिम्मत उन्होंने हाल ही में जुटाई। प्रशिक्षण और कठोरता के साथ-साथ, वह हर कदम पर अपने परिवार का समर्थन पाती रहीं। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा नहीं रुक सकती।

माउंट एल्ब्रुस का सफर

माउंट एल्ब्रुस पर चढ़ाई के दौरान शिवानी ने अनुभव किया कि मानसिक और शारीरिक मजबूती कितनी महत्वपूर्ण होती है। चोटी की ओर बढ़ते समय उन्होंने कई कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन अपने लक्ष्य को हासिल करने की जोश ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस सफर के दौरान उन्हें न केवल खुद पर विश्वास हुआ, बल्कि यह भी पता चला कि उम्र से कुछ नहीं होता। उन्होंने अपने लिए एक नया मानक स्थापित किया है।

परिवार का समर्थन

शिवानी का कहना है कि परिवार का समर्थन उनके लिए सबसे बड़ा बल रहा है। उन्होंने अपने पति और बच्चों का आभार जताते हुए कहा कि उनका परिवार हमेशा उनकी सफलता के लिए प्रेरणा रहा है। उनका समर्थन ही उन्हें इस यात्रा पर बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहा। उनका यह जज़्बा हर महिला को यह समझाने के लिए काफी है कि उम्र का कोई मतलब नहीं होता, अगर सपने सच्चे हैं।

प्रेरणा के स्रोत

शिवानी मेहरोत्रा ने अपनी उपलब्धियों से यह संदेश दिया है कि मेहनत और लगन से सपनों को साकार किया जा सकता है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उन्हें, बल्कि उनकी जैसी अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया है कि वे अपने ख्वाबों को साकार करने के लिए कभी भी देर नहीं होती।

वापसी पर खुशी का माहौल

माउंट एल्ब्रुस से लौटने के बाद शिवानी का जोश और बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि अब वह अन्य महिलाओं को भी पर्वतारोहण के लिए प्रेरित करेंगी। उनकी कहानी से एक नया संदेश मिलता है कि सपने बड़े हों, तो उन्हें पूरा करने का जुनून भी बड़ा होना चाहिए। शिवानी के इस सफर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उम्र का कोई बंधन नहीं होता।

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