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क्या है कोरोना की जंग में भीलवाड़ा मॉडल?

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कोरोना जंग में भीलवाड़ा मॉडल
 

कोरोना की जंग में भीलवाड़ा जैसा राजस्थान का एक गुमनाम सा जिला आज पूरे देश के लिए नजीर बन गया, कोरोना को काबू करने के लिए इन दिनों भीलवाड़ा मॉडल की खूब चर्चा हो रही है। कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने में भीलवाड़ा मॉडल काफी सफल रहा है, इस मॉडल को लेकर देशभर में तारीफ भी हो रही है, इसके चलते कई राज्य सरकारों ने भीलवाड़ा मॉडल को अपनाया है तो केंद्र सरकार भी सबसे ज्यादा प्रभावित जगहों पर इसी तर्ज पर काबू करने की बात कर रही है। इस मॉडल के पीछे भीलवाड़ा के जिलाधिकारी राजेंद्र भट्ट है जिन्होंने बखूबी ना सिर्फ इसे लागू कराया बल्कि आज की तारीख में भीलवाड़ा कोरोना मुक्त हो गया है। The CSR Journal ने ख़ास बातचीत की भीलवाड़ा के जिलाधिकारी राजेंद्र भट्ट से

बहुत मुबारक हो आप सभी को, आपके इस कोरोना की जंग में भीलवाड़ा मॉडल को ख़ूब सराहा जा रहा है और कई तो इसे अपने यहां अपनाने की सोच रहें है, भीलवाड़ा मॉडल आखिरकार है क्या, किस तरह से आपने इसे अंजाम दिया?

भीलवाड़ा मॉडल हमारी एक सोची-समझी स्ट्रेटजी है। 20 मार्च को जब हमारे यहां पर पहला केस कोरोना पॉजिटिव आया, तो वह केस था एक डॉक्टर का। वह यहां के एक नामचीन और बड़े डॉक्टर है। जिन्होंने अस्पताल में और प्राइवेट क्लीनिक में बहुत सारे मरीज देखे थे। उनके अस्पताल में बहुत सारे मरीज एडमिट थे डॉक्टर अपने संक्रमण काल में सिर्फ अस्पताल के 5400 मरीज देख चुके थे, यह रिकॉर्ड हमारे पास तो था, लेकिन उन्होंने प्राइवेट क्लीनिक में कितने मरीज देखें तो इसका डेटा हमारे पास नही था। उन घर पर बहुत भीड़ लगती रहती थी। हम अगर ये मानकर चले कि उन्होंने अस्पताल में 5000 से ज्यादा मरीज देखें, यह भी हम आकलन लगा रहे थे कि घर पर भी उन्होंने उतने ही मरीज देखे होंगे। यानी डॉक्टर ने लगभग यानि डॉक्टर ने लगभग दस हज़ार लोगों को देखा था।

इतने बड़े पैमाने पर संक्रमण का फैलाव का डर, एक व्यक्ति जो पॉजिटिव था, वो 10 हज़ार लोगों के संपर्क में आया, ऐसे में तो कम्युनिटी स्प्रेड का डर था, किस तरह से फिर आप लोग सर्तक हुए, मुख्यमंत्री जी का इसपर क्या कहना था ?

मुख्यमंत्री जी से हमने प्लान ऑफ एक्शन डिस्कस किया, सबसे पहले हमने आसपास के जिलों के जिलाधिकारियों को अलर्ट किया कि हमारे जिले में इस तरह का मामला आया है, हमें जानकारी कुछ भी नही थी। हमनें बताया कि आप लोग अपने अपने जिलों को सील कर दें। तो सबसे पहले जिले को आइसोलेशन में किया गया। लेकिन हमें पता था कि सिर्फ आइसोलेशन से काम नहीं होने वाला है, हमारा शहरी इलाका एपीसेन्टर हो सकता है था इसलिए हमने सिटी को आइसोलेट किया। ताकि शहर के लोग ग्रामीण इलाकों में ना जा सके। इसके साथ ही अस्पताल और जहां पर पॉजिटिव मरीज मिल रहे थे वह इलाका भी काँटेन्मेंट जोन में तब्दील किया, 1 किलोमीटर के दायरे में पूरी तरह से मूवमेंट को रिस्टिक किया गया। पूरी तरह से इन इलाकों में आवाजाही बंद की गई दुकानें बंद रहेंगी। हर एक चीज उस इलाके में बंद रहेगा। साथ ही लगातार डिसइन्फेक्शन का काम भी जारी रहेगा। इन सब के साथ साथ पूरे शहर की डोर टू डोर जाकर स्क्रीनिंग कराई गई और रूरल एरिया में डोर टू डोर सर्वे भी करवाया गया कि जो भी लोग किसी तरह से सिंप्टमैटिक तो नही है जैसे बुखार खांसी जुखाम या फिर उस अस्पताल में अपने आप को दिखाया हो या उस डॉक्टर के पास गए हो सारा एक परफॉर्मा के तहत सर्वे हुआ।

तो क्या आपके पास इतना मैन पावर था कि हर एक घर जाकर स्क्रीनिंग और सर्वे को अंजाम दिया जा सकें। ये किस तरह से पॉसिबिल हो पाया?

