राष्ट्रपति मुर्मू ने वापस किया बंगाल का गुंडा दमन विधेयक; शुभेंदु अधिकारी के दावों पर उठे सवाल

The CSR Journal Magazine

बंगाल सरकार को बड़ा झटका: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गंभीर आपत्तियों के साथ लौटाया ‘एंटी-गुंडा बिल’, केंद्रीय कानून से टकराव बनी वजह

पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार द्वारा पारित किए गए बहुचर्चित और महत्वाकांक्षी ‘एंटी-गुंडा बिल’ (गुंडा दमन विधेयक) को मंजूरी देने से साफ इनकार कर दिया है। राष्ट्रपति ने इस प्रस्तावित कानून पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे पुनर्विचार के लिए राज्य सरकार को वापस लौटा दिया है। इस फैसले को पश्चिम बंगाल की मौजूदा सरकार के लिए एक बहुत बड़ा विधाई और राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

केंद्रीय कानूनों से टकराव बना मुख्य कारण

इस सख्त कानून के वापस होने के पीछे की मुख्य वजह इसका केंद्रीय कानूनों के साथ सीधा विरोधाभास होना बताया जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से इस विधेयक की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित इस कानून की कुछ महत्वपूर्ण धाराएं और प्रावधान, केंद्र के नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985 तथा PITNDPS एक्ट के साथ सीधे तौर पर टकरा रहे हैं। भारतीय संविधान के नियमों के मुताबिक, यदि किसी राज्य का कानून केंद्र सरकार के पहले से मौजूद किसी अधिनियम या कानून का उल्लंघन या उससे असंगति प्रदर्शित करता है, तो उसे संवैधानिक मंजूरी नहीं दी जा सकती। इसी कानूनी अड़चन को आधार बनाकर राष्ट्रपति भवन ने इस पर अपनी आपत्ति दर्ज की है।

क्या था ‘पश्चिम बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026’?

राज्य में समाज-विरोधी तत्वों, गुंडागर्दी और संगठित अपराध पर लगाम लगाने के इरादे से शुभेंदु अधिकारी सरकार ने जून 2026 में विधानसभा में ‘पश्चिम बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026’ पेश किया था। इस बिल में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और ‘प्रिवेंटिव अरेस्ट’ (एहतियाती गिरफ्तारी) जैसे बेहद कड़े प्रावधान शामिल किए गए थे। बिल के पेश होने के समय से ही विपक्ष ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और आशंका जताई थी कि सरकार इस कानून का इस्तेमाल अपने राजनीतिक विरोधियों को कुचलने के लिए कर सकती है। हालांकि, उस समय मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विपक्ष और जनता को सार्वजनिक रूप से भरोसा दिलाया था कि इस कानून का इस्तेमाल किसी भी तरह की राजनीतिक बदले की भावना से नहीं किया जाएगा और कानून पूरी तरह निष्पक्षता से काम करेगा।

शुभेंदु अधिकारी के दावों पर उठे गंभीर सवाल

राष्ट्रपति द्वारा बिल लौटाए जाने के बाद अब शुभेंदु अधिकारी के उन दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं जो उन्होंने पिछले दिनों किए थे। अधिकारी ने कई मौकों पर सार्वजनिक मंचों और विधानसभा के भीतर यह दावा किया था कि ‘गुंडा दमन बिल’ को महामहिम राज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी है और यह पूरी तरह से कानून का रूप ले चुका है। इतना ही नहीं, उन्होंने विधानसभा सत्र के दौरान यह भी कहा था कि 24 जुलाई को कोलकाता के एस्प्लेनेड में हुए एक विरोध मार्च के दौरान हिंसा भड़काने की साजिश रचने वाले आरोपियों के खिलाफ इसी ‘गुंडा दमन एक्ट’ के तहत कार्रवाई की गई है। लेकिन अब राज्य सरकार द्वारा हाई कोर्ट में दी गई आधिकारिक जानकारी और राष्ट्रपति द्वारा बिल को वापस किए जाने की खबर ने यह साफ कर दिया है कि यह विधेयक कभी कानून बना ही नहीं था।

अब आगे क्या होगा?

राष्ट्रपति के इस कदम के बाद अब गेंद एक बार फिर पश्चिम बंगाल सरकार के पाले में है। यदि सरकार इस कानून को लागू करना चाहती है, तो उसे उन सभी धाराओं और प्रावधानों को हटाना या संशोधित करना होगा, जिन पर केंद्र सरकार और राष्ट्रपति भवन ने आपत्ति जताई है। संशोधनों के बाद इस विधेयक को दोबारा विधानसभा से पास कराकर राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजना होगा।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से विपक्षी दलों को सरकार को घेरने का एक बड़ा मुद्दा मिल गया है, खासकर उन दावों को लेकर जो सरकार द्वारा इस बिल के कानून बनने के संदर्भ में किए जा रहे थे।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos