‘मन की बात’ में PM मोदी ने की थी निंगम्मा के काम की तारीफ… अब रोजगार खत्म होने की नौबत!

The CSR Journal Magazine
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ में बेंगलुरु की स्ट्रीट वेंडर टीएस निंगम्मा की कठिनाइयों और सफलता की कहानी साझा की थी। इस कार्यक्रम में उन्होंने निंगम्मा के व्यवसाय को बढ़ाने में सरकारी सहायता की महत्ता बताई थी। लेकिन अब निंगम्मा इस बात से चिंतित हैं कि उन्हें अपने ठेले को हटा देने के लिए कहा गया है। जीबीए (Greater Bengaluru Authority) के अधिकारियों ने उन्हें चेतावनी दी है कि मेट्रो स्टेशन के नजदीक फुटपाथ से उन्हें हटना होगा।

जीवनयापन का संकट

सीधी सच्चाई यह है कि अगर निंगम्मा का ठेला हटा दिया गया, तो उनके परिवार का जीवन कैसे चलेगा? बेंगलुरु में मगदी रोड पर होसाहल्ली मेट्रो स्टेशन के पास अपना ठेला लगाकर वह इडली, डोसा और सांभर बेचती हैं। अब वह अपने और अपने परिवार के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। निंगम्मा के लिए यह सब आसान नहीं है। उनके मन में सवाल हैं कि जब उनका व्यवसाय होगा ही नहीं, तो वे अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च कैसे उठाएंगी?

सरकारी मदद से मजबूती

पीएम स्वनिधि योजना के तहत उन्हें जो सहायता मिली, उससे निंगम्मा और उनके पति ने अपने छोटे से व्यवसाय की शुरुआत की। पहले उनकी स्थिति कमजोर थी, लेकिन इस योजना की सहायता से उन्होंने अपने व्यवसाय को बढ़ाने में सफलता पाई है। हालांकि, पूंजी की कमी उनके लिए बाधा बनी रही, लेकिन फिर भी उनके व्यवसाय में बढ़ोतरी हुई है।

आर्थिक स्थिति में सुधार

ग्राहकों की मदद से उनके व्यवसाय में वृद्धि हुई और इसी के साथ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हुई। पीएम मोदी ने अपनी बात में कहा कि निंगम्मा अब अपनी आय से अपने तीन बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पा रही हैं। यह कहानी यह बताती है कि किस तरह एक महिला का साहस और मेहनत उसके पूरे परिवार के लिए खुशहाली लाने का साधन बन सकता है।

महिलाओं की सफलता की कहानी

पीएम ने बताया कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत लाभार्थियों में करीब 46 प्रतिशत महिलाएं हैं। पूरे देश में लगभग 35 लाख महिलाएं इस योजना का लाभ लेकर अपने छोटे व्यवसायों का विस्तार कर रही हैं। यह स्पष्ट है कि इस योजना ने महिलाओं के लिए नई संभावनाएं खोली हैं, लेकिन अब निंगम्मा जैसे लोगों को नए संकट का सामना करना पड़ रहा है।

भविष्य की चिंता

जब से निंगम्मा को ठेला हटाने की चेतावनी मिली है, उनके समर्पण और मेहनत की कहानी का सकारात्मक असर अब खतरे में पड़ गया है। कैसे वह इस स्थिति से बाहर निकलेंगी, यह सबसे बड़ा प्रश्न है। उनके परिवार की आय का मुख्य स्रोत इस समय उनके ठेले पर निर्भर है। ऐसे में यह देखना होगा कि प्रशासन उनकी समस्या का कैसे समाधान करता है।

किसान की मेहनत का फल

जहां एक ओर पीएम मोदी ने उनकी कहानी को सफलता का प्रतीक माना, वहीं अब निंगम्मा को अपनी जीविका बचाने के लिए नई राहें तलाशनी होंगी। पिछले कई सालों में उन्होंने अपने मेहनत से जो कुछ भी अर्जित किया है, अब वह सब खतरे में है। यह केवल उनके लिए नहीं बल्कि उन सभी के लिए चिंता का विषय है जो छोटे व्यवसाय पर निर्भर हैं।

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