Madhya Pradesh UNESCO Heritage Sites: मध्य प्रदेश की 4 ऐतिहासिक धरोहरों को वैश्विक पहचान, UNESCO की अस्थायी सूची में मिली जगह

The CSR Journal Magazine
Madhya Pradesh Heritage Sites: मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। प्रदेश की चार महत्वपूर्ण धरोहरों उदयगिरि गुफाएं, बाघ गुफा चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला और चंबल घाटी के मंदिर समूह को UNESCO की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए इसे मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए गौरव का अवसर बताया है।

Madhya Pradesh Heritage Sites: चार धरोहरें, इतिहास की चार अलग कहानियां

UNESCO के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इन चारों स्थलों को 8 जुलाई 2026 को भारत की ओर से विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में प्रस्तुत किया गया। उदयगिरि गुफाएं गुप्तकालीन कला, धार्मिक स्थापत्य और मूर्तिकला की महत्वपूर्ण मिसाल हैं। यहां करीब 20 शैल-कट गुफाएं, विशाल वराह प्रतिमा, विष्णु से जुड़ी मूर्तियां और प्राचीन अभिलेख मौजूद हैं। UNESCO के अनुसार, यह स्थल चौथी-पांचवीं शताब्दी के गुप्तकाल में विकसित हुआ था। वहीं धार जिले की बाघ गुफाएं अपनी प्राचीन बौद्ध गुफाओं और भित्ति चित्रों के लिए जानी जाती हैं। UNESCO के अनुसार यहां नौ शैल-कट गुफाएं हैं और इनकी चित्रकारी में राजदरबार, जुलूस, नर्तक, संगीतकार और तत्कालीन सामाजिक जीवन की झलक दिखाई देती है। इन चित्रों को भारत की प्राचीन बौद्ध भित्ति चित्र परंपरा की महत्वपूर्ण कड़ी माना गया है।

Madhya Pradesh UNESCO Heritage Sites: गोंड इतिहास से चंबल की मंदिर परंपरा तक

गिन्नौरगढ़ किला मध्य भारत के गोंड इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण धरोहर है। UNESCO के मुताबिक यह गोंड शासकों की प्रमुख पहाड़ी राजधानी और राजनीतिक-प्रशासनिक केंद्र रहा। यह किला वर्तमान में रातापानी वन्यजीव अभयारण्य के भीतर स्थित है और प्राकृतिक पहाड़ी भूगोल को सुरक्षा के लिए इस्तेमाल करने वाली स्थापत्य परंपरा को दर्शाता है। इसी तरह चंबल घाटी के बटेश्वर, पदावली और ककनमठ मंदिर समूह मध्य भारत की प्राचीन नागर मंदिर स्थापत्य परंपरा को सामने रखते हैं। UNESCO के अनुसार इन मंदिरों का विकास मुख्य रूप से 8वीं से 11वीं शताब्दी के बीच हुआ। बटेश्वर में 200 से अधिक छोटे मंदिरों का समूह है, जबकि पदावली और ककनमठ अपनी मूर्तिकला और स्थापत्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।

Madhya Pradesh UNESCO Heritage Sites: क्या है UNESCO की अस्थायी सूची?

UNESCO की Tentative List में शामिल होना किसी स्थल के विश्व धरोहर स्थल के रूप में अंतिम चयन के बराबर नहीं है। यह विश्व धरोहर नामांकन की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण चरण है। UNESCO के रिकॉर्ड में मध्य प्रदेश के इन चारों स्थलों को 2026 में जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक विरासत को विश्व स्तर पर नई पहचान मिल रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और उन्हें दुनिया तक पहुंचाने के प्रयासों को मजबूत करने का आह्वान किया। मध्य प्रदेश पहले से ही खजुराहो, सांची और भीमबेटका जैसी विश्व प्रसिद्ध धरोहरों के लिए जाना जाता है। ऐसे में UNESCO की अस्थायी सूची में इन चार नए स्थलों का शामिल होना प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर आगे ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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