हमनें एक सिस्टम की तहत काम किया, हमारें पास हो मैन पावर था उसी को चरणबद्ध तरीके से इस्तेमाल किया,  हमारें हर गांव में ANM है, आशा वर्कर्स है, अस्पतालों में डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टॉफ हमनें सब का इस्तेमाल किया, स्वाइन फ्लू के लिए सर्वे करने वाली टीम को भी हमने मैदान में सर्वे के लिए उतार दिया। ये एक्सपर्ट टीम होती है और इस टीम ने सभी को ट्रेंड भी किया। कोरोना को काबू में करने के लिए हमने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये भी कोरोना वारियर्स कक ट्रेनिंग दी। हमें ये बताने में खुशी है कि अबतक पूरे भीलवाड़ा शहर की 3 बार स्क्रीनिंग की जा चुकी है। पूरे जिले में साढ़े 22 लाख की आबादी रहती है और सभी का सर्वे हुआ है। जो जो पॉजिटिव निकलते जा रहे थे उनकी बड़ी ही एग्रिसेवली कांटेक्ट ट्रेसिंग की जा रही थी। और उन्हें आइसोलेट किया जाता या कोरेंटिन में भेज दिया जाता ।

यहां हम आपकी आइसोलेशन और कोरेंटिन की स्ट्रेटेजी भी समझना चाहेंगे, क्योंकि स्थानीय लोगों का समर्थन और उन मरीजों की निगरानी कैसे संभव हो पाती थी, आइसोलेशन और कोरेंटिन सेंटरों की कमी तो नही हुई न?

आइसोलेशन और कोरेंटिन सेंटर की कमी ना हो इसलिए शहर के जितने भी होटल थे, उनको कोरेंटिन सेंटर में बदल दिया गया। अगर गांव के लोगों को लक्षण मिलते तो उन्हें उनको घरों के अंदर ही होम क्वॉरेंटाइन कर दिया जाता और घर के सामने एक बोर्ड लगा दिया जाता वह कहीं मूवमेंट ना कर सके। उन पर लगातार निगरानी रखने के लिए उसी गांव के जो सम्मानित व्यक्ति हुआ करते थे या फिर कोई रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी उनको कोरोना फाइटर की उपाधि देकर इन मरीजों पर कड़ी निगरानी रखने के लिए नियुक्त भी कर दिया जाता था। इन लोगों की जितनी भी रिक्वायरमेंट होती थी घर के अंदर सारी सुविधाएं प्रोवाइड की जाती थी। भीलवाड़ा जिले में 1910 गांव है और हर गांव में कोरोना फाइटर की इसी तरह से तैनाती की गई।

सरकार की तरफ से आपको किस तरह सहयोग मिल रहा है, कोई कमी तो नही है ना, क्योंकि डॉक्टर्स, PPE किट की मांग के हिसाब से सप्लाई नही है, भीलवाड़ा में क्या स्तिथि है?

राजस्थान सरकार ने जिला प्रशासन की खूब मदद की, जिस तरह से सिर्फ एक जिए में आंकड़े बढ़ रहें थे, ये हम सब के लिए एक चिंता का विषय था, मीडिया रिपोर्ट्स देखने के बाद और डर का माहौल लोगों में बन गया, हमें लगातार कम्युनिटी स्प्रेड की चिंता सता रही थी लेकिन सरकार की सर्तकता सराहनीय रही, हमें डॉक्टरों नर्सों और मेडिकल स्टाफ की कोई कमी नही रही, PPE किट की कोई कमी नही रही, अब तो लैब भी हमारें भीलवाड़ा में हो गया है।

आंकड़ों की बात करें तो पूरे भीलवाड़ा में कितने लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए, कितने का सफल इलाज हुआ, कितने मरीजों की मौत हुई, फिलहाल कोरोना के क्या आंकड़े है?

जब से ये महामारी फैली है, भीलवाड़ा में 28 लोग पॉजिटिव आये थे, उनमें से 25 लोग सही सलामत घर जा चुके है। अब तक 40260 टेस्ट हम करा चुके है, हर दिन 300 लोगों का टेस्ट होता है, यहां हम ये भी स्पष्ट करना चाहते है कि जो भीलवाड़ा में 2 लोगों की मौत हुई थी वो कोरोना से नही बल्कि अन्य बीमारी से पहले से ही ग्रसित थे। एक मरीज को ब्रेन स्ट्रोक आया था और दूसरे मरीज की किडनी फेलियर से मौत हुई है। अभी एक ही मरीज कोरोना से संक्रमित है जो 4 दिन पहले आया है। और ये बताते हुए बड़ी खुशी हो रही है कि पिछले 2 दिनों से एक भी कोरोना पॉजिटिव मरीज भीलवाड़ा में नही आया।

लॉक डाउन और भी बढ़ाया जा रहा है, राजस्थान में बढ़ाया जा चुका है, महाराष्ट्र में भी 30 तारीख तक बढ़ाया जा चुका है, कई ऐसे मामले देखें जा रहें है कि जिनमें कोई कोरोना के लक्षण ही नही है फिर भी वो कोरोना पॉजिटिव है। आपके जिलें में क्या इस तरह के पेशेंट आये और किस तरह से आपने इसको टैकल किया?

