Karnataka में डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ, प्रणाम के साथ मिली खुशी

The CSR Journal Magazine
2023 में कांग्रेस की जीत के पीछे डीके शिवकुमार की मेहनत रही है। उन्होंने पार्टी को एकजुट रखा और जेडीएस के साथ अच्छे संबंध बनाए। अब सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद आलाकमान की नजरें डीके पर हैं। बेशक, यह समय था जब सिद्धारमैया ने ढाई साल का कार्यकाल पूरा किया। उनके इस्तीफे के बाद यह स्पष्ट है कि डीके शिवकुमार जल्द ही मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे। कर्नाटक में मिलकर शासन करने की परंपरा को देखें तो 1995 में शुरू हुई थी, जो अब तक चल रही है।

खुशियों का इजहार

सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद डीके शिवकुमार और उनके समर्थक खुशी मनाने लगे। इस्तीफे की घोषणा के समय उन्होंने सिद्धारमैया के चरण स्पर्श किए और दोनों के बीच गले मिलने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर छा गईं। कांग्रेस आलाकमान के लिए यह एक बड़ी जीत है, क्योंकि लंबे समय से चली आ रही कलह को समाप्त किया जा सका। 2023 में कर्नाटक में कांग्रेस की जीत का क्रेडिट डीके शिवकुमार को जाता है।

कांग्रेस की नई चुनौतियाँ

हालांकि, नई सरकार को कुछ चुनौतियों का सामना भी करना होगा। कांग्रेस को नए प्रदेश अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री के लिए विभिन्न दावेदारों को संतुष्ट करना होगा। प्रमुख दावेदार प्रियांश खरगे, मल्लिकार्जुन खरगे के पुत्र, और सिद्धारमैया के बेटे हैं। कर्नाटक के राजनीतिक माहौल में यह सब कुछ आसान नहीं होगा। सिद्धारमैया भी अनुभवी नेता हैं और उनके पास AHINDA का समर्थन है, जो दलित, अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्गों का संगठन है।

एएचआईएनडीए का महत्व

कर्नाटक में AHINDA की नींव बेहद महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य अल्पसंख्यक, पिछड़े और दलित वर्गों का उत्थान करना है। सिद्धारमैया ने इस फॉर्मूले के आधार पर अपनी सरकार चलाई थी। अब डीके शिवकुमार को इस समीकरण को संभालना होगा। कर्नाटक में जेडीएस और कांग्रेस के बीच इस सामंजस्य को बनाकर रखना कोई आसान काम नहीं होगा।

सिद्धारमैया का स्थायी प्रभाव

सीएम पद से इस्तीफे के बावजूद, सिद्धारमैया का प्रभाव कम नहीं होगा। उन्होंने हाल ही में पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को मंजूरी दी है, जिसे लागू करने में डीके शिवकुमार को चर्चाओं का सामना करना पड़ेगा। अगर वह इसे लागू करेंगे तो अपने ही समुदाय के विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

फिर से संघर्ष का समय

डीके शिवकुमार को अपने दावों को संभालने के लिए हर कदम सोच-समझकर उठाना होगा। उप मुख्यमंत्री पद के दावेदारों के बीच संतुलन बनाए रखना और जनता के बीच विश्वास स्थापित करना उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए। जैसा कि राहुल गांधी हर राज्य में दलितों और पिछड़ों को वरीयता देने के पक्षधर हैं, डोक्युमेंट्री बनाकर यह दिखाना होगा कि कांग्रेस अपने वादों को निभा रही है। कर्नाटक की राजनीति में आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।

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