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March 4, 2026

अमेरिकी-इजराइली हमलों पर AIMPLB की जोरदार निंदा, युद्धविराम की अपील

The CSR Journal Magazine
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने ईरान पर अमेरिकी-इजराइल के संयुक्त हमलों की कड़ी निंदा की है। बोर्ड ने तुरंत युद्धविराम की मांग की है और कहा है कि इस हमले से वैश्विक युद्ध का खतरा बढ़ गया है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए जोरदार हमलों ने वहां स्थिति को बेहद गंभीर बना दिया है। ईरान लगातार पलटवार कर रहा है और इससे मिडिल ईस्ट की स्थिति और भी खराब होती जा रही है। भारत के कई मुस्लिम संगठनों ने भी इन हमलों की निंदा की है।

संयुक्त राष्ट्र से की गई अपील

AIMPLB ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह आग्रह किया है कि वे प्रभावी कदम उठाकर युद्धविराम सुनिश्चित करें। संगठन ने कहा है कि इससे क्षेत्र में भयानक युद्ध की विभीषिका से बचा जा सकता है। AIMPLB ने कहा है कि यह समय गंभीर कूटनीतिक हस्तक्षेप का है ताकि युद्ध से उत्पन्न भारी संकट को रोका जा सके।

बातचीत का टूटना एक चिंता

बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. एस.क्यू.आर. इलियास ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका और ईरान के बीच चर्चा में सकारात्मक प्रगति हुई थी। ओमान के विदेश मंत्री बदर अल-बुसैदी ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि ईरान अमेरिका की लगभग सभी शर्तों पर सहमत था। इसके बावजूद अचानक बातचीत को समाप्त करना और तुरंत हमले करना यह दर्शाता है कि बातचीत केवल एक बहाना थी और कोई गंभीर प्रयास नहीं था।

आयतुल्लाह खामेनेई की शहादत पर शोक

डॉ. इलियास ने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह खामेनेई की शहादत पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने इसे पूरे मुस्लिम समुदाय के लिए एक बड़ी क्षति बताया है। उनका कहना था कि किसी स्वतंत्र देश के नेता को युद्ध के दौरान निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है, और यह गंभीर स्थिति है।

बड़े वैश्विक युद्ध का खतरा

डॉ. इलियास ने चेतावनी दी है कि इस संघर्ष के कारण पूरा मध्य पूर्व अस्थिर हो गया है। उन्होंने कहा कि कई यूरोपीय देश अमेरिका का समर्थन कर रहे हैं, जबकि रूस और चीन ईरान के साथ हैं। उन्होंने कहा कि अगर जल्द से जल्द प्रभावी कूटनीति नहीं अपनाई गई, तो यह संघर्ष एक बड़े वैश्विक युद्ध में बदल सकता है, जो मानवता के लिए गंभीर संकट उत्पन्न कर सकता है।

दुनिया की नजरे अब भारत पर

डॉ. इलियास ने अफसोस जताया कि इस नाजुक समय पर भारत एक संतुलित मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता था, लेकिन वर्तमान स्थिति ने इसे मुश्किल बना दिया है। उन्होंने यह भी चिंता व्यक्त की कि आयतुल्लाह खामेनेई की शहादत पर कोई शोक संदेश नहीं भेजा गया, जो हमारे कूटनीतिक परंपराओं के खिलाफ है। AIMPLB ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र एवं अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह अपील की है कि वे जल्दी और प्रभावी कदम उठाएं, अन्यथा इसके दुष्परिणाम सीमित नहीं रहेंगे।

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