क्या होगा BRICS का फ्यूचर, भारत के सामने क्या चुनौतियां? एक्सपर्ट ने बताया

The CSR Journal Magazine
नई दिल्ली में हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समय भारत के लिए महत्वपूर्ण है। इसे ग्लोबल लीडरशिप को फिर से साबित करने का अवसर माना जा रहा है। माइकल कुगेलमैन, एक साउथ एशिया एनालिस्ट, का मानना है कि इस समिट से भारत अपने अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को मजबूती देने की कोशिश कर सकता है। यह समिट विकासशील देशों को एकजुट करने का एक प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।

क्या है BRICS का महत्व?

BRICS समूह का विस्तार पिछले दो दशकों में तेजी से हुआ है, जिसमें अब 21 सदस्य देश शामिल हैं। हाल के राजनीतिक हालात और भू-राजनीतिक तनाव के बीच, यह समूह अपने सदस्यों को एकजुट रखने का प्रयास कर रहा है। अगर दिल्ली इस समिट में एक साझा बयान जारी करने में सफल रहती है, तो यह उसका एक बड़ा कदम होगा।

भारत की दो बड़ी चुनौतियां

समिट के दौरान भारत को दो महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। पहला, ईरान में चल रहे युद्ध का प्रबंधन, क्योंकि BRICS में ईरान और UAE दोनों शामिल हैं। आम सहमति कायम करना आसान नहीं होगा। दूसरा, अमेरिका का फैक्टर है। कई सदस्य देश एक साझा बयान जारी करने की कोशिश कर सकते हैं जो अमेरिका की आलोचना करता हो, लेकिन भारत ऐसा करने से बचना चाह रहा है। इसे वह अपने अमेरिकी संबंधों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी मानता है।

ग्लोबल साउथ की संभावनाएं

कुगेलमैन का कहना है कि यह समिट उन विकासशील राष्ट्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जो वैश्विक आर्थिक और वित्तीय प्रणाली में अस्थिरता के बीच नए विकल्प तलाश रहे हैं। भारत का यह प्रयास भारतीय विदेश नीति की प्राथमिकताओं को भी दर्शाता है।

BRICS नाम की चीज़ें

BRICS नाम का निर्माण गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने 2001 में किया। यह नाम ब्राजील, रूस, भारत और चीन की विकास संभावनाओं को उजागर करता था। 2009 में ये देश एक ब्लॉक के रूप में इकट्ठा हुए, और 2011 में दक्षिण अफ्रीका जुड़ा। हाल के वर्षों में ग्रुप का विस्तार किया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी का बयान

दिल्ली में BRICS बिजनेस फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक व्यापार के लिए सुरक्षित समुद्री मार्गों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है और आर्थिक स्थिरता का ध्वजवाहक बना हुआ है।

समिट के नतीजे पर नजर

कुगेलमैन ने ध्यान दिलाया कि एक बड़े और जटिल समूह में एकजुटता बनाए रखना भारत के लिए बड़ी चुनौती होगी। इससे समिट की सफलता का आंकलन किया जाएगा। भारत के लिए यह समिट कई मामलों में एक विकास के नए चरण की शुरुआत कर सकता है।

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