भीलवाड़ा जिले के 28 पॉजिटिव केसेस में से 9 ऐसे मरीज थे जिन्हें कोई लक्षण ही नही था, ऐसे मरीजों को हम एसिम्टमैटिक पेशेंट बोलते है, ऐसे कई लोग हो सकते हो जो एसिम्टमैटिक पॉजिटिव हो और वो लोग औरों में फैला रहें हो। इस परिस्थिति से निपटने के लिए 20 तारीख से 2 अप्रैल तक हमने सख्त कर्फ़्यू लगाकर रखा, इस दौरान हमनें जरूरी सामानों की दुकानों को भी बंद रखा चाहे वो राशन की दुकानें हो या मेडिकल की। कोई असुविधा न हो जनता में इसलिए हम लोगों ने घरों तक जरूरी सामान पहुंचाया। सब्जी, राशन, दवाईयों को घर तक पहुंचाया । सरकार की तरफ से 45 गाड़ियां भी हमने उप्लब्ध करवाये। एसिम्टमैटिक मरीज स्लीपर बम जैसे है इसलिए टेस्टिंग और फिर क़वारंटाइन करना जरूरी है। 14 दिन में इनमें लक्षण अपने आप आ जाते है या फिर ये पॉजिटिव से नेगेटिव हो जाते है। हमारी पूरी कोशिश रहती है कि कोरोना का जो चेन है उसे हम भीलवाड़ा में ही तोड़ दें। फिलहाल लॉक डाउन को और बढ़ाया जाना चाहिए ऐसे मैं गुजारिश करता हूँ।

जिस डॉक्टर से कोरोना की शुरुवात भीलवाड़ा में हुई थी अभी उस डाक्टर की तबियत कैसी है?

भीलवाड़ा में जिस डॉक्टर से कोरोना संक्रमण हुआ वो डॉक्टर अब कोरोना नेगेटिव हो गया है, वो पूरी तरह ठीक है, उस डॉक्टर के साथ अन्य 3 डॉक्टर और 14 नर्सिंग स्टाफ भी पूरी तरह से ठीक है। अस्पताल के मरीज भी अब ठीक हो गए।

एक अहम सवाल, आपका भीलवाड़ा मॉडल क्या देश के दूसरे राज्यों और शहरों में भी लागू किया जा सकता है क्या?

ये सवाल कई बार मुझसे पूछा गया है, इसका जवाब यही है कि पूरा का पूरा मॉडल अगर आप कहीं का कहां फिट करना चाहेंगे तो नही हो पायेगा। अगर आपके कपड़े का साइज मीडियम है तो एक्स्ट्रा लार्ज वाला आदमी नही पहन पायेगा। जिस तरह से हमारा जिला है यानी 7 लाख की शहरी आबादी और 25 लाख रूरल आबादी, ऐसे राजस्थान में 23 और जिले है जहां भीलवाड़ा से भी ज्यादा आबादी है, जहां कम आबादी है वहां तो लागू किया जा सकता है लेकिन जहां ज्यादा आबादी है वहां मुश्किल है। अगर हम बात करें मुंबई की तो मुंबई के लिए कुछ सिस्टम को लिया जा सकता है बाकी मॉडल को कस्टमाइज किया जा सकता है। धारावी में कैसे लगेगा ये भी लोग मुझसे पूछ रहे है, तो मैं बता दूं कि जब एक स्लम है जहां एक छोटे से कमरे में 8 लोग रहते है वहां सोशल डिस्टेंसिंग संभव ही नही है ऐसे में इन्हें शिफ्ट कर क़वारंटाइन सेंटर में ले जाना पड़ेगा। बड़ी आबादी में डोर टू डोर सर्विस भी देना संभव कैसे हो पायेगा ये भी देखना चाहिए। बहुत कुछ किया जा सकता है।

भीलवाड़ा के सफल मॉडल को देखते क्या दूसरे राज्य और शहर आपको संपर्क कर रहें है, क्या कोई इस मॉडल को जानने के लिए कॉल आ रहा है?

बिल्कुल आ रहा है, हमारे प्रदेश में मुख्यमंत्री जी से लगातार लोग संपर्क कर रहें है। जो जो संपर्क कर रहा है हमारे मुख्यमंत्री जी ने एक PPT बनाया है उन्हें ये सब दे रहें है। हरियाणा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र से अधिकारी मुझसे संपर्क में भी है। इस मॉडल से जो अच्छी चीज लगेगी वो अपने अपने राज्यों में लागू करेंगे।