इस्तीफे-गिरफ्तारी और बुलडोजर एक्शन: ममता बनर्जी पर बडे़ संकट के बादल
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर गंभीर राजनीतिक संकट गहरा गया है, जहां पार्टी के कई जमीनी नेता लगातार इस्तीफा दे रहे हैं और नवनिर्वाचित शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर बुलडोजर कार्रवाई की जा रही है। पार्टी के भीतर कम होती विधायकों व कार्यकर्ताओं की उपस्थिति (हालिया टीएमसी विरोध प्रदर्शन में मात्र 36/80 विधायक पहुंचे) और स्थानीय निकायों में बढ़ती गिरफ्तारियों ने तृणमूल कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया है।
सत्ता से बेदखल: हर ओर से मुश्किलें
पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार के आने के बाद से ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस का हाल बेहाल है। चुनाव में हार के बाद कई तृणमूल नेता इस्तीफा दे रहे हैं और अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाए जा रहे हैं। यह संकट केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर भी गहरा है। ममता की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं, और ऐसा लगता है कि उनके अपने साथी भी उन्हें छोड़ने लगे हैं।
बुलडोजर एक्शन का तांडव
नई सरकार ने अवैध इमारतों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार को हुगली जिले के कोननगर में तृणमूल कांग्रेस का एक ऑफिस गिरा दिया गया, जिसे अवैध माना गया। यह ऑफिस स्थानीय पार्षद खोकोन पाल द्वारा बनवाया गया था। इसके साथ ही, कोलकाता पुलिस ने पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास पर सुरक्षा उपकरणों की जांच की, जिससे टीएमसी के स्थानीय नेताओं में डर का माहौल बन गया है।
कोलकाता में भी चल रहा ऑपरेशन बुलडोजर
कोलकाता के कई इलाकों जैसे बेलेघाटा, बोसपुकुर और कस्बा में भी बुलडोजर तैनात किए गए हैं। यहां अवैध बहुमंजिला इमारतों को गिराने की कार्रवाई की जा रही है जो कथित तौर पर तृणमूल के पूर्व या मौजूदा नेताओं से जुड़ी हैं। विधायक जावेद खान के स्वामित्व वाली एक इमारत पर भी कार्रवाई की गई है, जिसमें अवैध निर्माण के आरोप लगे हैं।
अवैध निर्माण पर सख्त रुख
शुभेंदु अधिकारी की सरकार बनते ही राज्य में ‘योगी मॉडल’ की तर्ज पर अवैध निर्माणों और सिंडिकेट राज को तोड़ने के लिए बुलडोजर तैनात किए गए हैं। आसनसोल के बर्नपुर में सेल (SAIL) की जमीन पर बने और हुगली के कोननगर में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाए गए टीएमसी पार्टी कार्यालयों को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया है। 4 मई को बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से अवैध निर्माण हटाने के अभियान में तेजी आई है। तृणमूल कांग्रेस की कई संपत्तियों पर नजर रखी जा रही है। ममता बनर्जी ने सरकार की इस कार्रवाई की आलोचना की है, लेकिन कई पार्टी के वरिष्ठ नेता इस पर चुप्पी साधे हुए हैं।
पार्टी में इस्तीफों का दौर
चुनाव परिणामों के बाद बैरकपुर, भटपारा, कांचरापाड़ा, हलीसहर, गारुलिया और डायमंड हार्बर जैसी नगर पालिकाओं से 100 से अधिक टीएमसी पार्षदों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। टीएमसी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने चुनावी हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पार्टी के बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया और चुनावी रणनीतिकार संस्था आई-पीएसी (I-PAC) की भूमिका की कड़ी आलोचना की। कई पार्षदों ने स्थानीय स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं और पुलिस के अत्यधिक हस्तक्षेप को इस्तीफे की वजह बताया है। कई अन्य नेताओं के भाजपा में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
गिरफ्तारियों की बढ़ती संख्या
तृणमूल नेताओं की गिरफ्तारी का सिलसिला भी जारी है। बीरभूम जिले में एक पार्षद के पति को रंगदारी मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें पुलिस ने तृणमूल के समर्थकों से पूछताछ की है। कोलकाता नगर निगम ने टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी से जुड़ी कई संपत्तियों और कस्बा के विधायक जावेद खान की इमारत को अवैध निर्माण के आरोपों में नोटिस जारी किया है। जबरन वसूली, सिंडिकेट चलाने और धमकी देने के आरोपों में राज्यभर से एक दर्जन से अधिक स्थानीय टीएमसी पार्षदों और पंचायत प्रधानों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि- 15 साल के शासन का अंत
वर्ष 2026 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 294 में से 207 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, जिससे राज्य में 15 साल पुराना टीएमसी का शासन समाप्त हो गया है। ममता बनर्जी खुद भाबनीपुर सीट से चुनाव हार गईं। शुरुआत में चुनाव में धांधली का आरोप लगाकर इस्तीफा न देने पर अड़ीं ममता बनर्जी आखिरकार 7 मई 2026 को राज्यपाल द्वारा विधानसभा भंग किए जाने के बाद पद से हट गईं। ममता बनर्जी और टीएमसी नेतृत्व ने इस बुलडोजर कार्रवाई को “टारगेट पॉलिटिक्स” और प्रतिशोध की राजनीति करार दिया है, जिसके खिलाफ टीएमसी कार्यकर्ताओं ने राज्य में कई जगहों पर चक्का जाम और विरोध प्रदर्शन भी किए हैं।
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