Sheikh Hasina की बांग्लादेश लौटने का ऐलान: नया अध्याय या बड़ा दांव?

The CSR Journal Magazine
ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के दौरान शेख हसीना को 5 अगस्त 2024 को ना सिर्फ प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी, बल्कि उन्हें देश भी छोड़ना पड़ा। तब से वे भारत में अज्ञात स्थान पर रह रही हैं। बुधवार को उस घटना के दो साल पूरे होने पर, उन्होंने पहली बार मीडिया से बात की। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेख हसीना वर्चुअली जुड़ीं, जबकि कैमरा बंद था और वे ऑडियो लिंक के जरिए संवाद कर रही थीं। उन्होंने कहा कि वे दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी। उनकी आवाज में भावुकता थी, और वे इस दौरान रो पड़ीं।

बांग्लादेश का हाल: दर्द और संघर्ष

हसीना ने कहा कि वे दो सालों से बांग्लादेश की तकलीफ देख रही हैं। उन्होंने बताया कि यह वह बांग्लादेश नहीं है, जिसे उन्होंने अपने पिता की विरासत में बनाया था। हसीना ने कहा, “बांग्लादेश के लोग पिछले दो वर्षों में बहुत दर्द झेल चुके हैं।” उन्होंने किसी भी प्रकार के झूठे मुकदमों से डरने की बात की और कहा कि वे अपने देश लौटने के लिए तैयार हैं, चाहे उन्हें कितनी भी मुश्किलें आएं।

विशेषज्ञों की राय: साहसिक कदम या जोखिम?

विशेषज्ञों का कहना है कि हसीना का यह कदम बेहद साहसिक है। पूर्व भारतीय सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल (रि) जेएस सोढ़ी ने कहा कि जब वे बांग्लादेश पहुंचेंगी, तो उन्हें जेल या दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि “हसीना को यह अच्छी तरह से पता है कि बांग्लादेश की स्थिति कितनी गंभीर है।” सोढ़ी ने कहा कि हसीना का यह फैसला बांग्लादेश की जनता के लिए महत्वपूर्ण है।

बांग्लादेश सरकार की प्रतिक्रिया

बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर आक्रोशित है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि यह देश की संप्रभुता का उल्लंघन है। उन्होंने टाइमिंग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह बयान उस दिन दिया गया जब जुलाई आंदोलन की दूसरी बरसी थी।

भारत और बांग्लादेश के संबंध

बांग्लादेश की सरकार ने भारत सरकार पर आरोप लगाया है कि उन्होंने इस कार्यक्रम की अनुमति दी, जबकि इसकी प्रभाव पर पहले ही चेतावनी दी गई थी। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि इस कॉन्फ्रेंस में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। विशेष रूप से, बांग्लादेश सरकार ने यह भी कहा कि हसीना और उनके माफिया नेटवर्क के लिए बांग्लादेश की राजनीति में कोई जगह नहीं होगी।

भविष्य की दिशा

जब सोढ़ी से पूछा गया कि हसीना की वापसी का द्विपक्षीय संबंधों पर क्या असर पड़ेगा, तो उन्होंने कहा कि “भारत पर कोई दबाव नहीं है।” हसीना का बांग्लादेश लौटने का निर्णय उनका व्यक्तिगत है और इसमें भारत सरकार की भूमिका नहीं है। शेख हसीना की बांग्लादेश में अभी भी मजबूत लोकप्रियता है, और लोग उनके अनुभव से उन्हें फिर से सत्ता में देखना चाहते हैं।

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