वर्दी से बुटिक तक: पूर्व महिला एयरफोर्स अधिकारी ने चुना देहरादून में कपड़ों का बिजनेस

The CSR Journal Magazine

14 साल की एयरफोर्स सेवा छोड़कर बुटिक चलाने लगीं महिला अधिकारी, जानें वजह!

भारतीय वायुसेना की पूर्व महिला अधिकारी ऐश्वर्या ने देश की गौरवशाली सेवा में 14 साल बिताने के बाद अपने होमटाउन देहरादून में एक कपड़ों का बुटिक (क्लॉथिंग ब्रांड) शुरू किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर इस बदलाव के पीछे की मुख्य वजह का खुलासा किया है, जो किसी बड़े व्यावसायिक सपने के कारण नहीं, बल्कि अपने परिवार, बच्चों और बुजुर्ग होते माता-पिता के साथ समय बिताने का एक भावनात्मक निर्णय था।उन्होंने बताया कि उनके बुटिक पर आने वाले ग्राहक अक्सर उनसे अचरज के साथ पूछते हैं कि एक प्रतिष्ठित एयरफोर्स ऑफिसर से वह अचानक ‘बुटिक वाली आंटी’ कैसे बन गईं?

मिशन से परिवार की ओर

एक समय था जब वे भारतीय वायु सेना की वर्दी पहने उड़ान भरती थीं। अब, देहरादून में उन्होंने एक बुटिक की शुरुआत की है। यह सफर आसान नहीं था, लेकिन परिवार के प्रति उनकी जिम्मेदारी ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। 14 वर्षों तक सेवा देने के बाद, एक पूर्व महिला अधिकारी ने करियर में बदलाव का पैसला किया, ताकि अपने बच्चों और माता-पिता के साथ अधिक समय बिता सकें।

बिजनेस नहीं, भावनाओं का जुड़ाव

महिला अधिकारी ने बताया कि बुटिक खोलने का मकसद सिर्फ बिजनेस करना नहीं था, बल्कि अपने परिवार के करीब रहने की इच्छा थी। वायु सेना की नौकरी में लगे समय के दौरान, उन्होंने अपने परिवार के साथ समय बिताने में कमी महसूस की। यही वजह है कि अब वो अपने हुनर के जरिए कपड़ों का व्यापार कर रही हैं।

देहरादून में बुटिक की शुरुआत

देहरादून में बुटिक खोलने के पीछे उनका लक्ष्य केवल कपड़ों का व्यापार नहीं है, बल्कि स्थानीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देना भी है। उनका बुटिक विभिन्न प्रकार के पारंपरिक और मॉडर्न कपड़ों की पेशकश कर रहा है। इसी के साथ, वे उन महिलाओं को भी रोजगार देने का प्रयास कर रही हैं, जो संघर्ष कर रही हैं।

समाज में सकारात्मक बदलाव

उनकी कहानी न केवल परिवार के प्रति प्यार की मिसाल पेश करती है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का भी एक प्रयास है। पूर्व अधिकारी का मानना है कि जब महिलाएं अपने सपनों को साकार करती हैं, तो वे अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन सकती हैं। उनका बुटिक केवल एक दुकान नहीं है, बल्कि एक नया संदेश है कि कभी भी सपने देखने में देर नहीं होती।

सपनों की उड़ान

एयरफोर्स से लेकर बुटिक तक का सफर आसान नहीं रहा। लेकिन उन्होंने कभी भी हार नहीं मानी। उनका अनुभव बताता है कि किस तरह से एक महिला अपनी पहचान और अपने सपनों को एक साथ लेकर चल सकती है। इस बदलाव के साथ ही उनकी जिंदगी ने नया मोड़ ले लिया है। अब वे अपने बच्चों के साथ ज्यादा समय बिता पाने में सक्षम हैं और अपने कार्य में भी संतोष और खुशी महसूस कर रही हैं।

समाज की नजर में

उन्होंने अपनी प्रेरणा और संघर्ष से साबित किया है कि जब निर्णय सही हो, तो परिणाम भी सकारात्मक होते हैं। अब उन्हें न केवल उनके परिवार बल्कि समाज में भी बहुत सराहना मिल रही है। उनके इस परिवर्तन ने कई अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया है कि वे अपने सपनों को पूरा करने के लिए कभी भी नए रास्तों का चुनाव कर सकती हैं।

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