सहारनपुर: लाखों का पैकेज और जज की कुर्सी छोड़कर बनीं जैन साध्वी, सात युवतियों का अनोखा संकल्प

The CSR Journal Magazine
सहारनपुर की सात युवतियों ने सांसारिक सुख-सुविधाओं को छोड़कर जैन साध्वी बनने का संकल्प लिया है। इनमें से कुछ ने लाखों रुपये के पैकेज वाले करियर को अलविदा कहा है, जबकि अन्य ने विदेश में पढ़ाई और जज बनने की प्रतिष्ठा को छोड़कर साधना का मार्ग चुना। रविवार को सहारनपुर के जैन बाग मंदिर में इन युवतियों की बिनौली यात्रा और पारंपरिक गोद भराई की रस्म का आयोजन किया गया। इस मौके पर परिवार वालों और जैन समाज के लोगों ने उन्हें दीक्षा के लिए शुभकामनाएं दीं।

गर्व और आंसू: परिवार की भावनाएं

इस विशेष अवसर पर कुछ परिवारों में गर्व की भावना थी, जबकि कुछ की आंखों में विदाई की कल्पना से आंसू थे। सातों दीक्षार्थी बहनें मांगलिक कलश और होठों पर णमोकार महामंत्र के साथ बिनौली यात्रा पर निकलीं। जैन समाज की महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से उनकी गोद भराई की। इस आयोजन में दूर-दूर से बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग शामिल हुए।

रंगोली जैन: CA से साध्वी बनने की यात्रा

रंगोली जैन की कहानी इस वैराग्य यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी की पढ़ाई पूरी करने के बाद करीब 10 साल तक कोलकाता में पेशेवर जीवन बिताया। अच्छे वेतन और करियर के बावजूद, उन्होंने सांसारिक जीवन से दूरी बना ली और साधना का रास्ता चुना। रंगोली ने 19 नवंबर 2017 को आचार्य सुपार्श्व सागर से आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लिया था। इसके बाद से वह संतों और माताजी के सानिध्य में रहकर साधना कर रही थीं।

प्रखरश्री: लंदन में जज बनने वाली साध्वी

मध्य प्रदेश के बैतूल में जन्मी प्रखरश्री ने बीए-एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने लंदन में कानून की पढ़ाई की और जज बनीं। लेकिन उन्होंने अपने करियर को छोड़कर दीक्षा लेने का निर्णय लिया। वह 9 जुलाई 2020 से ब्रह्मचर्य का पालन कर रही हैं।

अन्य दीक्षार्थियों की विशेषताएं

अन्य दीक्षार्थियों में मध्य प्रदेश के भिंड की गिरजा, ग्वालियर की सोनम, बैतूल जिले की चेतना, सहारनपुर की सुनीता और दिल्ली की बबली शामिल हैं। गिरजा ने वर्ष 2020 से ब्रह्मचर्य व्रत का पालन किया है। सोनम ने फाइन आर्ट्स में एमए किया है, जबकि चेतना ने 12वीं तक शिक्षा प्राप्त की है। चेतना ने 20 फरवरी 2022 को गणाचार्य विराग सागर से ब्रह्मचर्य व्रत लिया था।

दीक्षा समारोह का आयोजन

जैन समाज के अध्यक्ष राजेश कुमार जैन ने बताया कि सभी युवतियां 22 नवंबर को मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध जैन तीर्थस्थल सोनागिरि सिद्धक्षेत्र में आयोजित श्रमणी आर्यिका दीक्षा महोत्सव में दीक्षा ग्रहण करेंगी। इससे पहले विभिन्न स्थानों पर उनके सम्मान में धार्मिक कार्यक्रम और बिनौली आयोजित की जाएंगी।

जैन साध्वी जीवन का कठोर अनुशासन

जैन परंपरा में दीक्षा के बाद साध्वी जीवन कठोर अनुशासन, संयम और तपस्या से जुड़ा होता है। दीक्षा लेने के बाद साध्वियों को पैदल विहार करना होगा और वे वाहनों का इस्तेमाल नहीं करेंगी। पानी ग्रहण करने से लेकर दैनिक आहार-विहार तक उन्हें निर्धारित धार्मिक नियमों का पालन करना होगा। दीक्षा की प्रक्रिया में केस लोच भी शामिल है, जो शरीर के प्रति मोह त्यागने का प्रतीक माना जाता है।

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